ओडिशा के तटीय जिले भद्रक में आफत की बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है, जिसके चलते वहां जलप्रलय जैसी स्थिति पैदा हो गई है। लगातार कई दिनों से हो रही मूसलाधार बरसात के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। बाढ़ के गंभीर खतरे और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय जिला प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए जिले के तमाम सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों को एक दिन के लिए बंद रखने का फैसला लिया है। इसके साथ ही छोटे बच्चों के आंगनवाड़ी केंद्रों में भी छुट्टी की घोषणा कर दी गई है।
प्रशासनिक सतर्कता और आम जनता से अपील
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का यह निर्णय पूरी तरह से सुरक्षात्मक उपायों के तहत उठाया गया है। मौसम विभाग की ओर से खराब मौसम और भारी बारिश की लगातार चेतावनी के बाद यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था, ताकि बच्चों को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाया जा सके। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों, अभिभावकों और शिक्षकों से बेहद चौकस रहने का आग्रह किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम संबंधी केवल आधिकारिक बुलेटिन और दिशा-निर्देशों पर ही भरोसा करें तथा बिना किसी अति आवश्यक कार्य के बाढ़ के पानी वाले इलाकों या जलमग्न सड़कों की तरफ जाने से बचें।
नदियों के उफान से दोहरी मार झेल रहे गांव
भद्रक जिले में कुदरत का कहर इस कदर टूटा है कि लोग अभी पहली बाढ़ के सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि दूसरी बार जलभराव की स्थिति बन गई। क्षेत्र से गुजरने वाली कंसा बंसा और गेमई नदियों का जलस्तर भारी बारिश के कारण अचानक काफी बढ़ गया है। इन नदियों का उफान आसपास की आबादी पर आफत बनकर टूटा है। नदियों का पानी किनारों को लांघकर सीधे रिहाइशी बस्तियों और ग्रामीण इलाकों में समाने लगा है। पहली बार आई बाढ़ का पानी पूरी तरह से सूखा भी नहीं था कि इस नए सैलाब ने लोगों की तकलीफों को दोगुना कर दिया है।
बाढ़ का सबसे घातक प्रभाव बसुदेवपुर ब्लॉक के निचले इलाकों में दर्ज किया जा रहा है। यहां के कई दूर-दराज के गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। चारों तरफ पानी भर जाने के कारण सैकड़ों परिवार अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं। अनेक गांवों का बाहरी दुनिया और मुख्य मार्गों से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों के आने-जाने में भारी दिक्कतें पेश आ रही हैं।
सैकड़ों हेक्टेयर धान की फसल जलमग्न
लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान ने इलाके के किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। निचले क्षेत्रों का जलस्तर बढ़ने के चलते बाढ़ का पानी सीधे कृषि योग्य भूमि में फैल गया है। इसके कारण सैकड़ों हेक्टेयर में फैली उपजाऊ जमीन पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। खेतों में तैयार की गई धान की नर्सरी और नई फसल कई दिनों से पानी के अंदर डूबी हुई है। कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि लंबे समय तक पानी में डूबे रहने की वजह से धान की पौध सड़ने लगी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
विशेष रूप से बारांडुआ, नरसिंहपुर, अरंडुआ और सुदर्शनपुर पंचायतों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। इन पंचायतों के कृषक अपनी पूरी मेहनत और लागत के बर्बाद होने की आशंका से गहरे तनाव में हैं। अगर खेतों में पानी ऐसे ही जमा रहा, तो इस साल धान की पैदावार पूरी तरह चौपट होने का खतरा मंडरा रहा है।
जनजीवन अस्त-व्यस्त और घरों में घुसा सैलाब
गांवों को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों और संपर्क मार्गों के ऊपर कई फीट पानी बह रहा है। इसके चलते सवारी गाड़ियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है। निचले इलाकों में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि बाढ़ का गंदा पानी लोगों के घरों के भीतर तक प्रवेश कर गया है। रसोई, आंगन और कमरों में पानी भर जाने के कारण भोजन बनाने और रात गुजारने जैसी बुनियादी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। आम लोगों का दैनिक जीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है।
जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आपातकालीन टीमों को मुस्तैद रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में जाने की सलाह दी जा रही है। गौरतलब है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 26 जुलाई को ही ओडिशा राज्य के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया था, जिसमें भद्रक और आसपास के जिलों में बाढ़ तथा भूस्खलन जैसी आपदाओं की आशंका जताई गई थी।



















