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इडुक्की में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन का कहर, शेड पर मलबा गिरने से दो की जान गई, नदी में बहे तीन शव भी मिलेकेरल
21 सित॰ 2026, 9:26 am (1 घंटे पहले)· 0

इडुक्की में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन का कहर, शेड पर मलबा गिरने से दो की जान गई, नदी में बहे तीन शव भी मिले

केरल के पहाड़ी जिले इडुक्की में रविवार शाम तेज बारिश के बाद हुए लैंडस्लाइड में लहसुन साफ कर रहे दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि चोक्कड़ नदी में अचानक आई बाढ़ की चपेट में आने से तीन अन्य लोगों के शव बरामद किए गए हैं.

केरल के पहाड़ी जिले इडुक्की में रविवार की शाम कुदरती आफत बनकर टूटी, जहां तेज बारिश के बीच हुए भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई. वट्टावड़ा पंचायत के कोट्टाकंबूर क्षेत्र में कड़ावरी मार्ग पर मौजूद एक मकान के नजदीक अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा ढह गया. इस हादसे में मलबे के नीचे दबने से दो स्थानीय निवासियों की जान चली गई, जिनकी शिनाख्त बालकृष्णन और चिन्नू के रूप में की गई है. दोनों लोग घटना के समय खेत के पास बने एक शेड के भीतर लहसुन की छंटाई और सफाई का काम निपटा रहे थे.

शेड में ली थी बारिश से पनाह, पीछे से गिरा भारी मलबा

पहाड़ी ढलानों पर मौसम का मिजाज इतनी तेजी से बदला कि वहां मौजूद कृषि श्रमिकों को जान बचाने या सुरक्षित जगह भागने का तनिक भी अवसर नहीं मिल सका. देवीकुलम के विधायक एफ राजा ने बताया कि दोपहर के वक्त श्रमिक सामान्य दिनों की तरह खेतों में कृषि कार्य कर रहे थे. अचानक घने बादलों के साथ तेज बौछारें शुरू हो गईं, जिसके चलते बारिश से बचाव के लिए लोग पास ही तैयार किए गए एक अस्थायी शेड के नीचे एकत्र हो गए. कुछ ही मिनट बीते थे कि शेड के ठीक पीछे की ढलान दरक गई और भारी मात्रा में गीली मिट्टी, विशालकाय पत्थर व मलबा शेड के ऊपर आ गिरा. देखते ही देखते पूरा ढांचा मलबे के नीचे समा गया.

बचाव कार्य और घायलों का उपचार

अचानक हुए इस हादसे के बाद उठी चीख-पुकार सुनकर आसपास के स्थानीय ग्रामीण मदद के लिए दौड़ पड़े. ग्रामीणों ने भारी मशक्कत करते हुए मलबे को हटाया और नीचे दबे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया. इस दर्दनाक घटनाक्रम में बालकृष्णन की पत्नी चोटिल जरूर हुईं, मगर समय रहते उनकी जान बच गई. वहीं शेड के भीतर मौजूद एक अन्य व्यक्ति अत्यंत गंभीर रूप से जख्मी हो गया. घायल व्यक्ति की नाजुक हालत को देखते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलाई गई और उसे उपचार हेतु अदिमाली तालुक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उसका इलाज जारी है. इस अनहोनी के बाद पूरे कोट्टाकंबूर इलाके में गहरा शोक और दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है.

प्रशासनिक कार्रवाई और शवों का पोस्टमार्टम

विधायक एफ राजा ने स्थिति की जानकारी साझा करते हुए कहा, "उस समय अंदर तीन लोग थे; उनमें से दो मिट्टी के नीचे दब गए थे, जबकि एक व्यक्ति को बचा लिया गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है." जान गंवाने वाले दोनों मृतकों के शवों को प्राथमिक प्रक्रियाओं के लिए मुन्नार ले जाया गया है. स्थानीय प्रशासन आवश्यक कानूनी व कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए अदिमाली तालुक अस्पताल भिजवाएगा. अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रियाएं प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरी की जा रही हैं.

चोक्कड़ नदी में आई बाढ़ में बहे तीन लोगों के शव बरामद

इडुक्की में भूस्खलन के अतिरिक्त नदी के उफान ने भी भारी त्रासदी फैलाई है. प्रशासनिक अधिकारियों ने रविवार को स्पष्ट किया कि चोक्कड़ नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने और आई तेज बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर तीन तक पहुंच गई है. इस जलप्रलय में लापता हुए सभी तीन लोगों, जिनमें एक महिला और दो पुरुष शामिल थे, के शव तलाश अभियान के दौरान बरामद कर लिए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार बचाव दल ने अंतिम शव एंटोनिक्काड क्षेत्र के समीप से निकाला, जो एक पुरुष का था. प्राकृतिक आपदा की इन दोहरी घटनाओं से समूचे पहाड़ी अंचल में सतर्कता बढ़ा दी गई है.

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सवाल-जवाब

इडुक्की के कोट्टाकंबूर में भूस्खलन की घटना कब और कहां हुई?
यह हादसा रविवार शाम केरल के इडुक्की जिले में वट्टावड़ा पंचायत के कोट्टाकंबूर क्षेत्र में कड़ावरी मार्ग पर हुआ.
भूस्खलन में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान क्या है?
मृतकों की पहचान स्थानीय निवासी बालकृष्णन और चिन्नू के रूप में हुई है, जो शेड में लहसुन साफ कर रहे थे.
हादसे के समय शेड में कुल कितने लोग मौजूद थे?
देवीकुलम विधायक एफ राजा के अनुसार शेड में तीन लोग मौजूद थे, जिनमें से दो की दबने से मौत हो गई और एक घायल को बचा लिया गया.
गंभीर रूप से घायल व्यक्ति का इलाज कहां चल रहा है?
गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तुरंत एंबुलेंस की मदद से अदिमाली तालुक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है.
चोक्कड़ नदी में अचानक आई बाढ़ में कितने लोगों की मौत हुई?
चोक्कड़ नदी में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या तीन हो गई है, जिनमें एक महिला और दो पुरुषों के शव बरामद किए गए हैं.
चोक्कड़ नदी में लापता आखिरी शव कहां से मिला?
अधिकारियों के अनुसार नदी में लापता आखिरी शव, जो एक पुरुष का था, एंटोनिक्काड के पास से बरामद किया गया.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·4 मिनट पहले

इडुक्की की यह दुखद घटना जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों और पहाड़ी इलाकों में मानवीय सुरक्षा के बीच की खाई को उजागर करती है। अचानक बदलते मौसम और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कृषि श्रमिकों और अनियोजित कार्यस्थलों के लिए पुख्ता सुरक्षा दिशानिर्देशों का अभाव चिंताजनक है। भविष्य में ऐसे जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को जमीनी स्तर पर मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 मिनट पहले

इडुक्की की यह त्रासदी दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन और भौगोलिक संवेदनशीलता के इस दौर में पहाड़ी राज्यों के लिए भूमि उपयोग और अनियोजित निर्माण नीति कितनी घातक साबित हो रही है। इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त जोनिंग नियमों, समय पर मौसम चेतावनी तंत्र और आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है, अन्यथा ऐसे जानमाल के नुकसान को रोक पाना असंभव होगा।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·26 मिनट पहले

यह घटना पश्चिमी घाट की पारिस्थितिकी संवेदनशीलता और अनियोजित मानवीय गतिविधियों के बीच के गंभीर संघर्ष को उजागर करती है। एशिया के कई पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान ढलान का टूटना एक आम लेकिन विनाशकारी पैटर्न बनता जा रहा है। यदि समय रहते स्थानीय समुदायों के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली और सुरक्षित आश्रय स्थलों का निर्माण नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी आपदाओं से कृषि श्रमिकों और पर्वतीय आजीविका पर और अधिक भारी संकट आ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·49 मिनट पहले

इडुक्की की यह घटना पहाड़ों पर अनियंत्रित मानवीय दखल और जलवायु परिवर्तन के मिले-जुले खतरों को उजागर करती है। खेतों के पास बने अस्थायी शेड इस तरह के भूस्खलन के वक्त सबसे संवेदनशील होते हैं। कानूनी तौर पर अब यह देखना अहम होगा कि स्थानीय प्रशासन ढलान वाले कृषि क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन की अग्रिम चेतावनियों को लागू करने में कितना सक्रिय कदम उठाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·49 मिनट पहले

यह त्रासदी दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन से प्रेरित लगातार चरम मौसम की घटनाएं पहाड़ी अर्थव्यवस्था और कृषि श्रम को कैसे सीधे तौर पर प्रभावित कर रही हैं। जब असंगठित कृषि क्षेत्र और ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका इस तरह के पर्यावरणीय जोखिमों की चपेट में आती है, तो बीमा कवरेज और सामाजिक सुरक्षा का अभाव संकट को और गहरा कर देता है। आने वाले समय में पहाड़ी राज्यों के कृषि और ग्रामीण विकास बजट में आपदा-सहनीय बुनियादी ढांचे और अग्रिम चेतावनी प्रणालियों के निर्माण को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा।

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