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प्रतिबंधित उग्रवादी गठबंधन ने मणिपुर में 15 अगस्त बंद बुलाया, तिरंगा अभियान से दूर रहने की अपीलमणिपुर
12 अग॰ 2026, 8:35 pm (30 दिन पहले)· 3

प्रतिबंधित उग्रवादी गठबंधन ने मणिपुर में 15 अगस्त बंद बुलाया, तिरंगा अभियान से दूर रहने की अपील

मणिपुर के छह प्रतिबंधित संगठनों के गठबंधन कॉर्कॉम ने 15 अगस्त को रात 1 बजे से शाम 6:30 बजे तक राज्यव्यापी बंद बुलाया है और लोगों से स्वतंत्रता दिवस समारोह व हर घर तिरंगा अभियान से दूर रहने को कहा है, साथ ही 1949 के विलय से पहले मणिपुर को संप्रभु राष्ट्र बताने का पुराना दावा दोहराया है।

मणिपुर के छह प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के गठबंधन ने राज्यभर में बंद बुलाया है और लोगों से 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के बहिष्कार की अपील की है, जिससे राष्ट्रीय पर्व से ठीक पहले राज्य में तनाव बढ़ गया है।

बंद कब से कब तक चलेगा

कोऑर्डिनेशन कमेटी, यानी कॉर्कॉम ने कहा है कि यह बंद 15 अगस्त को रात 1 बजे से शुरू होकर शाम 6:30 बजे तक चलेगा। इस दौरान मणिपुर में सार्वजनिक परिवहन और सामान्य कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है। मीडिया को जारी बयान में संगठन ने कहा कि मेडिकल इमरजेंसी, बिजली आपूर्ति, पानी की सप्लाई, फायर सर्विस, प्रेस और धार्मिक कार्यक्रमों को बंद के दायरे से बाहर रखा जाएगा, ताकि राज्य में बाकी गतिविधियां थमने के बावजूद ये जरूरी सेवाएं चलती रहें।

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कॉर्कॉम में शामिल छह संगठन

कॉर्कॉम असल में छह अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों की एक छतरी संस्था है। इसमें कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी), कांगलेइ यावोल कन्ना लुप (केवाईकेएल), पीपल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेइपाक (प्रीपाक), उसका अलग हुआ धड़ा प्रीपाक-प्रोग्रेसिव, रिवोल्यूशनरी पीपल्स फ्रंट (आरपीएफ) और यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) शामिल हैं। ये सभी संगठन कॉर्कॉम के बैनर तले मिलकर इस तरह के बयान और बंद जैसे कार्यक्रमों का आह्वान करते हैं।

15 अगस्त का विरोध क्यों

कॉर्कॉम का कहना है कि 15 अगस्त का मणिपुर के लिए कोई ऐतिहासिक या राजनीतिक महत्व नहीं है। संगठन अपने बयान में मणिपुर को लगातार कांगलेइपाक नाम से संबोधित करता है। इसने राज्य के नेताओं पर केंद्र सरकार की तारीफ करने का आरोप भी लगाया और लोगों से 9 से 17 अगस्त तक चल रहे हर घर तिरंगा अभियान से दूर रहने की अपील की।

दशकों पुराना संप्रभुता का दावा

बयान में कॉर्कॉम ने अपना वही पुराना राजनीतिक रुख दोहराया है कि 15 अक्टूबर 1949 के विलय समझौते से पहले मणिपुर एशिया में एक स्वतंत्र और संप्रभु इकाई के तौर पर मौजूद था। गठबंधन ने 1949 के इस विलय को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का कथित उल्लंघन बताया है। इसने आगे यह भी दावा किया कि मणिपुर में चल रहे संघर्ष को आंतरिक कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष माना जाना चाहिए।

दूसरे देशों से तुलना कर संप्रभुता साबित करने की कोशिश

मणिपुर को एक व्यावहारिक संप्रभु राष्ट्र साबित करने के लिए कॉर्कॉम ने राज्य की आबादी और भौगोलिक क्षेत्रफल की तुलना दूसरे देशों से की। संगठन का दावा है कि संयुक्त राष्ट्र के कई मौजूदा सदस्य देशों की आबादी और क्षेत्रफल मणिपुर की ऐतिहासिक सीमाओं से भी कम है। 18 अक्टूबर 1948 को हुए मणिपुर नेशनल असेंबली के पहले सत्र के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कॉर्कॉम ने दावा किया कि उस समय मणिपुर का ऐतिहासिक क्षेत्रफल 15,650 वर्ग मील, यानी करीब 40,530 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ था।

कानूनी दलीलें और भविष्य को लेकर चेतावनी

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता और भौगोलिक सीमाओं में बदलाव करने की कोशिश कर रही है। अपने इस दावे के समर्थन में कॉर्कॉम ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत उति पॉसिडेटिस जूरिस के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मिसालों का हवाला दिया, खासकर बुर्किना फासो और माली के बीच सीमा विवाद पर 1986 में आए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का जिक्र किया। गठबंधन ने चेतावनी दी कि अगर आत्मनिर्णय के अपने तथाकथित अधिकार की मांग को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो इलाके की मूल संस्कृतियां और आबादी धीरे-धीरे खत्म हो सकती हैं। उसने कहा कि इलाके के भविष्य को बचाने के लिए स्वतंत्रता का यह आंदोलन जरूरी है।

