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पठानकोट-मंडी फोरलेन: मंडी से पधर खंड के ग्रीन फील्ड इलाके में फूटे पानी के स्रोत, सड़क बचाने को चैनलाइजेशन शुरूहिमाचल प्रदेश
7 अक्तू॰ 2026, 10:42 am (30 दिन पहले)· 2

पठानकोट-मंडी फोरलेन: मंडी से पधर खंड के ग्रीन फील्ड इलाके में फूटे पानी के स्रोत, सड़क बचाने को चैनलाइजेशन शुरू

मंडी से पधर के बीच बने 19 किलोमीटर लंबे हाईवे के 8 किलोमीटर ग्रीन फील्ड हिस्से में बारिश के बाद नए जलस्रोत फूटने से खतरा पैदा हो गया है, जिसे कलवर्ट से जोड़ने का काम 15 दिनों में पूरा होगा।

हिमाचल प्रदेश में पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे नए मार्ग पर बारिश के चलते अप्रत्याशित तकनीकी चुनौती सामने आई है। मंडी से पधर के बीच निर्मित 19 किलोमीटर लंबे हिस्से में से 8 किलोमीटर का क्षेत्र ग्रीन फील्ड इलाके में पड़ता है। मानसूनी बारिश के बाद इस 8 किलोमीटर के पूरे दायरे में जमीन के भीतर से पानी के नए स्रोत फूट पड़े हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा किए गए तकनीकी आकलन में यह बात सामने आई कि अगर इन जलस्रोतों के बहाव को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में यह पूरी सड़क की नींव और बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर संकट बन सकते हैं।

सड़क को सुरक्षित रखने के लिए कलवर्ट से जोड़ा जा रहा पानी

मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी ने बताया कि बरसात के चलते इस मार्ग पर करीब 5 से 6 अलग-अलग जगहों पर पानी के नए स्रोत सामने आए हैं। इन जलस्रोतों से लगातार हो रहे रिसाव को व्यवस्थित दिशा देने के मकसद से चैनलाइजेशन का काम तुरंत शुरू कर दिया गया है। योजना के तहत सभी नए स्रोतों के पानी को सही ढलान देकर पास में बने कलवर्ट की ओर मोड़ा जा रहा है, जिससे पानी सीधे पुलियों के जरिए बाहर निकल जाए और डामर या सड़क की संरचना को कोई क्षति न पहुंचे।

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गावर कंस्ट्रक्शन को मिला 15 दिनों का अल्टीमेटम

इस मार्ग के निर्माण का जिम्मा संभाल रही गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के जीएम विकास नागर ने बताया कि एनएचएआई से निर्देश मिलते ही मौके पर राहत और मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू करा दिया गया है। जिन भी 5 से 6 जगहों पर नए जलस्रोत उभरे हैं, वहां पानी को वैज्ञानिक और उचित तरीके से चैनलाइज किया जा रहा है। निर्माण कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले 15 दिनों के भीतर इस पूरे काम को पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा कर लिया जाए, ताकि आगे किसी कटाव की आशंका न रहे।

महीने के अंत तक पूरी तरह बहाल हो सकता है ट्रैफिक

मंडी से पधर के बीच का यह 19 किलोमीटर लंबा नया खंड लगभग बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। मौजूदा समय में बरसात से हुए मामूली नुकसान की मरम्मत और जल निकासी के काम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। एनएचएआई की योजना इसी महीने के अंत तक इस मार्ग को पूरी तरह दुरुस्त कर वाहनों की नियमित आवाजाही के लिए खोलने की है। वर्तमान में इस मार्ग के बड़े हिस्से पर वाहनों का संचालन हो रहा है, जबकि मरम्मत और चैनलाइजेशन वाले स्थानों पर सुरक्षा के लिहाज से ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।

सवाल-जवाब

मंडी से पधर के बीच हाईवे के किस हिस्से में समस्या आई है?
मंडी से पधर के बीच बने 19 किलोमीटर लंबे हाईवे के 8 किलोमीटर ग्रीन फील्ड इलाके में बरसात के बाद 5 से 6 जगहों पर पानी के नए स्रोत फूट पड़े हैं।
जलस्रोतों से सड़क को बचाने के लिए क्या कदम उठाया जा रहा है?
एनएचएआई इन सभी नए जलस्रोतों को चैनलाइज करके उनके पानी को पास के कलवर्ट में भेज रहा है ताकि सड़क को नुकसान न पहुंचे।
चैनलाइजेशन का कार्य कब तक पूरा होने की उम्मीद है?
निर्माण कार्य कर रही गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के अनुसार यह काम आने वाले 15 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
इस नए 19 किमी हाईवे पर पूरा ट्रैफिक कब तक शुरू होगा?
एनएचएआई का लक्ष्य मरम्मत और चैनलाइजेशन का कार्य पूरा करके इसी महीने के अंत तक पूरे हाईवे को यातायात के लिए सुचारू रूप से खोलने का है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·29 दिन पहले

बरसात के बाद पहाड़ी इलाकों में अचानक पानी के स्रोत फूट पड़ना आम बात है, पर 15 दिन में इसका पक्का समाधान हो जाएगा, इस पर पूरा भरोसा करना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

पहाड़ों में सड़क बनाना और संभालना दोनों ही बहुत टेढ़ी खीर है। बारिश के बाद नए पानी के स्रोत फूटना सच में बड़ी तकनीकी चुनौती है, उम्मीद है 15 दिन में काम ठीक से पूरा हो जाए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

रविकेश जी, बात सही है आपकी, पर मुझे थोड़ा शक है कि सिर्फ पंद्रह दिन में ये सारा पानी हमेशा के लिए संभल जाएगा। पहाड़ों में पानी का रास्ता रोकना आसान नहीं होता।

Rohan Verma@rohan-verma·30 दिन पहले

पहाड़ में सड़क बनाना सचमुच लोहे के चने चबाने जैसा है। पिछली बार जब मैं मनाली गया था, तो रास्ते में अचानक ऐसा ही पानी फूटने से घंटों जाम में फंसना पड़ा था। उम्मीद है एनएचएआई का यह पंद्रह दिन का काम समय पर पूरा हो जाए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पहाड़ों में सड़क बनाना किसी चुनौती से कम नहीं है, उम्मीद है 15 दिन में काम निपट जाए।

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