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निठारी कांड के पीड़ित परिवार ने सुरेंद्र कोली की मौत पर उठाया सवाल, जताई हत्या की आशंकाउत्तराखंड
18 सित॰ 2026, 5:23 pm (4 दिन पहले)· 1

निठारी कांड के पीड़ित परिवार ने सुरेंद्र कोली की मौत पर उठाया सवाल, जताई हत्या की आशंका

हरिद्वार में निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका मिलने के बाद, पीड़ित ज्योति के परिवार ने इसे हत्या की साजिश बताते हुए गहन जांच की मांग की है।

बहुचर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपियों में से एक रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में अपनी बेटी ज्योति को खोने वाले माता-पिता झब्बू लाल और सुनीता ने कोली द्वारा की गई कथित खुदकुशी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शुक्रवार, 18 सितंबर को हुई इस घटना को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पीड़ित परिवार को आशंका है कि सुरेंद्र कोली के पास इस भयावह कांड से जुड़े कई ऐसे गहरे राज थे, जो उसकी मौत के साथ ही दफन हो गए।

सुरेंद्र कोली की मौत को हत्या बता रहा पीड़ित परिवार

झब्बू लाल और उनकी पत्नी सुनीता का कहना है कि सुरेंद्र कोली की अचानक हुई इस मौत के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि कोली ने अपनी जिंदगी के 6935 दिन जेल की सलाखों के पीछे बिताए, लेकिन उस दौरान उसने कभी खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की। जेल से बाहर आने के बाद वह 310 दिन भी जिंदा नहीं रह पाया। परिवार का आरोप है कि अगर उसे अपनी जान ही देनी थी, तो वह जेल में रहते हुए भी फांसी लगा सकता था या जहर खा सकता था। पीड़ित माता-पिता ने आशंका व्यक्त की कि कोली ने फांसी नहीं लगाई है, बल्कि उसकी हत्या की गई है और इस पूरे मामले की तह तक जाकर जांच की जानी चाहिए।

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साजिश और पैसों के लेन-देन का संदेह

पीड़ित परिवार ने इस मामले में एक और गंभीर पहलू की ओर इशारा किया है, जो निठारी कांड के दूसरे आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर से जुड़ा है। झब्बू लाल के अनुसार, यह संभव है कि मोनिंदर सिंह पंढेर ने जेल से बाहर आने के बाद कोली को कुछ पैसे देने का वादा किया हो। उनका संदेह है कि यदि वादे के मुताबिक पैसे नहीं दिए गए और कोली ने निठारी कांड के छिपे हुए सच को उजागर करने की धमकी दी होगी, तो ऐसी स्थिति में उसे रास्ते से हटाने के लिए उसकी हत्या की जा सकती है। हालांकि, परिवार ने स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी आशंकाएं हैं। पुलिस ने अभी तक इस तरह की किसी भी साजिश की पुष्टि नहीं की है।

हरिद्वार पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

हरिद्वार पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार को भूपतवाला इलाके में स्थित उसकी चाय की दुकान के पास एक फंदे से लटका हुआ पाया गया। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के असली कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। इसके साथ ही प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों और व्यक्त की गई आशंकाओं को भी जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा।

निठारी कांड और न्याय की लंबी लड़ाई

नोएडा के निठारी गांव में हुए इस दर्दनाक नरसंहार ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। झब्बू लाल की बेटी ज्योति भी उन लापता बच्चों में शामिल थी, जिनके अवशेष बाद में जांच के दौरान बरामद किए गए थे। पीड़ित परिवारों ने इंसाफ के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर काटे। लंबे समय तक चली अदालती कार्रवाई के बाद, सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को विभिन्न मामलों में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में कोली को बरी करने का फैसला सुनाया था।

