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ओडिशा में बाढ़ का तांडव, मोहन चरण माझी सरकार ने 1000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का किया ऐलानओडिशा
18 अग॰ 2026, 9:16 pm (43 दिन पहले)· 4

ओडिशा में बाढ़ का तांडव, मोहन चरण माझी सरकार ने 1000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का किया ऐलान

ओडिशा के कई जिलों में आई भीषण बाढ़ से 13 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार ने स्थिति से निपटने और लोगों को राहत पहुंचाने के लिए 1000 करोड़ रुपये के बड़े पैकेज की घोषणा की है।

ओडिशा इस समय पिछले कई दशकों के सबसे भयंकर जलप्रलय का सामना कर रहा है, जिसके कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कई जिलों में लगातार मूसलाधार बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं और बस्तियों, खेतों तथा निचले इलाकों में पानी भर जाने से हालात बेकाबू हो गए हैं। कई जगहों पर सड़क संपर्क पूरी तरह कट चुका है और प्रशासन ने युद्धस्तर पर अभियान चलाकर बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया है। कुछ क्षेत्रों में हो रही इस बारिश को बीते 25 वर्षों में सबसे अधिक बताया जा रहा है। इन गंभीर परिस्थितियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली ओडिशा सरकार ने संकट से उबरने के लिए 1000 करोड़ रुपये के व्यापक राहत पैकेज की घोषणा की है।

तेज किया गया राहत और बचाव अभियान

प्रशासन की ओर से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्यों को बेहद तेज कर दिया गया है। लोगों को पानी से घिरे इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ सैकड़ों की संख्या में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। मैदानी अमले को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों पर चौबीस घंटे नजर रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा प्रभावित परिवारों तक पीने का पानी, सूखा व पका हुआ भोजन, जरूरी दवाइयां और अन्य जीवनोपयोगी सामग्रियां लगातार पहुंचाई जा रही हैं। सरकार के शुरुआती आकलन के मुताबिक इस आपदा ने राज्य के कई जिलों को अपनी चपेट में लिया है, जहां कुल मिलाकर करीब 13 लाख लोग इसकी मार झेल रहे हैं। यह आपदा कुल 74 ब्लॉकों और 1,361 गांवों तक फैल चुकी है।

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लाखों लोगों को सुरक्षित निकाला गया

संकटग्रस्त क्षेत्रों से अब तक लगभग 3 लाख नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इस बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे बचाव अभियान के तहत करीब 45 ओड्राफ टीमें, 8 एनडीआरएफ टीमें और 59 फायर एंड इमरजेंसी सर्विस टीमें तैनात की गई हैं। राहत कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रभावित इलाकों में लगभग 550 शिविर खोले गए हैं। प्रशासन का कहना है कि निचले इलाकों और जलमग्न हो चुके गांवों पर विशेष फोकस रखा जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

जाजपुर और भद्रक में सबसे ज्यादा असर

बाढ़ की मार झेल रहे क्षेत्रों में जाजपुर सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में शामिल है, जहां से लगभग 77,680 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इस जिले में बेघर हुए लोगों के लिए 203 राहत शिविर बनाए गए हैं, जिनका संचालन 9 ओड्राफ टीमों, 2 एनडीआरएफ टीमों और 12 फायर एंड इमरजेंसी सर्विस टीमों द्वारा किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिविरों में रह रहे प्रत्येक व्यक्ति तक भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं बिना किसी रुकावट के पहुंचाएं। इसके अलावा भद्रक जिले में भी तबाही का बड़ा मंजर देखने को मिला है, जहां 4 ब्लॉकों और एक नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 149 गांव इसकी चपेट में आए हैं। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार भद्रक में लगभग 2.59 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से करीब 1.96 लाख लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। वहां लगभग 90 राहत शिविर काम कर रहे हैं और बचाव कार्यों को गति देने के लिए 15 ओड्राफ टीमें तैनात की गई हैं। प्रशासनिक दलों ने तिहिड़ी ब्लॉक के श्यामसुंदरपुर और ईश्वरपुर जैसे गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है और सरकारी इमारतों व स्कूलों की सुरक्षा जांच भी की है।

प्रमुख रूप से प्रभावित जिले और पूर्व में दी गई सहायता

राज्य सरकार के शुरुआती आकलन के अनुसार जाजपुर, भद्रक, बालेश्वर, केंदुझर, मयूरभंज और केंद्रापड़ा जिले सबसे अधिक नुकसान की चपेट में आए हैं। साथ ही जगतसिंहपुर और पुरी में भी लगातार हो रही बारिश और पानी के फैलाव के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक लोगों का अपने घरों को लौटना पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। आपदा के इस दौर में इससे पहले भी वित्तीय मदद जारी की जा चुकी है। शुरुआती दौर की बाढ़ के समय करीब 26 करोड़ रुपये दिए गए थे और अब दूसरे चरण के लिए लगभग 110 करोड़ रुपये की राहत राशि घोषित की गई है। इस तरह अब तक कुल मंजूर की गई राहत राशि करीब 136 करोड़ रुपये हो गई है, जिसे विशेष राहत आयुक्त के जरिए तुरंत सहायता कार्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

आजीविका को दोबारा खड़ा करने का लक्ष्य

सरकार की ओर से साफ किया गया है कि वर्तमान में घोषित राशि शुरुआती आकलन पर आधारित है और पानी पूरी तरह उतरने के बाद नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट आने पर इसमें और बढ़ोतरी की जा सकती है। कुल 1,000 करोड़ रुपये के इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत देना ही नहीं है, बल्कि बाढ़ के कारण तहस-नहस हो चुकी लोगों की आजीविका को दोबारा पटरी पर लाना है। इसमें खेती-किसानी को पहुंचे नुकसान, पशुधन, मछली पालन, घरेलू सामान और रोजी-रोटी के अन्य जरूरी साधनों को हुई क्षति की भरपाई को शामिल किया गया है।

किसानों के लिए कृषि इनपुट सहायता और प्रावधान

सरकार की प्राथमिकता पहले चरण में बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुंचाना है और इसके बाद नुकसान के अंतिम सत्यापन के आधार पर आगे की सहायता दी जाएगी। जिन किसानों की फसलों को बाढ़ के कारण 33 प्रतिशत या उससे ज्यादा नुकसान हुआ है, उन्हें तय नियमों के अनुसार कृषि इनपुट सहायता प्रदान की जाएगी। वर्षा पर आधारित फसलों के नुकसान के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित क्षेत्रों की फसलों के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की सहायता का प्रावधान तय किया गया है। यह राशि वास्तविक क्षति के सत्यापन के बाद सीधे बैंक खाते में यानी डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी, ताकि किसानों को संकट के समय अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। जरूरत पड़ने पर सरकारी और निजी एजेंसियों के मार्फत फसलों की खरीद की पुख्ता व्यवस्था भी की जाएगी। इसके अलावा किसानों को आगामी बुवाई के लिए बीज और अन्य कृषि सामग्री मुफ्त या रियायती दरों पर देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अगली फसल की तैयारी कर सकें। छोटे किसानों की आय का जरिया फिर से शुरू करने के लिए मिलिंग किट मुफ्त देने और पात्र लाभार्थियों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का भी प्रावधान किया गया है।

पशुपालन, मछली पालन और गृहस्थी के नुकसान पर भरपाई

इस प्राकृतिक आपदा ने केवल फसलों को ही नहीं बल्कि पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को भी भारी क्षति पहुंचाई है। राहत पैकेज में पशुओं की हानि और पशु शेड के नुकसान पर भरपाई का स्पष्ट प्रावधान रखा गया है। मछुआरों के लिए नई नावों, मछली पकड़ने के जालों और तालाबों को पहुंचे नुकसान के एवज में सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रभावित परिवारों को अपने जरूरी घरेलू सामान की भरपाई या नए सिरे से आजीविका शुरू करने के लिए 5,000 रुपये की नकद सहायता देने की घोषणा भी की गई है। राहत शिविरों में तब तक भोजन और राशन मुहैया कराया जाता रहेगा जब तक लोगों का जीवन सामान्य नहीं हो जाता।

स्वास्थ्य सेवाएं और मेडिकल टीमों को सतर्कता के निर्देश

लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण जलजनित बीमारियों और संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है, जिससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया है। शिविरों में स्वास्थ्य निगरानी कड़ी कर दी गई है और गर्भवती महिलाओं, बच्चों तथा बुजुर्गों की सेहत पर विशेष ध्यान देने के निर्देश हैं। बाढ़ के पानी के साथ सांप और अन्य जहरीले जीव भी सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रिहायशी इलाकों में आ सकते हैं, जिसके चलते सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम इंजेक्शन और आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जलस्तर घटने के बाद जिलों से विस्तृत रिपोर्ट आने पर इस पैकेज को और अधिक बढ़ाया जा सकता है ताकि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को असुविधा न हो।

सवाल-जवाब

ओडिशा में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कितने रुपये के पैकेज की घोषणा की गई है?
ओडिशा सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 1000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है।
इस आपदा से ओडिशा के लगभग कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
सरकार के शुरुआती आकलन के अनुसार इस बाढ़ से राज्य के करीब 13 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान पर किसानों को कितनी सहायता दी जा रही है?
वर्षा आधारित फसलों के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचित क्षेत्रों के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कृषि इनपुट सहायता तय की गई है।
राहत शिविरों में रहने वाले या सामान गंवाने वाले परिवारों के लिए नकद सहायता कितनी है?
प्रभावित परिवारों को जरूरी सामान खरीदने और आजीविका शुरू करने के लिए 5,000 रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·43 दिन पहले

मोहन चरण माझी सरकार द्वारा घोषित एक हज़ार करोड़ रुपये के इस पैकेज से ओडिशा के तेरह लाख प्रभावित लोगों और विशेष रूप से जाजपुर तथा भद्रक जैसे क्षेत्रों को तात्कालिक राहत मिलेगी। हालांकि, बेहतर वित्तीय प्रबंधन यह सुनिश्चित करेगा कि पुनर्वास के दौरान कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई समय पर हो सके।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·43 दिन पहले

यह आपदा केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती है। 13 लाख प्रभावित लोगों और 1,361 गांवों में कृषि भूमि और बुनियादी सुविधाओं को हुए नुकसान का दीर्घकालिक आकलन बेहद जरूरी होगा, ताकि पुनर्वास कार्य केवल कागजों तक न रहकर धरातल पर समयबद्ध तरीके से पूरे हों।

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 दिन पहले

आपराधिक लापरवाही और प्रशासनिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से, यह देखना अहम होगा कि 1000 करोड़ रुपये के इस राहत पैकेज का ज़मीनी स्तर पर वितरण कितना पारदर्शी रहता है। आपदा प्रबंधन कानूनों के तहत सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि राहत सामग्री और वित्तीय सहायता बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे 13 लाख प्रभावितों तक पहुँचे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·43 दिन पहले

यह आपदा मोहन चरण माझी सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा है। 1000 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम पैकेज की घोषणा के बाद, अब असली चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि जाजपुर और भद्रक जैसे अति-संवेदनशील जिलों के दूरदराज इलाकों तक बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के राहत सामग्रियां और चिकित्सा सहायता समय पर पहुंचे।

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