सिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामन्यूयॉर्क में वैश्विक तनाव पर बोले एस. जयशंकर, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में तुरंत बदलाव जरूरीकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगदलाल स्ट्रीट पर शुक्रवार को लौटी रौनक, रियल्टी और मिडकैप की अगुवाई में सेंसेक्स और निफ्टी मजबूतअमेरिकी डॉलर के सामने कनाडाई डॉलर 5 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसला, व्यापार तनाव से बढ़ा दबावकच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलींशेयर बाजार में आज 64 कंपनियों का एक्स-डेट एक्शन: टीएएएल टेक का स्टॉक स्प्लिट और 63 शेयरों पर डिविडेंड का मौकाराजस्थान के देशनोक में खेत की डिग्गी में डूबे तीन सगे भाई, एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गई जानलखनऊ में 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बांटे गए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोरबैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के कर्जदारों पर बढ़ा ब्याज का बोझ, 12 जून से लागू होंगी नई दरें
पेंशनभोगियों के बकाए पर बड़ा फैसला, अक्टूबर में मिलेगा एरियर और मेडिकल बिल भी होंगे मंजूरहिमाचल प्रदेश
21 सित॰ 2026, 3:45 pm (16 घंटे पहले)· 2

पेंशनभोगियों के बकाए पर बड़ा फैसला, अक्टूबर में मिलेगा एरियर और मेडिकल बिल भी होंगे मंजूर

हिमाचल प्रदेश सरकार ने पेंशनरों के बकाया भुगतान की समयसीमा तय करते हुए अक्टूबर में श्रेणीवार एरियर देने और लंबित मेडिकल क्लेम निपटाने का निर्देश दिया है।

हिमाचल प्रदेश के सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए वित्तीय राहत की रूपरेखा तय करते हुए राज्य प्रशासन ने बकाया एरियर भुगतान को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस व्यवस्था के तहत 1 जनवरी, 2016 से 31 दिसंबर, 2022 की समयसीमा के भीतर सेवानिवृत्त हुए तृतीय श्रेणी यानी क्लास-III पेंशनरों को उनके कुल पेंशन एरियर का 30 प्रतिशत हिस्सा जारी किया जाएगा। इसके साथ ही क्लास-I और क्लास-II वर्ग के सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए 15 प्रतिशत एरियर राशि का भुगतान तय किया गया है। यह संपूर्ण वित्तीय वितरण इसी वर्ष के अक्टूबर माह के दौरान सीधे पात्र पेंशनभोगियों को दिया जाएगा।

पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ संवाद और चिकित्सा दावों का निपटारा

शिमला में आयोजित हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के प्रतिनिधियों की एक विस्तृत बैठक के दौरान इन वित्तीय निर्णयों की जानकारी साझा की गई। इस परिचर्चा में संगठन के विभिन्न पदाधिकारी और बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हुए। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि राज्य शासन कर्मचारियों तथा वरिष्ठ नागरिकों की प्रशासनिक और वित्तीय दिक्कतों से पूरी तरह वाकिफ है तथा उनका समाधान चरणबद्ध तरीके से निकाल रहा है। शासन ने सभी प्रशासनिक विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि पेंशनरों के जितने भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे यानी मेडिकल रिइंबर्समेंट क्लेम अटके पड़े हैं, उनका शीघ्रता से भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा 65 वर्ष से अधिक उम्र वर्ग के सभी पेंशनरों का पूरा बकाया एरियर प्रशासन पहले ही प्रदान कर चुका है।

ये भी पढ़ें

महंगाई भत्ते और पुरानी पेंशन बहाली पर रुख

प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक में उल्लेख किया कि राज्य सरकार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को समय-समय पर वित्तीय देयताएं सौंपती रही है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आगामी समय में महंगाई भत्ते की एक और नई किस्त को मंजूरी देने पर विचार-विमर्श चल रहा है। राज्य की विकास यात्रा में पेंशनरों की मेहनत और भागीदारी की सराहना करते हुए कहा गया कि सेवानिवृत्त कर्मियों ने प्रदेश के बुनियादी ढांचे और सामाजिक प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है। सेवा से निवृत्त होने के बाद कर्मचारियों का जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक बना रहे, इसी उद्देश्य से बिना किसी राजनीतिक लाभ-हानि के पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने का निर्णय लिया गया था।

राजकोषीय चुनौतियां और 16वें वित्त आयोग का प्रभाव

वर्तमान वित्तीय स्थिति का ब्योरा देते हुए बताया गया कि जब मौजूदा कांग्रेस प्रशासन ने कार्यभार संभाला था, उस समय पूर्व भाजपा शासन से विरासत में 76,000 करोड़ रुपये का भारी कर्ज मिला था। इसके अतिरिक्त सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की लगभग 10,000 करोड़ रुपये की विभिन्न देनदारियां भी लंबित पड़ी थीं। राज्य की आय पर सबसे बड़ा आघात राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी की व्यवस्था बंद होने से लगा है। वर्ष 1952 से निरंतर हिमाचल प्रदेश को मिल रहे इस राजस्व घाटा अनुदान को 16वें वित्त आयोग ने 77 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद समाप्त कर दिया है।

यह अनुदान राज्य के निवासियों के आर्थिक अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ था। इसकी तुलना एक ऐसे आर्थिक संकट से की जा सकती है जहां एक लाख रुपये की कुल सालाना कमाई में से अचानक 40,000 रुपये सीधे काट लिए जाएं। इस वित्तीय कटौती के चलते प्रदेश को प्रत्येक वर्ष 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे दैनिक राजकोषीय प्रबंधन पर अत्यधिक दबाव बन गया है।

पूर्व और वर्तमान वित्तीय प्रबंधन की तुलना

अतीत के वित्तीय तौर-तरीकों का विश्लेषण करते हुए यह बताया गया कि पिछली भाजपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में राज्य को 54,000 करोड़ रुपये राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में प्राप्त हुए थे। यदि उस दौर में सख्त वित्तीय अनुशासन का पालन किया जाता, तो प्रदेश पर लदे कर्ज के बोझ में लगभग 30,000 करोड़ रुपये की कमी लाई जा सकती थी और कर्मचारियों की तमाम देनदारियां भी समय रहते निपटाई जा सकती थीं। इसके विपरीत, उस कार्यकाल में समूचे प्रदेश के भीतर तकरीबन 1,000 करोड़ रुपये की लागत से कई सरकारी भवनों का निर्माण करा दिया गया, जिनमें से अनेक इमारतें आज भी पूरी तरह खाली पड़ी हैं।

इसके विपरीत, मौजूदा कांग्रेस प्रशासन को पिछले तीन वर्षों के दौरान आरडीजी मद में केवल 17,000 करोड़ रुपये की राशि हासिल हुई है। इतने सीमित संसाधनों के बावजूद सरकार वित्तीय अनुशासन के नियमों का कड़ाई से पालन कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि शासन के हर कदम का मूल लक्ष्य प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और राज्य के खजाने को टिकाऊ मजबूती देना है। बैठक के समापन पर हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए उठाए गए इन कदमों की सराहना की और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

सवाल-जवाब

क्लास-III पेंशनरों को कितना एरियर मिलेगा?
1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए क्लास-III पेंशनरों को उनके बकाया एरियर का 30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।
क्लास-I और क्लास-II पेंशनरों को कितना भुगतान किया जाएगा?
क्लास-I और क्लास-II के पात्र पेंशनभोगियों को उनके पेंशन एरियर का 15 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा।
यह पेंशन एरियर किस महीने में जारी होगा?
सरकार इस वित्तीय एरियर का वितरण इसी वर्ष अक्टूबर माह में करेगी।
65 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनरों के लिए क्या व्यवस्था है?
65 वर्ष से अधिक आयु के सभी पेंशनभोगियों का बकाया एरियर सरकार पहले ही जारी कर चुकी है।
लंबित मेडिकल क्लेम को लेकर क्या निर्देश दिए गए हैं?
सभी विभागों को पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों का तुरंत भुगतान करने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं।
राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से प्रदेश को कितना नुकसान हो रहा है?
16वें वित्त आयोग द्वारा आरडीजी बंद किए जाने से हिमाचल प्रदेश को हर साल 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·12 घंटे पहले

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पेंशनरों को एरियर और मेडिकल बिल देने का यह निर्णय वित्तीय प्रबंधन और चुनावी राजनीति का एक दिलचस्प संतुलन है। 76,000 करोड़ के कर्ज और राजस्व घाटा अनुदान रुकने जैसी गंभीर राजकोषीय चुनौतियों के बीच, अक्टूबर में होने वाला यह भुगतान राज्य के खजाने पर भारी दबाव डालेगा। यह देखना अहम होगा कि सरकार महंगाई भत्ते की अगली किस्त और पुरानी पेंशन जैसे वादों को इन वित्तीय संकटों के बीच कैसे संभालती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·15 घंटे पहले

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा अक्टूबर में एरियर और मेडिकल क्लेम के भुगतान का यह निर्णय राज्य के वित्तीय संकट के बीच एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। 76,000 करोड़ रुपये के कर्ज और राजस्व घाटा अनुदान जैसी चुनौतियों के बावजूद पेंशनरों के बकाए का चरणबद्ध निपटारा राजनीतिक और सामाजिक रूप से दबाव को कम करेगा। हालांकि, 16वें वित्त आयोग के प्रभाव और डीए की अगली किस्त पर निर्णय यह तय करेंगे कि सरकार अपनी राजकोषीय स्थिति को कैसे संभालती है।

Ravikash Gupta@ravikash·15 घंटे पहले

हिमाचल प्रदेश सरकार के सामने 76,000 करोड़ रुपये के कर्ज और 10,000 करोड़ रुपये की लंबित देनदारियों का भारी दबाव है। राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद, अक्टूबर में एरियर और मेडिकल क्लेम का चरणबद्ध भुगतान राज्य की राजकोषीय स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है। आगामी डीए किस्त पर निर्णय और 16वें वित्त आयोग के प्रभावों से ही तय होगा कि सरकार दीर्घकालिक वित्तीय संतुलन कैसे बनाएगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 घंटे पहले

यह प्रशासनिक निर्णय और वित्तीय देनदारियों का मामला भले ही सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया लगे, लेकिन इसमें सार्वजनिक धन के प्रबंधन और कानूनी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण आयाम हैं। 76,000 करोड़ रुपये के भारी कर्ज और लंबित 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियों के बीच, एरियर और मेडिकल क्लेम का यह चरणबद्ध भुगतान राज्य की वित्तीय सेहत और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गहरा सवाल खड़ा करता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या सरकार बिना किसी कानूनी विवाद या प्रशासनिक देरी के अक्टूबर की तय समयसीमा में यह भुगतान सुनिश्चित कर पाती है, क्योंकि ऐसे मामलों में अक्सर बजट आवंटन और खजाने की स्थिति बड़ा कानूनी व प्रशासनिक संकट बन जाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·15 घंटे पहले

अक्टूबर में एरियर और मेडिकल बिलों के भुगतान की यह घोषणा एक संवेदनशील कदम है, लेकिन इसे बनाए रखना आसान नहीं होगा। जब सरकार पर पहले से ही 76,000 करोड़ रुपये का कर्ज और 10,000 करोड़ रुपये की अन्य देनदारियां हों, तो राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद राजकोषीय संतुलन बिगाड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या राज्य प्रशासन बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय संकट के अक्टूबर की समयसीमा में यह भुगतान पूरा कर पाता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp