खेती-किसानी को लाभकारी कारोबार में तब्दील करने और काश्तकारों को उपज के भंडारण से लेकर बाजार तक सीधी पहुंच दिलाने के उद्देश्य से किसान उत्पादक संगठन एक सशक्त माध्यम के रूप में उभर रहे हैं। संगठित ढांचे के जरिए छोटे और सीमांत किसान सामूहिक शक्ति का इस्तेमाल कर अपनी फसलों की बेहतर कीमत हासिल कर सकते हैं। केवल फसल उगाने तक सीमित रहने के बजाय उत्पादन के बाद होने वाले कार्यों को भी साझा तौर पर अंजाम दिया जा सकता है, जिससे लागत घटती है और मुनाफा सीधे उत्पादक की जेब में पहुंचता है।
संगठन गठन के न्यूनतम मानक और भौगोलिक दायरा
इस व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए कम से कम सात किसानों का एक साथ आना आवश्यक निर्धारित किया गया है। सात या उससे अधिक काश्तकार मिलकर विधिवत पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं और एक वैधानिक समूह की नींव रख सकते हैं। पंजीकरण संपन्न होते ही समूह को कृषि आधारित विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों को वैधानिक तौर पर चलाने की पात्रता मिल जाती है।
भरतपुर संयुक्त कृषि निदेशक राधेश्याम मीणा ने स्पष्ट किया है कि ऐसे समूह स्थापित करने के लिए किसी एक स्तर की बाध्यता तय नहीं की गई है। काश्तकार अपनी सुविधा, आपसी समन्वय और भौगोलिक प्राथमिकताओं के मुताबिक ग्राम पंचायत स्तर, ब्लॉक स्तर अथवा जिला स्तर पर संगठन की संरचना तय कर सकते हैं। प्राथमिक लक्ष्य यही है कि स्थानीय स्तर पर किसानों का जमावड़ा बने और वे अपने संसाधनों को एक साझा मंच पर लाकर मजबूती हासिल करें।
उत्पादन के बाद प्रसंस्करण और पैकेजिंग पर जोर
अक्सर देखा जाता है कि किसान अपनी मेहनत से बंपर पैदावार तो ले लेते हैं, लेकिन तुड़ाई के तुरंत बाद औने-पौने दामों में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर हो जाते हैं। संगठन के ढांचे से जुड़ने के बाद सदस्य केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं रहते। वे अपनी उपज की ग्रेडिंग, बेहतर पैकेजिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण और सुरक्षित भंडारण जैसी बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन खुद करने में सक्षम हो जाते हैं।
जब तैयार कृषि उत्पाद साफ-सुथरे, वर्गीकृत और सुरक्षित पैकेजिंग के साथ मंडियों या सीधे खरीदारों तक पहुंचते हैं, तो उनकी बाजार दर सामान्य से कहीं अधिक प्राप्त होती है। सामूहिक मार्केटिंग व्यवस्था होने के कारण काश्तकारों की मोलभाव करने की क्षमता में भी इजाफा होता है, जिससे बड़े व्यापारियों या कंपनियों से सीधे सौदे किए जा सकते हैं।
कस्टम हायरिंग सेंटर से घटेगी मशीनों की लागत
आधुनिक कृषि में यंत्रों और भारी मशीनरी की जरूरत लगातार बढ़ रही है, लेकिन हर किसान के लिए महंगे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर या लेजर लैंड लेवलर खरीद पाना मुमकिन नहीं होता। इस चुनौती से निपटने के लिए किसान उत्पादक संगठन कस्टम हायरिंग सेंटर का संचालन भी कर सकते हैं।
इस केंद्र के माध्यम से महंगे कृषि उपकरण और अत्याधुनिक मशीनें संगठन के अधीन रखी जाती हैं, जिन्हें सदस्य किसान अपनी जरूरत के वक्त बहुत किफायती दरों पर किराए पर ले सकते हैं। सामूहिक रूप से आधुनिक संसाधन उपलब्ध हो जाने से न सिर्फ खेती के काम समय पर पूरे होते हैं, बल्कि प्रति एकड़ जुताई और कटाई का खर्च भी काफी कम हो जाता है। साथ ही संगठन खाद, बीज और कीटनाशक जैसे आवश्यक आदानों की थोक खरीद कर सदस्यों को सस्ते में उपलब्ध करा सकता है।
सरकारी सहायता और पूंजी विस्तार के नियम
संगठन के सुचारू संचालन और आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत वित्तीय सहायता का प्रावधान रखा गया है। समूह के गठन, शुरुआती परिचालन, बुनियादी ढांचे के विकास और कृषि आधारित नए उद्यम खड़े करने के लिए मदद दी जाती है। इसमें शेयर पूंजी या इक्विटी बढ़ाने के लिए मिलने वाला सहयोग भी शामिल है, जिससे संस्था की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होती है। हालांकि, अनुदान की कुल धनराशि, पात्रता के पैमाने और आवेदन संबंधी नियम संबंधित सरकारी योजनाओं के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अलग-अलग तय किए जाते हैं।




