सवाल-जवाब

सुरेंद्र कोली का शव कहां बरामद हुआ?
सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार, 18 सितंबर को हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में उसकी चाय की दुकान के पास फंदे से लटका हुआ पाया गया।
पीड़ित परिवार ने सुरेंद्र कोली की मौत पर क्या आरोप लगाए हैं?
निठारी कांड में अपनी बेटी ज्योति को खोने वाले झब्बू लाल और सुनीता का आरोप है कि कोली ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उसे किसी राज का खुलासा करने से रोकने के लिए मार दिया गया है।
परिवार को कोली की आत्महत्या की बात संदिग्ध क्यों लग रही है?
उनका तर्क है कि कोली ने जेल में 6,935 दिन सुरक्षित बिताए और वहां कभी खुदकुशी की कोशिश नहीं की, तो बाहर आने के महज 310 दिनों के भीतर फांसी लगाना संदेहास्पद है।
पुलिस इस मौत के मामले में क्या कार्रवाई कर रही है?
हरिद्वार पुलिस ने मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच करने की बात कही है।
सुरेंद्र कोली को निठारी मामले में कब बरी किया गया था?
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में सुरेंद्र कोली को निठारी कांड के आरोपों से बरी कर दिया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·2 दिन पहले

निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत और पीड़ित परिवार द्वारा हत्या की आशंका जताए जाने से यह मामला एक बार फिर गंभीर कानूनी और प्रशासनिक जांच के घेरे में आ गया है। जेल से रिहाई के बाद इतने कम समय में बिना किसी सुसाइड नोट के ऐसी घटना होना और पीड़ित परिवार द्वारा पैसों के लेन-देन व राज दफन होने के आरोप लगाना यह संकेत देता है कि इस मामले के कई अनछुए पहलू अभी सामने आने बाकी हैं। पुलिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की गहन जांच ही यह तय करेगी कि यह आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत ने कानूनी और आपराधिक न्याय प्रणाली के कई अनसुलझे पहलुओं को फिर से सतह पर ला दिया है। पीड़ित परिवार द्वारा पैसों के लेन-देन और रहस्यों के दफन होने की आशंका ज्यूडिशियरी और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। यदि इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और विसरा रिपोर्ट की वैज्ञानिक पड़ताल समय पर नहीं की गई, तो यह न केवल न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर करेगा, बल्कि आर्थिक और आपराधिक गठजोड़ से जुड़ी अनकही परतों को भी हमेशा के लिए अंधेरे में छोड़ देगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

सुरेंद्र कोली की इस संदिग्ध मौत से निठारी कांड के कानूनी अध्याय में एक नया और जटिल मोड़ आ गया है। इस घटना ने जेल से रिहाई पाने वाले गंभीर अपराधियों के पुनर्वास, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह पूरी तरह से फॉरेंसिक साक्ष्यों, विशेषकर विसरा रिपोर्ट और पुलिस की निष्पक्ष जांच पर निर्भर करता है कि यह मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई गहरा षड्यंत्र था। यदि समय रहते पारदर्शिता से सच्चाई सामने नहीं आई, तो इससे पीड़ित परिवारों का न्याय प्रणाली से बचा-कुचा भरोसा भी डगमगा सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

निठारी जैसे संवेदनशील मामले के मुख्य आरोपी की रिहाई के बाद संदिग्ध मौत कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों के समक्ष गंभीर सवाल खड़े करती है। बिना किसी सुसाइड नोट के शव का मिलना और पीड़ित परिवार द्वारा सह-आरोपी पर साजिश का संदेह जताना, इस मामले को केवल आत्महत्या मानकर बंद करने की अनुमति नहीं देता। पुलिस के लिए अब फोरेंसिक विसरा जांच, घटनास्थल का गहन विश्लेषण और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालना बेहद जरूरी है। यदि इस मौत के पीछे कोई बड़ी साजिश है, तो उसका पर्दाफाश होना आवश्यक है, अन्यथा इस भयावह नरसंहार से जुड़े कई दफन राज हमेशा के लिए अनसुलझे रह जाएंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

करण की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस संवेदनशील मामले में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस के बीच अंतर-राज्यीय समन्वय बेहद जरूरी है। निठारी कांड नोएडा का है, जबकि मौत हरिद्वार में हुई है। राज्य के इतने बड़े मामले से जुड़े व्यक्ति की रिहाई के बाद उसकी सुरक्षा और संभावित खतरों पर स्थानीय प्रशासन की कोई निगरानी न होना एक बड़ी प्रशासनिक चूक को दर्शाता है। यह सिर्फ एक मौत की जांच नहीं है, बल्कि इस बात का भी आत्ममंथन है कि गंभीर मामलों से जुड़े लोगों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास के नियमों में हमारी व्यवस्था कितनी ढीली है।

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