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निराश्रितों की सेवा का दायरा बढ़ा, बिहार के चार जिलों में खुले अपना घर आश्रमराजस्थान
21 सित॰ 2026, 11:46 am (4 दिन पहले)· 0

निराश्रितों की सेवा का दायरा बढ़ा, बिहार के चार जिलों में खुले अपना घर आश्रम

भरतपुर से शुरू हुई मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन की मुहिम अब 80 आश्रमों तक पहुंची, बिहार के बाद जम्मू और पंजाब में भी जल्द खुलेंगे नए केंद्र।

सड़कों पर लावारिस, बीमार और असहाय अवस्था में जीवन बिताने वाले प्रभुजनों की सेवा का संकल्प अब देशभर में तेजी से फैल रहा है। राजस्थान के भरतपुर से शुरू हुई मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन अपना घर की कल्याणकारी यात्रा ने सेवा कार्यों का दायरा बढ़ाते हुए पूर्वी भारत में बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में बिहार के चार प्रमुख शहरों में नए आश्रमों का विधिवत संचालन शुरू कर दिया गया है, जिससे बेसहारा और उपेक्षित लोगों को स्थानीय स्तर पर फौरी राहत और छत मिल सकेगी।

बिहार के चार शहरों में छत और चिकित्सा की व्यवस्था

संस्था के नए विस्तार अभियान के अंतर्गत बिहार के पटना, गया, रोहतास और भागलपुर में चार समर्पित आश्रम स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों की स्थापना से अब क्षेत्रीय स्तर पर ही जरूरतमंदों को सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक भोजन, बुनियादी स्वास्थ्य जांच, नियमित दवाइयां और मानवीय देखभाल उपलब्ध कराई जाएगी। अपना घर संस्था लंबे समय से ऐसे बीमार और निराश्रित प्रभुजनों को सम्मान देने में जुटी है, जिन्हें उनके परिवार त्याग चुके हैं या समाज की मुख्यधारा से कोई मदद नहीं मिल पाती।

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जम्मू और पंजाब में भी जल्द खुलेंगे सेवा केंद्र

आगामी विस्तार योजनाओं को साझा करते हुए अपना घर आश्रम के संस्थापक बी एन भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि सेवा कार्यों की पहुंच को देश के उत्तरी हिस्सों में और मजबूत किया जा रहा है। आने वाले महीने में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू में संस्था का पहला आश्रम शुरू होगा, जबकि पंजाब में दूसरा केंद्र खोला जाएगा। इन दोनों केंद्रों के चालू होते ही अपना घर का सीधा सेवा नेटवर्क देश के 14 राज्यों तक विस्तृत हो जाएगा। प्रयास यही है कि कोई भी लाचार व्यक्ति खुले आसमान के नीचे बिना इलाज और भोजन के दम न तोड़े।

80 आश्रमों तक पहुंचा मानवीय सेवा का विशाल नेटवर्क

भरतपुर की धरती से प्रज्वलित हुई यह सेवा ज्योति अब पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज करा चुकी है। बिहार में नए आश्रम जुड़ने के साथ ही इस सेवा श्रृंखला में केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 80 तक पहुंच गई है। संगठन का मूल ध्येय समाज के अंतिम पायदान पर खड़े उन बेसहारा लोगों को गरिमापूर्ण जीवन, पारिवारिक अपनत्व, सुरक्षा और समुचित देखभाल सुनिश्चित कराना है जो शारीरिक या मानसिक व्याधियों के चलते असहाय हो गए हैं। इस निरंतर फैलाव को सामाजिक कल्याण और मानवता की दिशा में एक प्रभावी प्रयास माना जा रहा है।