सवाल-जवाब

कॉर्कॉम क्या है?
कॉर्कॉम यानी कोऑर्डिनेशन कमेटी, मणिपुर के छह प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों की एक छतरी संस्था है।
बंद कब से कब तक रहेगा?
यह बंद 15 अगस्त को रात 1 बजे शुरू होकर उसी दिन शाम 6:30 बजे तक चलेगा।
बंद के दौरान कौन सी सेवाएं चालू रहेंगी?
मेडिकल इमरजेंसी, बिजली, पानी की सप्लाई, फायर सर्विस, प्रेस और धार्मिक कार्यक्रमों को बंद से छूट दी गई है।
कॉर्कॉम में कौन-कौन से संगठन शामिल हैं?
इसमें केसीपी, केवाईकेएल, प्रीपाक, प्रीपाक-प्रोग्रेसिव, आरपीएफ और यूएनएलएफ शामिल हैं।
कॉर्कॉम 15 अगस्त का विरोध क्यों कर रहा है?
संगठन का कहना है कि 15 अगस्त का मणिपुर के लिए कोई ऐतिहासिक या राजनीतिक महत्व नहीं है, जिसे वह कांगलेइपाक कहता है।
कॉर्कॉम का संप्रभुता को लेकर क्या दावा है?
संगठन का दावा है कि 15 अक्टूबर 1949 के विलय समझौते से पहले मणिपुर एशिया में एक स्वतंत्र और संप्रभु इकाई था।
कॉर्कॉम ने किन कानूनी दलीलों का सहारा लिया है?
संगठन ने उति पॉसिडेटिस जूरिस के सिद्धांत और बुर्किना फासो-माली सीमा विवाद पर 1986 के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का हवाला दिया।
संगठन ने लोगों से और क्या अपील की है?
कॉर्कॉम ने लोगों से 9 से 17 अगस्त तक चल रहे हर घर तिरंगा अभियान से दूर रहने को कहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

मणिपुर में कॉर्कॉम द्वारा स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार और बंद का आह्वान ऐसे समय में किया गया है जब राज्य पहले से ही गहरे जातीय तनाव और हिंसा से जूझ रहा है। इस तरह के उग्रवादी संगठनों के फरमान से सुरक्षा बलों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती और अधिक गंभीर हो जाएगी। 'हर घर तिरंगा' अभियान के दौरान इस प्रकार की बाधा डालने की कोशिशें प्रशासनिक और खुफिया एजेंसियों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होंगी, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा और सामान्य जनजीवन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

मणिपुर में कॉर्कॉम द्वारा स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार और बंद का आह्वान ऐसे समय में किया गया है जब राज्य पहले से ही गहरे जातीय तनाव और हिंसा से जूझ रहा है। इस तरह के उग्रवादी संगठनों के फरमान से सुरक्षा बलों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती और अधिक बढ़ जाएगी। हर घर तिरंगा अभियान के दौरान इस प्रकार की धमकियाँ यह दर्शाती हैं कि राज्य में प्रशासनिक नियंत्रण और शांति बहाली के लिए सुरक्षा और खुफिया तंत्र को कितनी मुस्तैदी से काम करना होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

वरिष्ठ संवाददाता रविकाश गुप्ता का मानना है कि कॉर्कॉम का यह बंद और बहिष्कार का आह्वान राज्य की पहले से नाज़ुक आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए एक बड़ा झटका है। परिवहन और व्यापार ठप होने से न केवल स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी डगमगाएगा। सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ इस तरह के अलगाववादी कदम पूर्वोत्तर क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास और बाज़ार स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·30 दिन पहले

मणिपुर में कॉर्कॉम द्वारा स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार और बंद का आह्वान ऐसे समय में किया गया है जब राज्य पहले से ही गहरे जातीय संघर्ष और तनाव से जूझ रहा है। इस तरह के उग्रवादी संगठनों के फरमान से सुरक्षा बलों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती और अधिक बढ़ जाएगी। 'हर घर तिरंगा' अभियान के बीच इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से आम नागरिकों की सुरक्षा और राज्य की संवेदनशीलता पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिस पर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर रहना अनिवार्य है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 दिन पहले

यह घटनाक्रम केवल एक पारंपरिक बंद का आह्वान नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की जटिल भू-राजनीतिक संवेदनशीलता और 1949 के विलय के पुराने विवादों को फिर से हवा देने का प्रयास है। इस तरह के उग्रवादी संगठनों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों या कानूनों के संदर्भ देकर संघर्ष को आंतरिक के बजाय बाहरी आयाम देने की कोशिशें सुरक्षा और कूटनीति दोनों मोर्चों पर गंभीर चिंता का विषय हैं। प्रशासनिक और खुफिया तंत्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आम नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित न हो और राज्य की संप्रभुता व अखंडता से जुड़े राष्ट्रीय पर्व पर अलगाववादी ताकतों के मंसूबों को प्रभावी ढंग से नाकाम किया जाए।

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