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पहाड़ों में मूसलाधार बारिश का कहर: उत्तरकाशी में पुस्ता ढहा, बद्रीनाथ हाईवे बंद, पिथौरागढ़ की 17 सड़कें ठपउत्तराखंड
7 जुल॰ 2026, 5:23 am (32 दिन पहले)· 2

पहाड़ों में मूसलाधार बारिश का कहर: उत्तरकाशी में पुस्ता ढहा, बद्रीनाथ हाईवे बंद, पिथौरागढ़ की 17 सड़कें ठप

मौसम विभाग ने 7 जुलाई को उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, वहीं उत्तरकाशी में पुस्ता ढहने, चमोली में नदियों के उफान और पिथौरागढ़ में भूस्खलन से हाईवे व सड़कें बंद हो गई हैं।

उत्तराखंड में मानसून पूरी रफ्तार से पहुंच चुका है और इसके साथ ही आफत की बारिश का दौर भी शुरू हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 7 जुलाई के लिए राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश और आंधी-तूफान को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि प्रशासन और आम लोगों को किसी भी तरह की मुश्किल स्थिति के लिए पहले से तैयार रहना होगा। मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून देहरादून, मंडी, बरेली और अयोध्या होते हुए उत्तराखंड के ज्यादातर इलाकों में पहुंच चुका है। विभाग के मुताबिक अगले दो से तीन दिन में यह मानसून पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले सकता है, क्योंकि मौसमी हालात इसके लिए पूरी तरह अनुकूल बने हुए हैं।

क्यों बरस रहे हैं बादल, समझिए मौसमी गणित

पंजाब से लेकर उत्तर बंगाल की खाड़ी तक फैली एक मजबूत द्रोणिका यानी ट्रफ लाइन इस समय सक्रिय है। इसी वजह से निचले क्षोभमंडल में दक्षिण-पूर्वी दिशा से तेज हवाएं चल रही हैं, जो बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी खींचकर उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों की ओर ले जा रही हैं। इसके अलावा एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हो चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन दोनों मौसमी प्रणालियों के आपस में मिलने से ही उत्तराखंड के आसमान में घने बादल छाए हुए हैं। जब मानसूनी नमी और पश्चिमी विक्षोभ की ठंडी हवाएं आपस में टकराती हैं, तो बारिश की तीव्रता और भी बढ़ जाती है, यही वजह है कि पहाड़ी जिलों में तेज बौछारों और अचानक भारी बारिश का खतरा बना हुआ है।

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किन जिलों में कितना खतरा

मौसम विभाग ने मैदानी और पहाड़ी दोनों तरह के जिलों के लिए अलग-अलग एडवाइजरी जारी की है। 7 जुलाई को देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की गंभीर आशंका जताई गई है। इन पहाड़ी जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर चलने की चेतावनी दी गई है। वहीं मैदानी इलाकों में हरिद्वार और उधम सिंह नगर में भी गरज के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जिससे इन जिलों में भी खेती-किसानी और आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है। प्रशासन और आम लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने और जरूरी न होने पर घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

उत्तरकाशी में पुस्ता ढहा, दहशत में ग्रामीण

उत्तरकाशी जिले के अस्सीगंगा क्षेत्र के चिवां गांव में बीती रात हुई भारी बारिश ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। लगातार तेज बारिश के चलते पहाड़ी पर बना एक बड़ा पुस्ता अचानक भरभराकर ढह गया, जिससे भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर नीचे आ गए। इस मलबे की चपेट में आकर वहां खड़ी दो मोटरसाइकिलें पूरी तरह दब गईं, जबकि पास में खड़ा एक और बड़ा वाहन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि यह घटना रात के समय हुई जब सड़क पर आवाजाही कम थी, वरना नुकसान और भी बड़ा हो सकता था। इस हादसे के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन और पुस्ते ढहने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, यहां तक कि लोग रात में सोने से भी डरने लगे हैं, क्योंकि किसी भी वक्त पहाड़ी से मलबा और पत्थर घरों तक पहुंच सकते हैं।

चमोली में उफान पर नदियां, बद्रीनाथ हाईवे बंद

चमोली जिले में भी देर रात से झमाझम बारिश जारी है। विश्वप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम समेत जिले के सभी पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश हो रही है, जिससे अलकनंदा और धौलीगंगा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है और तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। देवाल और कोटेडा क्षेत्र में भी देर रात हुई बारिश का असर साफ दिखा। कोटेडा ग्राम पंचायत में हाल ही में बनी सड़क में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे सड़क धंसने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा लगातार हो रहे भू-कटाव से नथिया सिमार इलाके में रहने वाले दर्जनों परिवारों पर भी संकट मंडरा रहा है और उनके घरों को खाली कराने की नौबत आ सकती है। बारिश और मलबे के चलते बीरही-निजमुला मोटर मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है, जबकि सबसे बड़ा झटका ऋषिकेश-बद्रीनाथ नेशनल हाईवे को लगा है, जो भनेरपानी और गुलाबकोटी के पास भारी मलबा आने से बंद हो गया है। चूंकि यही हाईवे बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा का मुख्य रास्ता है, इसलिए इसके बंद होने से यात्रियों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ गई है। प्रशासन की टीमें हाईवे को खोलने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हैं, लेकिन लगातार गिर रहे पत्थरों की वजह से काम में बार-बार रुकावट आ रही है, जिससे मजदूरों और मशीन ऑपरेटरों के लिए भी यह काम जोखिम भरा बन गया है।

पिथौरागढ़ में लैंडस्लाइड से 17 सड़कें ठप

कुमाऊं मंडल के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भी मानसून की मार साफ दिख रही है। पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही तेज बारिश के कारण जिले में कई जगह बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ है। मलबा गिरने और पहाड़ टूटने से जिले की करीब 17 प्रमुख ग्रामीण और संपर्क सड़कें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। इन सड़कों के बंद होने से दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है, जिससे इन गांवों में जरूरी सामान की सप्लाई और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में बड़ी दिक्कत आ रही है। सीमांत इलाका होने के चलते यहां सड़कों का बंद होना और भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इससे सीमा से सटे गांवों की सप्लाई चेन प्रभावित होती है। स्थानीय प्रशासन जेसीबी मशीनों के जरिए मलबा हटाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगातार बारिश और खराब मौसम के चलते सड़कों को दोबारा चालू करने में भारी मुश्किलें आ रही हैं।

देहरादून और रुद्रप्रयाग के लिए विशेष अलर्ट

राजधानी देहरादून के अलावा टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिलों के लिए भी मौसम विभाग ने विशेष ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। रुद्रप्रयाग में देर रात से रुक-रुककर झमाझम बारिश हो रही है और सुबह से ही आसमान में घने काले बादल छाए हुए हैं। लगातार बारिश के चलते यहां अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिसके बाद प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को नदी घाटों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। देहरादून मौसम केंद्र ने अपनी एडवाइजरी में संवेदनशील इलाकों में यात्रा न करने और आंधी-तूफान के दौरान सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

तापमान में भी उतार-चढ़ाव

पिछले 24 घंटों के तापमान आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास दर्ज किया गया। पर्वतीय इलाकों में पंतनगर सबसे गर्म जगह रही, जबकि मुक्तेश्वर में सबसे ज्यादा ठंडक महसूस की गई। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता और बढ़ने की आशंका है, इसलिए पहाड़ी और मैदानी, दोनों तरह के जिलों में लोगों को अगले कुछ दिन तक खासतौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

सवाल-जवाब

आज उत्तराखंड के किन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी है?
देहरादून, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और बागेश्वर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तरकाशी में क्या हुआ है?
अस्सीगंगा क्षेत्र के चिवां गांव में एक बड़ा पुस्ता भारी बारिश से ढह गया, जिससे दो मोटरसाइकिलें मलबे में दब गईं और एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया।
बद्रीनाथ हाईवे क्यों बंद है?
भनेरपानी और गुलाबकोटी के पास भारी मलबा आने से ऋषिकेश-बद्रीनाथ नेशनल हाईवे बंद हो गया है।
पिथौरागढ़ में कितनी सड़कें बंद हैं?
भूस्खलन के कारण पिथौरागढ़ में करीब 17 ग्रामीण और संपर्क सड़कें पूरी तरह बंद हैं, जिससे दर्जनों गांव जिला मुख्यालय से कट गए हैं।
रुद्रप्रयाग में प्रशासन ने क्या सलाह दी है?
प्रशासन ने अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर बढ़ने के चलते तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को नदी घाटों से दूर रहने को कहा है।
मौसम विभाग के मुताबिक इतनी भारी बारिश की वजह क्या है?
पंजाब से उत्तर बंगाल की खाड़ी तक बनी ट्रफ लाइन और एक नए पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त असर से यह भारी बारिश हो रही है।
सबसे गर्म और सबसे ठंडा इलाका कौन सा रहा?
पिछले 24 घंटों में पंतनगर सबसे गर्म रहा, जबकि मुक्तेश्वर में सबसे ज्यादा ठंडक दर्ज हुई।
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