ओडिशा के रहने वाले एक मेधावी छात्र के जीवन में बेरोजगारी और मानसिक तनाव ने ऐसा मोड़ ला दिया कि वह करीब एक साल तक अपने परिवार से पूरी तरह दूर रहे। उच्च शिक्षा हासिल करने और राज्य स्तर पर शैक्षणिक पहचान बनाने के बाद भी जब मनचाही नौकरी नहीं मिली, तो युवक मानसिक संतुलन खो बैठा और अचानक घर से लापता हो गया। पिछले साल जुलाई में पश्चिम बंगाल के हावड़ा रेलवे स्टेशन परिसर में बेसुध और गंभीर हालत में मिलने के बाद उन्हें नया जीवन मिला। इसके बाद मिशनरीज ऑफ चैरिटी और हैम रेडियो ऑपरेटरों के मानवीय प्रयासों की बदौलत उनकी पहचान संभव हो सकी और वह अपने परिजनों से दोबारा मिल पाए।
हावड़ा स्टेशन परिसर से रेस्क्यू और इलाज का लंबा सफर
यह पूरा मामला ओडिशा के बालासोर जिले के सहदेव कुंटा गांव निवासी बिभास साहा से जुड़ा हुआ है। पिछले साल जुलाई के महीने में बिभास हावड़ा रेलवे स्टेशन के परिसर में बेहद दयनीय स्थिति में पड़े हुए पाए गए थे। उस समय वह गंभीर रूप से बीमार थे, कई दिनों से भूखे-प्यासे थे और चलने-फिरने की स्थिति में भी नहीं थे। स्टेशन पर मौजूद रेलवे यात्रियों और स्थानीय पुलिस कर्मियों की नजर जब उन पर पड़ी, तो तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी की कालीघाट शाखा पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों और सेवा कर्मियों ने उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया।
शुरुआती स्वास्थ्य सुधार के बाद बिभास को बेहतर देखभाल और दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए बारुईपुर स्थित निर्मल हृदय केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया। केंद्र में लंबे समय तक चले चिकित्सकीय उपचार और निरंतर तीमारदारी के बाद उनकी शारीरिक स्थिति में काफी सुधार आ गया, लेकिन डॉक्टरों और सेवा कर्मियों के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई। मानसिक आघात और भारी अवसाद के चलते बिभास अपनी याददाश्त पूरी तरह गंवा चुके थे। वह न तो अपना नाम बता पाने की स्थिति में थे और न ही अपने घर, गांव या परिजनों के बारे में कोई सुराग दे पा रहे थे।
पहचान की तलाश में मिशनरीज ऑफ चैरिटी और हैम रेडियो का तालमेल
याददाश्त खो चुके बिभास की पहचान स्थापित करने और उनके मूल निवास का पता लगाने के लिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी प्रबंधन ने समाजसेवी खोकोन मंडल से संपर्क साधा। खोकोन मंडल ने इस मानवीय कार्य में वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब यानी हैम रेडियो के शौकिया ऑपरेटरों के विस्तृत नेटवर्क का सहयोग लेने का निर्णय किया। हैम रेडियो टीम ने लापता और बेसहारा व्यक्तियों की खोजबीन के अपने स्थापित तौर-तरीकों का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सुराग जुटाने शुरू किए।
हैम रेडियो के सचिव अंबरीश नाग बिस्वास और उनके साथियों ने लगातार कड़ियों को जोड़ते हुए ओडिशा के बालासोर जिले के सहदेव कुंटा गांव तक संपर्क स्थापित करने में सफलता पाई। इसके बाद अंबरीश नाग बिस्वास ने बारुईपुर केंद्र में उपचाराधीन युवक की एक हालिया तस्वीर गांव के संपर्कों के जरिए परिजनों तक पहुंचाई। तस्वीर सामने आते ही परिवार के बड़े बेटे वासुदेव साहा ने तुरंत अपने छोटे भाई बिभास को पहचान लिया, जिससे एक साल से चल रही खोज का सुखद अंत सुनिश्चित हुआ।
शिक्षा में अव्वल प्रदर्शन और बेरोजगारी से उपजा गहरा अवसाद
परिजनों के अनुसार, बिभास बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने अपने स्नातक स्तर के अध्ययन में पूरे राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर शैक्षणिक रिकॉर्ड बनाया था। इसके उपरांत उन्होंने पूरी लगन के साथ मास्टर डिग्री भी सफलता पूर्वक हासिल की थी। उच्च शिक्षा पूरी होने के बाद बिभास अपनी योग्यता के अनुसार एक प्रतिष्ठित और मनपसंद नौकरी हासिल करना चाहते थे। काफी कोशिशों के बावजूद जब उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप रोजगार का अवसर नहीं मिला, तो वह धीरे-धीरे गहरी निराशा और अवसाद के घेरे में आ गए।
मानसिक तनाव और भविष्य की चिंताओं से घिरे बिभास एक दिन अचानक बिना किसी को कुछ बताए घर से चले गए। बेटे के अचानक गायब होने से परिवार स्तब्ध रह गया और रिश्तेदारों तथा आसपास के सभी संभावित ठिकानों पर उनकी सरगर्मी से तलाश की गई। परिजनों ने स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचकर उनकी गुमशुदगी की आधिकारिक जनरल डायरी (GD) भी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद महीनों तक उनका कोई सुराग नहीं लग सका था, जिससे परिवार किसी अनहोनी की आशंका में जी रहा था।
निर्मल हृदय केंद्र में भावुक पुनर्मिलन और कृतज्ञता
पहचान पुख्ता होने के बाद बुधवार के दिन बिभास के बड़े भाई वासुदेव साहा पश्चिम बंगाल के बारुईपुर स्थित निर्मल हृदय केंद्र पहुंचे। लगभग एक वर्ष के लंबे और पीड़ादायी वियोग के बाद जैसे ही दोनों भाइयों का आमना-सामना हुआ, पूरा माहौल बेहद भावुक हो गया। वासुदेव ने दौड़कर अपने छोटे भाई को सीने से लगा लिया और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। बिभास की शारीरिक स्थिति में आया सुधार देखकर परिजनों ने राहत की सांस ली।
अपने छोटे भाई को नई जिंदगी देने और सुरक्षित रखने के लिए वासुदेव ने संस्था के सभी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस असीम प्रेम, स्नेह और करुणा के साथ निर्मल हृदय केंद्र के कर्मियों ने उनके भाई की देखभाल की है, उसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी और हैम रेडियो क्लब के सदस्यों का भी हृदय से धन्यवाद किया, जिनकी सक्रियता से यह पुनर्मिलन संभव हो पाया।
संकट के समय हैम रेडियो नेटवर्क की प्रभावी भूमिका
हैम रेडियो, जिसे शौकिया रेडियो सेवा (Amateur Radio Service) के रूप में भी जाना जाता है, विशेष रेडियो फ्रीक्वेंसी के माध्यम से काम करने वाला एक गैर-व्यावसायिक संचार माध्यम है। इसके अधिकृत ऑपरेटर आपातकालीन परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं, संचार व्यवस्था ठप होने या गुमशुदा लोगों को उनके परिजनों से मिलाने में महत्वपूर्ण तकनीकी और सामाजिक भूमिका निभाते हैं। बिभास साहा के प्रकरण में भी हैम रेडियो की त्वरित सूचना प्रणाली और जमीनी नेटवर्क ने एक मेधावी युवा को बेसहारा होने से बचाकर सुरक्षित घर तक पहुंचाने में निर्णायक योगदान दिया।





















