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ओडिशा तट के पास समुद्र में संकट में फंसे विदेशी टैंकर और 23 क्रू सदस्यों को भारतीय तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचायाओडिशा
29 सित॰ 2026, 8:42 am (2 दिन पहले)· 1

ओडिशा तट के पास समुद्र में संकट में फंसे विदेशी टैंकर और 23 क्रू सदस्यों को भारतीय तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचाया

पारादीप से 37 समुद्री मील दूर 9,000 मीट्रिक टन पाम ऑयल लेकर जा रहे बेलीज के टैंकर एमटी सीगल 9 में इंजन फेल होने और पानी भरने के बाद तटरक्षक बल ने बड़ा बचाव अभियान चलाकर हादसा टाला।

ओडिशा में पारादीप तट के पास गहरे समुद्र में एक गंभीर समुद्री दुर्घटना को भारतीय तटरक्षक बल के त्वरित अभियान ने टाल दिया। बेलीज के ध्वज तले संचालित विदेशी तेल टैंकर एमटी सीगल 9 अचानक तकनीकी खराबी का शिकार होकर एक तरफ खतरनाक कोण पर झुकने लगा था। इस विशाल मालवाहक पोत पर 9,000 मीट्रिक टन पाम ऑयल लदा हुआ था और इस पर 23 चालक दल के सदस्य मौजूद थे। तटरक्षक कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर न केवल पोत में पानी के बहाव को नियंत्रित किया, बल्कि चालक दल की जान बचाते हुए संभावित पर्यावरणीय तबाही को भी रोक दिया।

सुबह के समय मिला था आपातकालीन संदेश

यह घटना 27 सितंबर को पारादीप बंदरगाह से लगभग 37 समुद्री मील पूर्व-दक्षिण-पूर्व दिशा में खुले समुद्र में घटित हुई। टैंकर एमटी सीगल 9 अपने गंतव्य की ओर अग्रसर था, तभी सुबह करीब 7 बजकर 30 मिनट पर जहाज के नियंत्रण कक्ष से खतरे का आपातकालीन संदेश प्रसारित किया गया। जहाज के अधिकारियों ने जानकारी दी कि पोत का मुख्य इंजन अचानक पूरी तरह बंद हो गया है। इसके तुरंत बाद समुद्री पानी तेजी से बैलास्ट टैंकों के अंदर घुसने लगा, जिससे जहाज का वजन असंतुलित हो गया और वह एक तरफ झुकने लगा। यदि समय रहते पानी के इस बहाव को नहीं रोका जाता, तो जहाज पलट सकता था।

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आईसीजीएस विश्वस्त और विशेषज्ञ दल की त्वरित कार्रवाई

आपात संदेश प्राप्त होते ही भारतीय तटरक्षक बल ने तत्काल अपने अत्याधुनिक पोत आईसीजीएस विश्वस्त को संकटग्रस्त टैंकर की ओर रवाना कर दिया। घटनास्थल पर पहुंचते ही तटरक्षक बल की विशेष क्षति-नियंत्रण टीम अस्थिर और झुकते हुए टैंकर पर सवार हुई। तकनीकी विशेषज्ञों ने जहाज के भीतर बढ़ते जलस्तर को घटाने के लिए सबमर्सिबल जल-निकासी पंप और जरूरी हाइड्रोलिक उपकरण सक्रिय किए। जांच के दौरान पाया गया कि जहाज की दो समुद्री जल पाइपलाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं, जिन्हें टीम ने तुरंत बंद किया। इसके साथ ही एक तीसरी टूटी पाइपलाइन से हो रहे रिसाव को भी सुरक्षित तरीके से सील कर दिया गया।

जहाज को स्थिर करने और प्रदूषण रोकने का अभियान

टैंकर को सीधा और स्थिर बनाए रखने के लिए जहाज के भार को सुरक्षित कमरों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। एक तरफ अंदर जमा पानी बाहर निकाला जा रहा था, तो दूसरी तरफ वजन के संतुलन को ठीक किया गया। जहाज के चालक दल और तटरक्षक जवानों के संयुक्त प्रयासों के चलते टैंकर का झुकाव नियंत्रित हो गया और उसके डूबने का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया। संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को तेल रिसाव के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए तटरक्षक बल ने एक विशेष प्रदूषण नियंत्रण पोत तथा एक अतिरिक्त समुद्री गश्ती पोत को भी क्षेत्र में तैनात कर दिया।

