पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हाल
प्रतापगढ़ में स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, पानी भरे रास्ते पर पेड़ के तने से गुजरने को मजबूर नौनिहालराजस्थान
24 अग॰ 2026, 7:50 am (32 दिन पहले)· 2

प्रतापगढ़ में स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, पानी भरे रास्ते पर पेड़ के तने से गुजरने को मजबूर नौनिहाल

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में अरनोद उपखंड के चिकली और उदिया खेड़ी के बीच स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। बारिश के पानी से भरे रास्ते को पार करने के लिए बच्चों को पेड़ के तने का सहारा लेना पड़ता है।

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले से ग्रामीण इलाकों की बदहाल व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी की एक खतरनाक तस्वीर सामने आई है। यहां के अरनोद उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में बच्चों को अपनी शिक्षा हासिल करने के लिए हर रोज अपनी जिंदगी दांव पर लगानी पड़ रही है। चिकली और उदिया खेड़ी गांवों के बीच बने रास्ते पर बारिश के दिनों में भारी जलभराव हो जाता है, जिससे वहां से गुजरना बेहद खतरनाक हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के पास पेड़ के गिरे हुए या तने पर चलकर रास्ता पार करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है। सोशल मीडिया पर सामने आए दृश्यों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बच्चे अपनी पीठ पर भारी बस्ते लादे हुए और हाथों में किताबें थामे एक-एक करके उस लकड़ी के तने पर संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहे हैं।

पेड़ के तने पर संतुलन बनाते मासूम

बारिश के मौसम में जब यह रास्ता पूरी तरह पानी से भर जाता है, तब नौनिहालों के लिए विद्यालय पहुंचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। नीचे गहरे पानी के बीच केवल एक पेड़ का तना ही दोनों छोर को जोड़ता है जिस पर पैर रखकर बच्चों को गुजरना पड़ता है। थोड़ी सी भी असावधानी या संतुलन बिगड़ने पर बच्चों के सीधे पानी में गिरने और किसी बड़े हादसे का शिकार होने की आशंका बनी रहती है। छोटे बच्चों के लिए यह जोखिम और भी अधिक बढ़ जाता है, लेकिन शिक्षा की ललक उन्हें हर दिन इस खतरनाक रास्ते से गुजरने को मजबूर करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रास्ते पर हर वक्त दुर्घटना का डर सताता रहता है, खासकर तब जब बच्चे अपने भारी बैग लेकर इस पर से गुजरते हैं।

ये भी पढ़ें

लगभग पच्चीस घरों की आबादी प्रभावित

इस पूरे मार्ग पर केवल स्कूली बच्चे ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण भी रोजाना आवाजाही करते हैं। जानकारी के अनुसार चिकली और उदिया खेड़ी के इस क्षेत्र में लगभग बीस से पच्चीस घरों की घनी आबादी निवास करती है। यही मार्ग स्थानीय निवासियों का दैनिक जीवन का मुख्य रास्ता है जिससे वे अपने जरूरी कामों के लिए आना-जाना करते हैं। बरसात के दिनों में जलभराव के कारण न केवल बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो जाता है, बल्कि आम नागरिकों का जीवन भी प्रभावित होता है। अभिभावकों के दिलों में हर वक्त अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक अनजाना डर और चिंता बनी रहती है। ग्रामीण लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि इस समस्या का कोई स्थायी हल निकाला जाए ताकि हर साल बरसात में उन्हें इस नर्क जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

नेताओं को जानकारी के बावजूद नहीं निकला हल

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि वे अपनी इस गंभीर समस्या से जुड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत करा चुके हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस मार्ग की दुर्दशा के बारे में रामलाल मीणा और हेमंत मीणा को भी पूरी जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जनता ने प्रशासन और संबंधित निर्माण विभागों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द इस क्षेत्र का निरीक्षण करें और यहां एक पक्की सड़क या पुलिया का निर्माण सुनिश्चित करें। उनका मानना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए और विकास के दावों को अब जमीनी हकीकत में बदलने की सख्त जरूरत है।

बुनियादी विकास के दावों पर खड़े होते सवाल

देशभर के ग्रामीण इलाकों में सड़कों और पुलों के जरिए विकास पहुंचाने के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन प्रतापगढ़ की यह तस्वीर उन सभी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। जब तक जिम्मेदार विभाग इस मामले का स्वतः संज्ञान नहीं लेते, तब तक इन मासूमों की यह जानलेवा रोजाना की जंग यूं ही जारी रहेगी। ग्रामीणों को अब भी उम्मीद है कि प्रशासनिक अमला और संबंधित अधिकारी इस गंभीर स्थिति को समझेंगे और जल्द से जल्द एक सुरक्षित मार्ग का निर्माण करवाकर इस इलाके के लोगों को राहत प्रदान करेंगे।

सवाल-जवाब

प्रतापगढ़ के किन गांवों के बच्चों को पेड़ के तने से रास्ता पार करना पड़ता है?
प्रतापगढ़ जिले के अरनोद उपखंड क्षेत्र में स्थित चिकली और उदिया खेड़ी गांव के बच्चों को यह जोखिम उठाना पड़ता है।
बच्चे किस वजह से पेड़ के तने का उपयोग करने को मजबूर हैं?
बारिश के कारण रास्ते पर भारी जलभराव हो जाने और पक्का रास्ता या पुलिया न होने के कारण बच्चे पेड़ के तने पर चलकर रास्ता पार करते हैं।
चिकली और उदिया खेड़ी के बीच कितनी आबादी रहती है?
इन दोनों गांवों के बीच लगभग 20 से 25 घरों की आबादी निवास करती है।
ग्रामीणों ने इस समस्या के बारे में किन नेताओं को बताया है?
ग्रामीणों ने रामलाल मीणा और हेमंत मीणा को इस समस्या की जानकारी दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·31 दिन पहले

प्रतापगढ़ के अरनोद उपखंड के चिकली और उदिया खेड़ी के बीच पानी भरे रास्ते पर बच्चों का पेड़ के तने से गुजरना प्रशासनिक और राजनीतिक उदासीनता की पराकाष्ठा है। सिर्फ 25 घरों की आबादी वाले इस क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। यदि इस मार्ग पर तत्काल पुलिया या पक्के रास्ते का निर्माण नहीं किया गया, तो यह लापरवाही किसी मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 दिन पहले

यह मामला सिर्फ स्थानीय उपेक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बच्चों के शिक्षा के अधिकार और जीवन सुरक्षा के मौलिक हक़ का उल्लंघन है। जब ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद जनप्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन संज्ञान नहीं ले रहे हैं, तो यह भारतीय दण्ड संहिता और आपदा प्रबंधन से जुड़े सुरक्षा मानकों के प्रति उनकी जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र ही इस मार्ग पर वैकल्पिक आवागमन या अस्थायी पुल के निर्माण के लिए एहतियाती कदम नहीं उठाए, तो किसी भी अनहोनी की स्थिति में पूरी प्रशासनिक मशीनरी कटघरे में होगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp