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परबतसर में पुरस्कार वितरण के साथ समाप्त हुआ पशु मेला, 1,296 पशुओं की दर्ज हुई थी आवकराजस्थान
2 सित॰ 2026, 2:00 pm (23 दिन पहले)· 3

परबतसर में पुरस्कार वितरण के साथ समाप्त हुआ पशु मेला, 1,296 पशुओं की दर्ज हुई थी आवक

राजस्थान के परबतसर में आयोजित वीर तेजा पशु मेले का पुरस्कार वितरण समारोह के साथ औपचारिक समापन हो गया, जिसके बाद 1,296 पशुओं और व्यापारियों की सुरक्षित घर वापसी शुरू हो गई है।

राजस्थान के नागौर जिले में स्थित परबतसर के ऐतिहासिक वीर तेजा पशु मेले का रविवार को भव्य पुरस्कार वितरण समारोह के साथ औपचारिक समापन हो गया। पिछले कई दिनों से पशुपालकों, व्यापारियों और स्थानीय ग्रामीणों की भारी चहल-पहल से गुलजार रहने वाला मेला मैदान अब धीरे-धीरे खाली होने लगा है। खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे व्यापारी और पशुपालक अपने मवेशियों के साथ घर वापसी की राह पर निकल पड़े हैं। मेले के समापन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गई है ताकि सभी प्रतिभागियों की रवानगी को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जा सके।

1,296 मवेशियों की आवक ने बढ़ाई मेले की रौनक

इस वर्ष आयोजित हुए मेले की सबसे बड़ी खासियत पशुओं की कुल संख्या और उनकी विविध नस्लें रहीं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार मेले में कुल 1,296 पशुओं की आवक दर्ज की गई। इनमें सबसे अधिक हिस्सेदारी गोवंश की देखने को मिली, जहां कुल 970 गायों और बैलों की आवक हुई। इसके अलावा 270 भैंस वंश, 46 ऊंट वंश और 13 अश्व वंश के पशु भी मेले का आकर्षण बने। विभिन्न प्रजातियों के मवेशियों की इस व्यापक मौजूदगी ने वीर तेजा पशु मेले की पारंपरिक और सांस्कृतिक साख को मजबूती प्रदान की है।

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व्यापारियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की विशेष एस्कॉर्ट व्यवस्था

मेला परिसर से हजारों पशुओं और उनके मालिकों की एक साथ सुरक्षित रवानगी प्रशासन के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है। व्यापारी अपने पशुओं के साथ अलग-अलग राज्यों और दूरदराज के क्षेत्रों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। सड़कों और राजमार्गों पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस तथा प्रशासनिक टीमें व्यापारियों को सुरक्षित एस्कॉर्ट प्रदान कर रही हैं। इससे मवेशी ले जा रहे व्यापारियों को रास्ते में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पशुपालन विभाग द्वारा सख्त दस्तावेजी प्रक्रिया और चिट्ठियों की जारी

सुरक्षित आवाजाही के साथ-साथ पशुपालन विभाग भी मवेशियों की निकासी को लेकर पूर्ण रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहा है। मेले से बाहर ले जाए जा रहे प्रत्येक पशु के लिए विभाग द्वारा आवश्यक आधिकारिक चिट्ठियां एवं रवानगी पास तैयार किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की कड़ी निगरानी में यह पूरी कागजी प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। इस व्यवस्था से जहां एक तरफ पशुओं के परिवहन और स्वामित्व का पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन को मेले से बाहर जाने वाले सभी पशुओं और व्यापारियों का सटीक आंकड़ा प्राप्त हो रहा है।

उत्कृष्ट नस्ल के पशुपालकों को पारितोषिक देकर किया गया सम्मानित

वीर तेजा पशु मेले का अंतिम दिन केवल औपचारिक रवानगी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि समापन कार्यक्रम के दौरान एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में मेले में आए पशुपालकों और व्यापारियों के उत्कृष्ट मवेशियों को उनकी नस्ल, शारीरिक गुणवत्ता और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर सम्मानित किया गया। विभिन्न श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को पारितोषिक प्रदान किए गए। पुरस्कार वितरण के साथ ही पिछले कई दिनों से चल रही पशु प्रदर्शनी और खरीद-बिक्री की तमाम गतिविधियों का विधिवत समापन घोषित कर दिया गया।

सवाल-जवाब

परबतसर के वीर तेजा पशु मेले में कुल कितने पशु पहुंचे?
इस बार मेले में कुल 1,296 पशुओं की आवक दर्ज की गई।
मेले में किस पशु की संख्या सबसे अधिक रही?
मेले में सबसे अधिक गोवंश की आवक दर्ज हुई, जिनकी कुल संख्या 970 रही।
मेले में गोवंश के अलावा अन्य कौन-कौन से पशु आए?
गोवंश के अलावा मेले में 270 भैंस वंश, 46 ऊंट वंश और 13 अश्व वंश के पशु पहुंचे।
व्यापारियों की घर वापसी के लिए प्रशासन ने क्या विशेष कदम उठाए हैं?
प्रशासन व्यापारियों को सुरक्षित रास्तों से एस्कॉर्ट कर रवाना कर रहा है ताकि रास्ते में कोई परेशानी न हो।
पशुओं को बाहर ले जाने के लिए पशुपालन विभाग क्या प्रक्रिया अपना रहा है?
पशुपालन विभाग अधिकारियों की निगरानी में आवश्यक रवानगी पर्चियां और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

परबतसर मेले के समापन पर 1,296 पशुओं की सुरक्षित घर वापसी के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा विशेष एस्कॉर्ट और पशुपालन विभाग द्वारा पारदर्शी दस्तावेजी प्रक्रिया लागू करना एक सराहनीय कदम है। ऐसे बड़े आयोजनों के बाद हाईवे पर मवेशी परिवहन के दौरान सुरक्षा और आवागमन को सुचारू बनाए रखना कानून-व्यवस्था की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या संभावित अपराध पर लगाम लगती है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

परबतसर के वीर तेजा पशु मेले के संदर्भ में, यहाँ 1,296 पशुओं की कुल आवक में 970 गोवंश और अन्य नस्लों की मौजूदगी पारंपरिक अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में ग्रामीण समाज की भूमिका को स्पष्ट करती है। प्रशासन और पुलिस द्वारा प्रदान की जा रही विशेष एस्कॉर्ट व्यवस्था तथा पशुपालन विभाग की सख्त दस्तावेजी प्रक्रिया से न केवल राजमार्गों पर परिवहन सुगम रहता है, बल्कि मवेशियों की अवैध आवाजाही और संभावित चोरी जैसी आपराधिक गतिविधियों पर भी प्रभावी अंकुश लगता है, जो ऐसे बड़े क्षेत्रीय आयोजनों के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

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