हवाई निगरानी और सुरक्षित लंगरगाह तक पहुंचाने का कार्य

समुद्री पर्यावरण की स्थिति पर नजर रखने के लिए भुवनेश्वर स्थित एयर एन्क्लेव से तटरक्षक बल के डॉर्नियर निगरानी विमान ने उड़ान भरी। शुरुआत में 27 सितंबर को जहाज के पास पाम ऑयल की बेहद पतली परत समुद्र की सतह पर देखी गई थी। हालांकि अगले दिन 28 सितंबर को की गई हवाई निगरानी में यह परत पूरी तरह गायब पाई गई और प्रदूषण नियंत्रण के सभी जरूरी मानक सामान्य रहे। जहाज के पूरी तरह स्थिर हो जाने के बाद पारादीप पोर्ट अथॉरिटी के शक्तिशाली टगबोट डॉल्फिन की मदद से एमटी सीगल 9 को सुरक्षित खींचकर पारादीप के बाहरी लंगरगाह क्षेत्र में पहुंचाया गया। वर्तमान में जहाज के मुख्य इंजन को ठीक करने का कार्य प्रगति पर है, जिसमें आईसीजीएस विश्वस्त की तकनीकी विशेषज्ञ टीम सक्रिय सहायता प्रदान कर रही है।

सवाल-जवाब

एमटी सीगल 9 किस देश के ध्वज वाला जहाज है और इस पर क्या लदा था?
यह बेलीज के झंडे वाला विदेशी मालवाहक टैंकर है, जिस पर लगभग 9,000 मीट्रिक टन पाम ऑयल लदा हुआ था।
यह घटना कब और कहां घटित हुई?
यह हादसा 27 सितंबर को ओडिशा के पारादीप तट से करीब 37 समुद्री मील पूर्व-दक्षिण-पूर्व में खुले समुद्र में हुआ।
जहाज पर कितने लोग सवार थे और क्या उन्हें कोई नुकसान पहुंचा?
जहाज पर चालक दल के 23 सदस्य सवार थे और तटरक्षक बल के समय पर किए गए बचाव कार्य से सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
टैंकर के एक तरफ झुकने का मुख्य कारण क्या था?
जहाज का मुख्य इंजन अचानक बंद हो गया था और क्षतिग्रस्त समुद्री जल पाइपलाइनों के कारण बैलास्ट टैंक में तेजी से पानी भर गया था।
बचाव अभियान में तटरक्षक बल के किन संसाधनों का उपयोग किया गया?
अभियान में आईसीजीएस विश्वस्त, क्षति-नियंत्रण विशेषज्ञ टीम, प्रदूषण नियंत्रण पोत, अतिरिक्त गश्ती पोत और भुवनेश्वर से डॉर्नियर विमान शामिल रहे।
क्या समुद्र में पाम ऑयल का कोई बड़ा रिसाव हुआ था?
27 सितंबर को जहाज के पास तेल की एक हल्की परत देखी गई थी, जो 28 सितंबर की हवाई निगरानी तक पूरी तरह समाप्त हो गई थी।
टैंकर को स्थिर करने के बाद कहां ले जाया गया?
पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण के टग डॉल्फिन द्वारा खींचकर जहाज को पारादीप के बाहर निर्धारित लंगर क्षेत्र में सुरक्षित पहुंचाया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·1 दिन पहले

तटरक्षक बल ने कमाल का काम किया है। अगर वक्त पर मदद न पहुँचती तो 23 जानें और समुद्र दोनों खतरे में पड़ जाते। गनीमत रही कि सब कुछ कंट्रोल में आ गया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

तटरक्षक बल ने समय पर पहुँचकर वाकई एक बड़ा हादसा टाल दिया, वर्ना 23 लोगों की जान के साथ पाम ऑयल फैलने से समुद्र का भी भारी नुकसान हो जाता।

Li Wei@li-wei·1 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने! अगर तटरक्षक बल देर कर देते, तो इतने सारे पाम ऑयल से समंदर की क्या हालत होती, सोचकर ही डर लगता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

9 हजार मीट्रिक टन पाम ऑयल और 23 लोगों की जान एक साथ खतरे में थी, सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। तटरक्षक बल की टीम ने गजब की फुर्ती दिखाई है वरना ओडिशा तट के पास बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा हो जाता।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

करण, सच में! वो 37 समुद्री मील की दूरी और सुबह साढ़े सात बजे वाला वक्त... सोचकर ही डर लगता है कि अगर तटरक्षक समय पर न पहुंचते तो क्या होता।

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