पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त, डॉलर मजबूतगोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवालनागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायसंघर्षों को मात देकर सिनेमा में बनाई मुकाम, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्या दत्ता की अनूठी दास्तान
प्रतापगढ़ के दिव्यांग नारायण और मीरा का सफर, चुनौतियों के बीच मिले दो साथी अब सामूहिक विवाह में लेंगे सात फेरेराजस्थान
19 सित॰ 2026, 2:09 pm (6 दिन पहले)· 1

प्रतापगढ़ के दिव्यांग नारायण और मीरा का सफर, चुनौतियों के बीच मिले दो साथी अब सामूहिक विवाह में लेंगे सात फेरे

बचपन से शारीरिक चुनौतियों का सामना करने वाले प्रतापगढ़ के नारायण लाल मीणा और मीरा कुमारी मीणा अब विवाह के पवित्र बंधन में बंधने जा रहे हैं। नारायण सेवा संस्थान के 47वें सामूहिक विवाह समारोह में दोनों एक दूजे का हाथ थामेंगे।

जिंदगी में आने वाली शारीरिक बाधाएं और सामाजिक चुनौतियां कभी भी सच्चे विश्वास और इरादों को डिगा नहीं सकतीं। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में स्थित कुम्हारी गांव के रहने वाले नारायण लाल मीणा और मीरा कुमारी मीणा की दास्तान इस बात का जीवंत उदाहरण है। दोनों ही साथी दिव्यांगता के साथ बड़े हुए और दोनों ने ही अपने जीवन में व्यक्तिगत संघर्षों को करीब से देखा। जब इन दोनों की मुलाकात हुई, तो उन्हें ऐसा जीवनसाथी मिला जो बिना किसी सफाई के एक दूसरे के दर्द, रोजमर्रा की दिक्कतों और मानसिक स्थिति को गहराई से समझ सकता था। अकेलेपन के लंबे दौर के बाद अब दोनों ने एक साथ कदम बढ़ाने का फैसला किया है।

बचपन का संक्रमण और आत्मनिर्भरता की राह

नारायण लाल के जीवन में कठिनाइयों की शुरुआत उस वक्त हो गई थी जब वह महज एक वर्ष के थे। उस उम्र में उनके पैर में गंभीर संक्रमण हो गया था। परिजनों ने उपचार कराया, लेकिन संक्रमण के असर की वजह से उनका दायां पैर पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका और छोटा रह गया। इस कारण आगे चलकर उनके लिए सामान्य रूप से चलना फिरना कभी आसान नहीं रहा। इसके बावजूद नारायण लाल ने अपनी इस शारीरिक सीमा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने स्वाभिमान के साथ जीने का संकल्प लिया और आजीविका के लिए एक छोटी सी किराना दुकान शुरू की। अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर वे अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बने और आत्मनिर्भर होकर दिखाया। हालांकि, जब उनकी शादी की उम्र आई, तो शारीरिक दिव्यांगता के कारण उनके लिए रिश्ते बनने में लगातार रुकावटें आती रहीं और कई जगह बात बनते-बनते रह गई।

ये भी पढ़ें

मीरा का हौसला और एक हमसफर की तलाश

दूसरी तरफ इसी संघर्ष की साझीदार बनीं मीरा कुमारी मीणा, जो बाएं पैर से दिव्यांग हैं। मीरा ने भी कभी अपनी शारीरिक परेशानी को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साथ ही घरेलू जिम्मेदारियों में भी अपने परिवार का पूरा हाथ बंटाती रहीं। मीरा के परिजन भी उनकी शादी को लेकर स्वाभाविक रूप से चिंतित थे। नारायण और मीरा दोनों के ही परिवार अपने बच्चों के लिए किसी ऐसे जीवनसाथी की खोज में जुटे थे, जो उनकी शारीरिक स्थिति के प्रति संवेदनशील हो और उनके हालात को वास्तविक रूप से समझ सके। दोनों ही परिवारों की यही दिली इच्छा थी कि रिश्ता किसी औपचारिकता के बजाय आपसी समझ और सम्मान पर टिका हो।

नारायण सेवा संस्थान बना नई उम्मीद का केंद्र

रिश्तों की इसी तलाश के दौरान दोनों परिवारों को नारायण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित किए जाने वाले सामूहिक विवाह समारोह के बारे में सूचना मिली। यह जानकारी दोनों ही परिवारों के लिए एक नई उम्मीद और रोशनी की किरण बनकर आई। संस्थान के माध्यम से जब नारायण और मीरा का आमना-सामना हुआ, तो दोनों ने एक अनूठा जुड़ाव महसूस किया। उन्हें लगा कि सामने बैठा इंसान न केवल उनकी तकलीफों से वाकिफ है, बल्कि उसने खुद भी उसी तरह के दर्द और उपेक्षा को झेला है। मुलाकातों के बाद आपसी बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और जल्द ही दोनों के बीच वैवाहिक रिश्ता तय हो गया। दोनों पक्षों के परिजनों ने भी खुशी-खुशी इस रिश्ते पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी। यह रिश्ता सिर्फ दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि उन अनकहे संघर्षों और एकाकीपन का अंत भी है, जिससे दोनों इतने वर्षों तक अलग-अलग जूझ रहे थे।