सवाल-जवाब

बिहार के किन शहरों में नए अपना घर आश्रम शुरू किए गए हैं?
बिहार के चार शहरों—पटना, गया, रोहतास और भागलपुर में नए अपना घर आश्रम शुरू किए गए हैं।
अपना घर आश्रम की शुरुआत कहां से हुई थी?
इस सेवा श्रृंखला की शुरुआत राजस्थान के भरतपुर में स्थित मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन से हुई थी।
आगामी माह में किन राज्यों या क्षेत्रों में नए आश्रम खोले जाएंगे?
संस्था के संस्थापक बी एन भारद्वाज के अनुसार, अगले महीने जम्मू में पहला और पंजाब में दूसरा आश्रम खोला जाएगा।
देशभर में अब अपना घर आश्रमों की कुल संख्या कितनी हो गई है?
बिहार के चार नए आश्रमों के जुड़ने के साथ ही इस सेवा श्रृंखला में आश्रमों की कुल संख्या 80 पहुंच गई है।
नए केंद्र शुरू होने के बाद संस्था का दायरा कितने राज्यों तक पहुंचेगा?
जम्मू और पंजाब में आश्रमों की शुरुआत के साथ अपना घर की सेवा यात्रा कुल 14 राज्यों तक पहुंच जाएगी।
इन आश्रमों में निराश्रित लोगों को कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं?
इन आश्रमों में जरूरतमंद और असहाय लोगों को सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक भोजन, चिकित्सा सुविधाएं और सम्मानजनक सेवा देखभाल उपलब्ध कराई जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·3 दिन पहले

बेसहारा लोगों के लिए देश भर में ऐसा मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार होना सच में बहुत बड़ी राहत की बात है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

अपना घर आश्रम का यह विस्तार केवल सामाजिक कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे और स्थानीय प्रशासन के ऊपर आश्रितों के प्रबंधन के दबाव को भी कम करता है। विशेषकर पटना, गया, रोहतास और भागलपुर जैसे प्रमुख केंद्रों में इन सुविधाओं के शुरू होने से बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को पुनर्वास का एक व्यवस्थित मंच मिला है। 14 राज्यों तक पहुंच रही यह पहल यह दर्शाती है कि नागरिक समाज अब कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में शासन का एक मजबूत विकल्प और साझीदार बन रहा है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

इस मानवीय नेटवर्क का देश के चौदह राज्यों में अस्सी आश्रमों तक पहुँचना यह रेखांकित करता है कि सामाजिक उद्यम अब एक बड़े प्रशासनिक और लॉजिस्टिक मॉडल के रूप में उभर रहा है। जब नागरिक समाज इस पैमाने पर बुनियादी स्वास्थ्य और पुनर्वास का जिम्मा उठाता है, तो यह देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने और कमज़ोर वर्ग के प्रबंधन में एक ठोस आर्थिक योगदान बन जाता है। आने वाले समय में जम्मू और पंजाब तक इस सेवा श्रृंखला के विस्तार से इसका प्रभाव और अधिक व्यापक होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

सड़कों पर लावारिस और बीमार लोगों के लिए इस तरह के राष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार प्रशासनिक और सामाजिक कल्याण के बीच की बड़ी खाई को पाटने का काम करता है। हालांकि, राज्यों की सीमाओं से परे ऐसे 'प्रभुजनों' के पुनर्वास और उनके परिवारों की तलाश के लिए स्थानीय पुलिस थानों और जिला प्रशासन के बीच जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय की सख्त आवश्यकता है, ताकि इन आश्रमों पर अचानक आने वाले भारी दबाव को प्रबंधित किया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

सड़कों पर असहाय और बेसहारा व्यक्तियों को सुरक्षित आश्रय देना कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा का भी एक संवेदनशील पहलू है। कई बार आपराधिक मामलों या गुमशुदगी की जाँच के दौरान लावारिस मिले मानसिक रूप से विक्षिप्त या बीमार लोगों की शिनाख्त बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में इन 80 आश्रमों और आने वाले समय में जम्मू व पंजाब के केंद्रों का डेटा यदि स्थानीय पुलिस के मिसिंग पर्सन पोर्टल और राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से जोड़ा जाए, तो न केवल बिछड़े हुए परिवारों को अपनों से मिलाने में तेजी आएगी, बल्कि आपराधिक या कानूनी उलझनों में फंसे पीड़ितों की कानूनी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

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