राजस्थान के पाली में सजता है बिना किराए वाला अनोखा बाजार, मात्र 5 रुपये से शुरू होती है कपड़ों की कीमतअश्लेशा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश: अगले 49 दिनों तक मेष, मिथुन समेत इन 7 राशियों की चमकेगी किस्मतबीकानेर में करीब 1 करोड़ रुपये की व्हेल की उल्टी जब्त, महाराष्ट्र से आए तीन तस्करों पर कसा शिकंजाफरीदाबाद में मिट्टी की गणेश मूर्तियां पानी में मिनटों में घुलती हैं और 70 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैंटाटा संस की अर्जी रिजर्व बैंक ने की खारिज, अब शेयर बाजार में दस्तक देने के अलावा नहीं बचा कोई रास्ताराजस्थान में डिजिटल स्क्रीन और उम्मीदों के भारी दबाव से घट रही बच्चों की एकाग्रता, मानसिक तनाव पर विशेषज्ञों की रायदेवघर में धान की बंपर पैदावार के लिए रोपाई के 20 से 25 दिनों बाद क्यों जरूरी है सही खाद का इस्तेमालदेहरादून में बैंक कर्मचारी पर 5 लाख की सुपारी देकर गोली चलवाने वाली पूर्व प्रेमिका और शूटर गिरफ्तारकिचन के चिपचिपे पंखे को नए जैसा चमकाने के लिए अपनाएं ये तीन बेहद आसान घरेलू नुस्खेगणेशोत्सव पर पाना है पारंपरिक और शाही लुक, तो आजमाएं पैठणी साड़ी के ये 5 बेहद खूबसूरत डिजाइन
पूर्व बर्धमान में दो झर्णा दास का एक जैसा आधार नंबर निकला मुसीबत की जड़, फिंगरप्रिंट से उड़े 27 हजार रुपयेपश्चिम बंगाल
6 सित॰ 2026, 4:54 pm (6 दिन पहले)· 2

पूर्व बर्धमान में दो झर्णा दास का एक जैसा आधार नंबर निकला मुसीबत की जड़, फिंगरप्रिंट से उड़े 27 हजार रुपये

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में दो झर्णा दास नाम की महिलाओं का आधार नंबर एक जैसा निकला, जिसके चलते एक के फिंगरप्रिंट से दूसरी के खाते से 27 हजार रुपये निकल गए। बाद में बैंक शाखा में दोनों पक्षों ने मिलकर रकम वापस कर मामला सुलझा लिया।

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां दो अलग-अलग महिलाओं का नाम भी एक जैसा निकला और उनका आधार नंबर भी अंक-दर-अंक एक समान बताया जा रहा है। नतीजा यह हुआ कि एक महिला खुद अपने आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट के सहारे बैंकिंग सेवा केंद्र गई, लेकिन रकम कट गई दूसरी महिला के खाते से, जिसका नाम भी संयोग से वही निकला। यह पूरा मामला खंडघोष ब्लॉक के बादुलिया गांव और रायना-1 ब्लॉक स्थित पलाशन इलाके से जुड़ा है, जहां दोनों महिलाओं का नाम झर्णा दास है।

कैसे पकड़ में आई यह गड़बड़ी

पलाशन गांव में रहने वाली झर्णा दास 10 जुलाई को अपना आधार कार्ड लेकर स्थानीय बाजार में मौजूद साबिर मोबाइल प्वाइंट के ग्राहक सेवा केंद्र यानी सीएसपी पहुंची थीं। वहां उन्होंने अपने आधार नंबर और फिंगरप्रिंट के इस्तेमाल से 10, 11 और 12 जुलाई के तीन दिनों में मिलाकर 27 हजार रुपये निकाले। इसके करीब तीन हफ्ते बाद, 3 अगस्त को भारतीय रिजर्व बैंक ने इसी सीएसपी का खाता अचानक निलंबित कर दिया। यह सूचना मिलते ही सीएसपी चलाने वाले शेख जाहिरुल हरकत में आ गए और उन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ-साथ अपनी कंपनी से भी संपर्क किया। पड़ताल में उन्हें पता चला कि उनके केंद्र के जरिए 27 हजार रुपये की एक गड़बड़ी हुई है, जिसके चलते खाता रोका गया।

ये भी पढ़ें

पहले तो निकासी सही ठहराई गई

इसके बाद जाहिरुल ने सीधे पलाशन की झर्णा दास से संपर्क साधा। महिला ने साफ कहा कि वह खुद सीएसपी पहुंची थीं और अपने ही आधार व फिंगरप्रिंट का उपयोग कर रकम निकाली थी, यानी किसी गलत इंसान को पैसा नहीं गया था। लेकिन पड़ताल यहीं नहीं रुकी। आगे की जांच में सामने आया कि ठीक इतनी ही यानी 27 हजार रुपये की रकम खंडघोष के बादुलिया गांव में रहने वाली एक और झर्णा दास के बैंक खाते से भी उसी सीएसपी के रिकॉर्ड में कटी दिख रही थी। एक ही ट्रांजैक्शन दो अलग-अलग महिलाओं के खातों से जुड़ गया, जिसने सबको चौंका दिया।