47वें सामूहिक विवाह समारोह में पूरी होगी नई शुरुआत

अब नारायण लाल और मीरा कुमारी नारायण सेवा संस्थान की ओर से आयोजित होने वाले 47वें दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में पूरे विधि-विधान से सात फेरे लेकर अपने गृहस्थ जीवन में प्रवेश करेंगे। जिन कदमों की रफ्तार को कभी शारीरिक मुश्किलों ने थामने की कोशिश की थी, अब वही कदम जीवन के नए सफर में एक दूसरे का सहारा बनकर डगमगाए बिना आगे बढ़ेंगे। इन दोनों का यह निर्णय साबित करता है कि सच्चा प्रेम केवल बाहरी बनावट या आसान परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता। जब दो लोग अपनी अधूरी दास्तान लेकर एक साथ आते हैं और एक दूसरे का संबल बनते हैं, तो जिंदगी का हर मुश्किल रास्ता आसान हो जाता है।

सवाल-जवाब

नारायण लाल मीणा और मीरा कुमारी मीणा कहां के रहने वाले हैं?
नारायण लाल मीणा और मीरा कुमारी मीणा राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के कुम्हारी गांव के निवासी हैं।
नारायण लाल को दिव्यांगता किस कारण से हुई थी?
जब नारायण महज एक साल के थे, तब उनके पैर में गंभीर संक्रमण हो गया था, जिसके इलाज के बाद उनका दायां पैर छोटा रह गया।
नारायण लाल आजीविका के लिए क्या काम करते हैं?
नारायण लाल ने अपनी आत्मनिर्भरता के लिए एक छोटी सी किराना दुकान शुरू की और उसी से अपने परिवार का सहारा बने।
मीरा कुमारी ने अपनी दिव्यांगता के बावजूद क्या जारी रखा?
बाएं पैर से दिव्यांग होने के बावजूद मीरा कुमारी ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और घर के दैनिक कामकाज में भी परिवार का हाथ बंटाया।
दोनों का विवाह किस समारोह में संपन्न होने जा रहा है?
दोनों नारायण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित 47वें दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में सात फेरे लेकर शादी करेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह प्रसंग केवल एक विवाह नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में सामाजिक समावेशन और आर्थिक स्वावलंबन का एक गहरा आर्थिक व मानवीय पहलू प्रस्तुत करता है। नारायण जैसे छोटे उद्यमियों का आत्मनिर्भर होना और नारायण सेवा संस्थान जैसे संगठनों द्वारा ऐसे सामूहिक मंच तैयार करना, हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ता है। ऐसे सामाजिक-आर्थिक मॉडल भविष्य में दिव्यांगों के लिए वित्तीय सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन की नई राहें खोलेंगे।

Sophie Laurent@sophie-laurent·5 दिन पहले

रविकेश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ऐसे समावेशन मॉडल केवल सामाजिक न्याय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये स्थानीय श्रम बाजार और उपभोग में भी सकारात्मक योगदान देते हैं। जब नारायण और मीरा जैसे स्वावलंबी व्यक्ति आर्थिक मुख्यधारा से जुड़ते हैं, तो यह क्षेत्रीय असमानता को कम करने के साथ-साथ ग्रामीण भारत में एक अधिक समावेशी वित्तीय और सामाजिक ताना-बाना तैयार करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

नारायण और मीरा का यह प्रसंग सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और संस्थागत सहयोग का एक मजबूत उदाहरण है। एक क्राइम और समाज-कल्याण संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि ऐसे सामूहिक विवाह कार्यक्रम दिव्यांगजनों के जीवन से सामाजिक उपेक्षा और अलगाव के अंधेरे को दूर कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होते हैं। यह पहल दिखाती है कि जब संगठित प्रयास सही दिशा में हों, तो हाशिए पर खड़े व्यक्तियों के अधिकार और सम्मानजनक जीवन की राह कैसे आसान हो सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

करण का विश्लेषण सही है कि यह केवल विवाह नहीं बल्कि सामाजिक मुख्यधारा से जुड़ाव है, लेकिन नीतिगत दृष्टिकोण से देखें तो यह घटना व्यवस्था के उस खालीपन को भी उजागर करती है जहाँ दिव्यांगजनों के पुनर्वास और विवाह जैसे बुनियादी सामाजिक अधिकारों के लिए अब भी नागरिक संगठनों पर निर्भर रहना पड़ता है। यद्यपि ऐसे सामूहिक आयोजन संवेदनशीलता का बड़ा उदाहरण हैं, परंतु दीर्घकालिक समावेशी विकास के लिए राज्य स्तर पर ऐसी योजनाओं को संस्थागत और व्यापक रूप देने की आवश्यकता है ताकि हाशिए के हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन मिल सके।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह खबर राजस्थान के प्रतापगढ़ से है, जहाँ नारायण और मीरा सामूहिक विवाह के जरिए अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रहे हैं। शारीरिक चुनौतियों और सामाजिक पूर्वाग्रहों के बीच ऐसे सामूहिक विवाह न केवल दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह संस्था के प्रति पारंपरिक सोच को भी सकारात्मक दिशा देते हैं। ऐसे आयोजनों से वंचित और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होता है, जो सामाजिक कल्याण की दिशा में एक अहम कदम है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp