नई दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों ने चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अपने जख्मों को ताजा पाया। त्योहार के माहौल के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के आधिकारिक आवास पर एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं, जहां पीड़ितों ने अपने प्रियजनों को खोने की दर्दनाक दास्तान साझा की।
नरसंहार और सुनियोजित हिंसा पर चर्चा
इस संवाद के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस त्रासदी को महज दंगे की संज्ञा देना गलत होगा, बल्कि यह एक सुनियोजित नरसंहार था। उन्होंने कहा कि आजाद देश में इस तरह की बर्बरता देखकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भी 2018 के अपने एक फैसले में इस सामूहिक हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था। पुरी ने आरोप लगाया कि हमलावरों के पास पहले से ही वोटर लिस्ट जैसी जानकारियां थीं, जिनकी मदद से विशेष समुदायों के घरों की पहचान की गई थी। राजा गार्डन, सीमापुरी और सुल्तानपुरी जैसे इलाकों में हुई इन घटनाओं के निशान आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
महिलाओं ने सुनाई दिल दहलाने वाली कहानियां
कार्यक्रम में मौजूद पीड़ित महिलाओं ने अपनी जिंदगी के सबसे काले दिनों को याद किया। कमलेश कौर ने बताया कि उनके परिवार के छह से सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी और आज तक उन्हें न्याय की प्रतीक्षा है। राजिंदर कौर, जो उस समय सेंट जॉन्स एंबुलेंस से जुड़ी थीं, ने रातभर लोगों की सेवा करने और भयावह माहौल में अपनों को तलाशते बिलखते लोगों का जिक्र किया। नंदनगरी की एक अन्य पीड़िता ने सवाल उठाया कि जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के आरोपियों को सजा मिली, तो उनके निर्दोष परिजनों का क्या कसूर था। मनजीत कौर ने बेहद भावुक होकर बताया कि जब वह मात्र सवा महीने की थीं, तब उनके पिता को उनकी मां के सामने से खींचकर ले जाया गया और बेरहमी से मार डाला गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया कि इस प्रशासन ने उनके परिवार को रोजगार का संबल दिया।
दिल्ली सरकार की सहायता और नौकरी देने की पहल
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पीड़ितों को आश्वस्त किया कि दिल्ली प्रशासन उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं के अनुरूप, सरकार ने अब तक लगभग 150 पीड़ित परिवारों के आश्रितों को नौकरियां मुहैया कराई हैं। दिल्ली सरकार द्वारा नवंबर 2025 में इस संबंध में एक नीति को मंजूरी दी गई थी, जिसके तहत उम्रदराज हो चुके मूल आश्रितों को अपनी अगली पीढ़ी के पात्र सदस्य को नौकरी के लिए नामित करने की अनुमति दी गई है। उल्लेखनीय है कि 1984 में हुई इस हिंसा के दौरान आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 2,733 लोगों की जान गई थी और भारी संख्या में संपत्ति का नुकसान हुआ था।



















