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फजलगंज में 40 करोड़ से सजेगा नया दमकल केंद्र, जीपीएस और रोबोट से रुकेगी आगउत्तर प्रदेश
25 सित॰ 2026, 9:59 am (34 दिन पहले)· 2

फजलगंज में 40 करोड़ से सजेगा नया दमकल केंद्र, जीपीएस और रोबोट से रुकेगी आग

कानपुर के फजलगंज में 1958 की जर्जर इमारत की जगह 40 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आधुनिक बहुमंजिला फायर हेडक्वार्टर बनेगा, जिसमें रोबोट और जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा होगी।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर में अग्निशमन सेवाओं का बुनियादी ढांचा पूरी तरह बदलने जा रहा है। फजलगंज इलाके में वर्ष 1958 में निर्मित पुराने अग्निशमन मुख्यालय की जगह अब एक सर्वसुविधायुक्त बहुमंजिला इमारत खड़ी की जाएगी। लगभग 68 वर्ष पुरानी मौजूदा इमारत समय बीतने के साथ बेहद खस्ताहाल हो चुकी थी, जिसके चलते तकनीकी रूप से उसे कंडम घोषित कर दिया गया था। अब इस पूरे परिसर को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए 40 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजना तैयार की गई है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर में किसी भी आपात स्थिति के दौरान प्रतिक्रिया समय को घटाना और आग की लपटों को शुरुआती मिनटों में ही काबू करना है।

सेंटर ऑफ कमांड के रूप में विकसित होगा नया ढांचा

नया प्रस्तावित परिसर केवल प्रशासनिक दफ्तर भर नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे कानपुर महानगर के लिए केंद्रीय नियंत्रण केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है। चीफ फायर ऑफिसर दीपक शर्मा ने जानकारी दी कि फजलगंज का मौजूदा ढांचा बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुका था, जिसे निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। अब उसी स्थान पर 40 करोड़ रुपये से अधिक के बजट से उन्नत हेडक्वार्टर बनाया जाएगा। इसे वास्तविक अर्थों में सेंटर ऑफ कमांड बनाया जाएगा, जहां से शहर के हर कोने में तैनात वाहनों और कर्मियों की गतिविधियों का संचालन किया जा सकेगा।

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इस पूरी कार्यप्रणाली की सबसे अहम कड़ी जीपीएस आधारित निगरानी तंत्र होगा। इस प्रणाली की मदद से सभी दमकल गाड़ियों की वास्तविक स्थिति स्क्रीन पर साफ नजर आएगी। जैसे ही कंट्रोल रूम को किसी इलाके से आग लगने की सूचना प्राप्त होगी, घटनास्थल के सबसे पास मौजूद फायर टेंडर की पहचान कर उसे तुरंत रवाना कर दिया जाएगा। इससे गाड़ियों को दूर से बुलाने में लगने वाला कीमती समय बचेगा और पूरे शहर के रिस्पॉन्स का एक ही जगह से सटीक तालमेल बैठाया जा सकेगा।

संकरी बस्तियों में मोर्चा संभालेंगे रोबोट

महानगर के कई पुराने आवासीय व व्यापारिक क्षेत्रों में सड़कें और गलियां बेहद संकरी हैं, जहां भारी दमकल वाहनों का पहुंचना बेहद कठिन चुनौती बन जाता है। इसके अलावा घने धुएं और प्रचंड लपटों के बीच कर्मियों का सीधे अंदर दाखिल होना जानलेवा साबित होता है। इस बाधा को दूर करने के लिए आधुनिक रोबोटिक फायर फाइटिंग सिस्टम को व्यवस्था में जोड़ा जाएगा।

इन स्वचालित रोबोटों को जोखिम भरे तंग रास्तों में भेजकर दूर से ही आग बुझाने की सटीक कार्रवाई की जा सकेगी, जिससे दमकलकर्मियों को सीधे खतरे में जाने से बचाया जा सकेगा। इसके साथ ही गगनचुंबी इमारतों में बचाव अभियान चलाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और रासायनिक पदार्थों से भड़की आग पर काबू पाने के लिए विशेष रासायनिक टेंडर भी इस नए बेड़े का हिस्सा होंगे।

औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष जोर

कानपुर में बड़े पैमाने पर कारखाने, निर्माण इकाइयां और गोदाम सक्रिय हैं। फजलगंज, दादानगर, पनकी और इनसे जुड़े अन्य औद्योगिक परिक्षेत्रों में ज्वलनशील सामग्री की भारी मौजूदगी रहती है, जिसके कारण छोटी सी चिंगारी भी विकराल लपटों में बदल सकती है। ऐसे में दमकल विभाग का त्वरित एक्शन जान-माल के भारी नुकसान को रोकने में निर्णायक साबित होता है।

अधिकारियों के अनुसार, करीब सात दशक पुराने ढांचे की जगह बनने वाला यह एकीकृत केंद्र आपातकालीन सूचना मिलते ही न्यूनतम समय में प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित करेगा। उन्नत तकनीक, रोबोटिक्स और रियल टाइम ट्रैकिंग के समन्वय से आग को विकराल होने से पहले ही काबू में कर लिया जाएगा।

सवाल-जवाब

कानपुर में नया फायर हेडक्वार्टर किस स्थान पर बनाया जा रहा है?
यह नया आधुनिक फायर हेडक्वार्टर फजलगंज में पुराने दमकल केंद्र के स्थान पर बनाया जा रहा है।
इस नई परियोजना की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
इस अत्याधुनिक बहुमंजिला केंद्र के निर्माण पर 40 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी।
पुरानी दमकल इमारत को हटाने का क्या कारण था?
वर्ष 1958 में बनी यह 68 साल पुरानी इमारत काफी जर्जर हो चुकी थी और इसे आधिकारिक रूप से कंडम घोषित कर दिया गया था।
संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए क्या विशेष व्यवस्था होगी?
तंग गलियों और अत्यधिक जोखिम भरे स्थानों पर आग पर काबू पाने के लिए आधुनिक रोबोटिक फायर फाइटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
वाहनों की त्वरित रवानगी के लिए कौन सी तकनीक लागू होगी?
दमकल गाड़ियों की निगरानी और घटनास्थल के सबसे नजदीकी वाहन को भेजने के लिए जीपीएस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग होगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·33 दिन पहले

कानपुर में 40 करोड़ से नया फायर स्टेशन बनना बहुत अच्छी पहल है, खासकर रोबोट और जीपीएस आने से जाम में फंसने वाली गाड़ियां जल्दी पहुंच पाएंगी। बस यह समझ नहीं आया कि क्या संकरी गलियों के लिए आने वाले ये रोबोट हर तरह के तंग रास्तों में आसानी से जा सकेंगे या उनके काम करने के तरीके की भी अपनी कोई सीमा है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 दिन पहले

चालीस करोड़ का बजट और रोबोट की बातें सुनने में तो बड़ी अच्छी लगती हैं, पर कानपुर की संकरी गलियों में ये वाकई कितना असर दिखा पाएंगे, इस पर थोड़ा शक है।

Ravikash Gupta@ravikash·33 दिन पहले

अ अर्जुन जी, शक होना लाजिमी है, लेकिन तकनीक आने से कम से कम गलियों में जान का जोखिम तो घटेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·33 दिन पहले

फजलगंज के पुराने स्टेशन की हालत सचमुच डरावनी थी। 1958 का वो ढांचा अब जाकर बदला है, रोबोट और जीपीएस आने से कानपुर की संकरी गलियों में राहत मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 दिन पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। वो पुरानी इमारत सच में किसी हादसे का इंतज़ार कर रही थी, अब रोबोट आने से जान का जोखिम कम होगा।

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