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पलामू के पंडवा एफपीओ को मिली तेल मिल, 95 प्रतिशत सरकारी अनुदान से अब किसान सरसों प्रोसेस कर खुद बेचेंगे तेलझारखंड
18 जून 2026, 12:17 pm (86 दिन पहले)· 3

पलामू के पंडवा एफपीओ को मिली तेल मिल, 95 प्रतिशत सरकारी अनुदान से अब किसान सरसों प्रोसेस कर खुद बेचेंगे तेल

पलामू जिले के पंडवा प्रखंड में पंडवा फेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को लगभग 25 लाख रुपये की तेल मिल 95 प्रतिशत सरकारी अनुदान पर मिली है, जिससे 765 किसान सरसों को सीधे तेल में बदलकर करीब 200 रुपये प्रति लीटर पर बेच सकेंगे।

झारखंड के पलामू जिले के पंडवा प्रखंड में किसानों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। पंडवा फेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, यानी एफपीओ, के माध्यम से यहां एक तेल मिल लगाई जा रही है। इस मिल के शुरू होने के बाद क्षेत्र के किसान केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि अपनी सरसों से खुद तेल निकालकर उसे सीधे बाजार में बेच सकेंगे। यह बदलाव उनकी आय में उल्लेखनीय इजाफे का रास्ता खोलेगा।

25 लाख रुपये की परियोजना में सरकार ने दिया 95 प्रतिशत अनुदान

इस तेल मिल की कुल लागत लगभग 25 लाख रुपये है। वेजफेड रांची के सहयोग से स्थापित हो रही इस इकाई में सरकार ने 95 प्रतिशत अनुदान दिया है, यानी किसानों को महज 5 प्रतिशत राशि अपनी ओर से वहन करनी पड़ी। मिल की मशीनें करीब 30×40 फीट के क्षेत्रफल में स्थापित की जा रही हैं। पंडवा के किसान ओमकार नाथ ने TrendKia को बताया कि यह परियोजना एफपीओ को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।

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50 से 60 रुपये किलो सरसों की जगह मिलेंगे 200 रुपये लीटर तेल

इस पूरी पहल की सबसे बड़ी ताकत इसका आर्थिक गणित है। फिलहाल किसान अपनी सरसों की फसल खेत से सीधे बाजार में 50 से 60 रुपये प्रति किलो की दर पर बेच देते हैं, जिससे उन्हें फसल की वास्तविक कीमत नहीं मिल पाती। तेल मिल के चालू होते ही इसी सरसों से निकाला गया तेल लगभग 200 रुपये प्रति लीटर की दर पर बिक सकेगा। इससे किसानों की आमदनी में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है। इसके अलावा स्थानीय उपभोक्ताओं को शुद्ध सरसों का तेल मिलेगा और प्रसंस्करण इकाई के आसपास रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

चार साल से सक्रिय एफपीओ से जुड़े हैं 765 किसान

पंडवा फेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड पिछले चार वर्षों से कार्यरत है और इस समय 765 किसान इसके सदस्य हैं। एफपीओ के जरिये इन किसानों को खाद और बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाते हैं। भविष्य में एफपीओ कृषि मशीनरी किराये पर देने की भी योजना बना रहा है, जिससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।

एफपीओ की दीर्घकालिक आर्थिक आत्मनिर्भरता है असली लक्ष्य

ओमकार नाथ ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी एफपीओ को शुरुआती दौर में सरकारी सहायता मिलती है, लेकिन आगे चलकर संगठन को अपने दम पर संचालित होना होता है। तेल मिल की स्थापना इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है ताकि एफपीओ अपनी कमाई से खुद का खर्च उठा सके। प्रसंस्करण और आपूर्ति में सीधी भागीदारी से किसानों को फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा और पंडवा क्षेत्र में कृषि आधारित व्यवसाय को नई पहचान मिलेगी।

सवाल-जवाब

पंडवा एफपीओ को तेल मिल के लिए कितनी राशि खुद चुकानी पड़ी?
तेल मिल की कुल लागत लगभग 25 लाख रुपये है, जिसमें सरकार ने 95 प्रतिशत अनुदान दिया, इसलिए एफपीओ के किसानों को केवल 5 प्रतिशत राशि अपनी ओर से देनी पड़ी।
तेल मिल चालू होने के बाद किसानों को सरसों से कितना अधिक मुनाफा होगा?
अभी किसान सरसों 50 से 60 रुपये प्रति किलो बेचते हैं, लेकिन तेल निकालकर बेचने पर उन्हें लगभग 200 रुपये प्रति लीटर मिल सकते हैं।
पंडवा फेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड में कितने किसान जुड़े हैं और यह कब से काम कर रही है?
इस एफपीओ से फिलहाल 765 किसान सदस्य जुड़े हैं और यह संगठन पिछले चार वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत है।
तेल मिल के अलावा यह एफपीओ किसानों को और क्या सुविधाएं देता है?
एफपीओ किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर खाद और बीज उपलब्ध कराता है, और भविष्य में कृषि मशीनरी किराये पर देने की भी योजना है।
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