आधार नंबर मिलने से बढ़ी उलझन

असल गुत्थी सुलझाने के लिए जाहिरुल बादुलिया स्थित वेस्ट बंगाल ग्रामीण बैंक की शाखा पहुंचे। वहां छानबीन में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि बादुलिया वाली झर्णा दास और पलाशन वाली झर्णा दास, दोनों का बारह अंकों का आधार नंबर पूरी तरह एक जैसा है। सीएसपी यानी ग्राहक सेवा केंद्र वह जगह होती है जहां गांव-कस्बों में बैंकिंग एजेंट आधार और फिंगरप्रिंट के सहारे ग्राहकों को नकद निकासी व जमा जैसी सुविधाएं देते हैं, और यह पूरा सिस्टम इसी भरोसे पर टिका होता है कि हर व्यक्ति का आधार नंबर व फिंगरप्रिंट अनोखा होता है। एक ही नाम और एक जैसा आधार नंबर दो अलग-अलग नागरिकों के पास आखिर कैसे पहुंचा, इसे लेकर अब तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चिंता की बात यह रही कि बायोमेट्रिक सत्यापन जैसा सुरक्षा कवच मौजूद होने के बावजूद एक महिला के फिंगरप्रिंट पर दूसरी महिला के खाते से पैसा निकल गया, जिसने सीएसपी के जरिए होने वाले पूरे लेनदेन तंत्र पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।

बैंक पहुंचकर आपस में सुलझाया मामला

दोनों महिलाओं को जब यह पूरी स्थिति बताई गई, तो 3 सितंबर को दोनों झर्णा दास एक साथ वेस्ट बंगाल ग्रामीण बैंक की बादुलिया शाखा पहुंचीं। वहां आपसी बातचीत के बाद विवाद शांति से सुलझा लिया गया और पलाशन वाली झर्णा दास ने बादुलिया वाली झर्णा दास के खाते में 27 हजार रुपये वापस जमा करा दिए। फिलहाल पैसों का हिसाब तो बराबर हो गया है, लेकिन इलाके में यह चर्चा थमी नहीं है कि आखिर दो अलग-अलग महिलाओं को एक जैसा आधार नंबर कैसे मिल गया और बायोमेट्रिक मिलान के बावजूद यह चूक कैसे हो गई। इन सवालों का ठोस जवाब अब तक सामने नहीं आया है।

सवाल-जवाब

यह मामला कहां का है?
पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के खंडघोष ब्लॉक के बादुलिया गांव और रायना-1 ब्लॉक के पलाशन इलाके का है।
दोनों महिलाओं का नाम क्या है?
दोनों महिलाओं का नाम झर्णा दास है।
कितने रुपये की गड़बड़ी हुई?
कुल 27 हजार रुपये की।
पैसा किसके फिंगरप्रिंट से निकला और किसके खाते से कटा?
पलाशन की झर्णा दास ने अपने ही आधार और फिंगरप्रिंट से पैसे निकाले थे, लेकिन रकम बादुलिया की झर्णा दास के बैंक खाते से कटी।
गड़बड़ी का पता कैसे चला?
3 अगस्त को आरबीआई द्वारा संबंधित सीएसपी का खाता निलंबित किए जाने के बाद हुई जांच में यह सामने आया।
मामला आखिर कैसे सुलझा?
3 सितंबर को दोनों महिलाएं वेस्ट बंगाल ग्रामीण बैंक की बादुलिया शाखा में मिलीं और पलाशन की झर्णा दास ने बादुलिया की झर्णा दास के खाते में 27 हजार रुपये जमा कर दिए।
क्या अब भी कोई सवाल अनसुलझा है?
हां, दो अलग-अलग महिलाओं का आधार नंबर एक जैसा कैसे हुआ और बायोमेट्रिक सत्यापन के बावजूद गलत खाते से पैसे कैसे निकले, इसका जवाब अभी सामने नहीं आया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

यह मामला आधार प्रणाली की तकनीकी खामियों और बायोमेट्रिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ही आधार नंबर दो नागरिकों के पास होना और फिंगरप्रिंट मिलान के बावजूद दूसरे खाते से पैसे का कटना वित्तीय धोखाधड़ी और तकनीकी चूक का खतरनाक संकेत है। यदि इस तकनीकी विसंगति की गहन जाँच और डेटा ऑडिट नहीं हुआ, तो यह ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में जनता के विश्वास को बड़ा झटका दे सकता है और भविष्य में ऐसे मामलों से निपटना मुश्किल होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

यह घटना साबित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले ग्राहक सेवा केंद्र तकनीकी और सुरक्षा ऑडिट के अभाव में कितने संवेदनशील हो चुके हैं। जब तक विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और भारतीय रिजर्व बैंक ऐसे मामलों में डेटा क्लैश और डुप्लीकेट बायोमेट्रिक प्रविष्टि की त्वरित जांच नहीं करते, तब तक आधार-सक्षम भुगतान प्रणालियों की विश्वसनीयता पर ग्रामीण जनता का भरोसा डगमगाता रहेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR