उत्तराखंड के नैनीताल में हर साल नंदाष्टमी के पावन पर्व पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मां नंदा देवी महोत्सव में इस बार आस्था और लोक संस्कृति के साथ सामाजिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मेले के उल्लास, पारंपरिक आयोजनों और भीड़-भाड़ के बीच आम नागरिकों को उनके बुनियादी अधिकारों से जोड़ने के लिए एक विशेष विधिक जागरूकता स्टॉल स्थापित किया गया है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को किसी भी शुल्क के बिना जरूरी कानूनी नियमों, न्याय पाने के तरीकों और सरकारी सहायता योजनाओं की विस्तृत जानकारी मुहैया कराई जा रही है।
कानूनी अधिकारों को सरल शब्दों में समझाने की कोशिश
नंदा देवी मेले के दौरान दूर-दराज के पर्वतीय अंचलों से लेकर अन्य राज्यों तक के हजारों श्रद्धालु मां नंदा देवी के दर्शन के लिए नैनीताल पहुंचते हैं। ऐसे विशाल जनसमूह के बीच कानूनी जागरूकता का यह मंच लोगों की रोजमर्रा की कानूनी उलझनों को सुलझाने में बेहद मददगार साबित हो रहा है। स्टॉल पर उपस्थित विधि विशेषज्ञ और प्रशिक्षित प्राविधिक कार्यकर्ता आगंतुकों को कानून की जटिल धाराओं के बजाय सीधी और सहज भाषा में उनके अधिकार समझा रहे हैं।
इस अभियान के तहत मुख्य रूप से महिलाओं के अधिकारों, घरेलू विवादों के समाधान, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े कानूनों, बुजुर्गों व वरिष्ठ नागरिकों के विधिक अधिकारों और पात्र व्यक्तियों को मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका मकसद समाज के कमजोर और जरूरतमंद तबकों को यह भरोसा दिलाना है कि कानून उनकी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हमेशा उनके साथ खड़ा है।
विधिक सेवा प्राधिकरण की नियमित पहल और निःशुल्क वकील की व्यवस्था
उत्तराखंड जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के ओएसडी हर्ष यादव के अनुसार, उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की साझा भागीदारी से समाज को जागरूक करने के लिए समय-समय पर ऐसे अभियान चलाए जाते हैं। हर साल नंदाष्टमी के पावन मौके पर जब नैनीताल में मां नंदा देवी महोत्सव सजता है, तो दोनों विधिक सेवा प्राधिकरणों के समन्वय से यह विशेष स्टॉल लगाया जाता है।
हर्ष यादव ने स्पष्ट किया कि कई बार आम नागरिक केवल सही जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव में गंभीर कानूनी संकटों में फंस जाते हैं या अपने साथ हो रहे अन्याय को चुपचाप सहते रहते हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए ही मेले में यह पहल की गई है ताकि लोग बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात कह सकें। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को किसी कानूनी मामले में लंबी कानूनी सलाह या अदालत में पैरवी की आवश्यकता होती है, तो प्राधिकरण की ओर से निःशुल्क पैनल अधिवक्ताओं की सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि धन के अभाव में कोई भी व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रह जाए।
मुफ्त पुस्तकों का वितरण और डिजिटल क्यूआर कोड की आधुनिक सुविधा
विधिक जागरूकता स्टॉल पर आने वाले पाठकों और जिज्ञासु लोगों के लिए कानून की सरल व्याख्या वाली विविध पुस्तकें और मार्गदर्शिकाएं पूरी तरह निःशुल्क दी जा रही हैं। इन पुस्तिकाओं में विभिन्न कानूनी प्रावधानों, नागरिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को इतनी सरल भाषा में ढाला गया है कि कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी उन्हें आसानी से समझ सके। इस वर्ष के जागरूकता अभियान के लिए करीब 7 से 8 हजार कानूनी पुस्तकों के वितरण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिन्हें श्रद्धालु अपनी आवश्यकतानुसार प्राप्त कर रहे हैं।
इसके साथ ही अभियान को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए डिजिटल विकल्प भी तैयार किया गया है। स्टॉल के प्रवेश द्वार पर विशेष क्यूआर कोड चस्पा किए गए हैं। मेले में आने वाले लोग अपने स्मार्टफोन के कैमरे से इस क्यूआर कोड को तुरंत स्कैन कर सकते हैं और पूरी कानूनी पुस्तकों को डिजिटल प्रारूप में सीधे अपने फोन पर डाउनलोड कर सकते हैं। इससे फायदा यह हो रहा है कि लोग भारी-भरकम किताबें साथ ले जाए बिना पूरी जानकारी अपने मोबाइल में सुरक्षित रख सकते हैं, यात्रा के दौरान या घर पहुंचकर आराम से पढ़ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अपने गांव या मोहल्ले के अन्य परिचितों के साथ भी साझा कर सकते हैं।
स्वास्थ्य शिविर का भी मिल रहा लाभ
विधिक मार्गदर्शन के साथ-साथ मेले में श्रद्धालुओं की शारीरिक तंदुरुस्ती का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से मेले परिसर में ही एक विस्तृत निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर संचालित किया जा रहा है। इस मेडिकल कैंप में विभिन्न अस्पतालों से आए अनुभवी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें तैनात हैं, जो मेले में आ रहे स्थानीय निवासियों और बाहर से आए श्रद्धालुओं का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं तथा जरूरी परामर्श दे रही हैं।
कुल मिलाकर, नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव इस बार केवल पारंपरिक आस्था और मनोरंजन का केंद्र न रहकर जनहितकारी जनसेवा का बड़ा केंद्र बन चुका है। कानूनी साक्षरता, मुफ्त परामर्श, डिजिटल सामग्री और स्वास्थ्य जांच की यह समन्वित कोशिश मेले की सार्थकता को कई गुना बढ़ा रही है।



















