केरल के अलग-अलग हिस्सों में कुदरत का प्रकोप देखने को मिल रहा है, जहां तेज आंधी और लगातार हो रही बारिश ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पत्तनमथिट्ठा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्णाकुलम और त्रिशूर में सुबह सात बजे तीन घंटे की अवधि के लिए विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की गई। इस चेतावनी के दायरे में आने वाले इलाकों में चौबीस घंटे के दौरान 115.6 मिलीमीटर से लेकर 204.4 मिलीमीटर तक भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही वायुमंडल में तेज हलचल के चलते चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और बादलों की तेज गड़गड़ाहट की पूरी संभावना जताई गई है।
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और बहने से मौतें
रविवार की शाम हुई मूसलाधार बरसात ने राज्य के पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। इडुक्की और कोट्टायम के पहाड़ी हिस्सों में जमीन खिसकने की अलग-अलग घटनाएं सामने आईं, जिनमें चार नागरिकों की जान चली गई। वहीं मलप्पुरम के नीलांबुर क्षेत्र से गुजरने वाली कोट्टापुझा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से आई बाढ़ में छह लोग तेज बहाव के साथ बह गए। इस भयावह स्थिति के बीच कोल्लम, पलक्कड़ तथा कन्नूर जैसे अन्य जनपदों में भी हल्की फुहारें और छिटपुट वर्षा होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और फोन पर चेतावनी
प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए सरकारी तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने प्रशासनिक अमले को प्रत्येक साठ मिनट में वर्षा की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करने का कड़ा आदेश दिया है। रविवार की रात मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से साझा की गई जानकारी के अनुसार, आपदा प्रबंधन आयुक्त विग्नेश्वरी ने जमीनी हालात परखने के लिए इडुक्की और कोट्टायम के जिलाधिकारियों के साथ आपात बैठक की। संवेदनशील बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को सीधे उनके मोबाइल फोन पर संदेश भेजकर सतर्क किया जा रहा है। संबंधित जिलाधिकारियों को मैदान में उतरकर सुरक्षा व्यवस्था जांचने और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत शिविरों या सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।



















