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पूर्वी बेंगलुरु में बदहाल सड़कों से दो किलोमीटर का सफर बना दो घंटे का संकट, अभिभावकों ने उठाए सवालभारत
19 सित॰ 2026, 10:44 am (1 घंटे पहले)· 1

पूर्वी बेंगलुरु में बदहाल सड़कों से दो किलोमीटर का सफर बना दो घंटे का संकट, अभिभावकों ने उठाए सवाल

पूर्वी बेंगलुरु के वरथुर-गुंजुर मार्ग पर गड्ढों और अधूरे बुनियादी ढांचे के कारण स्कूली बच्चों को दो किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे लग रहे हैं, जिससे परेशान अभिभावकों ने सुरक्षित सड़कों की गुहार लगाई है।

पूर्वी बेंगलुरु के वरथुर-गुंजुर इलाके में रहने वाले परिवारों के लिए बच्चों को स्कूल भेजना रोजमर्रा का सबसे तनावपूर्ण संघर्ष बन चुका है। गड्ढों से भरी सड़कों, उड़ती धूल और बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था ने इस पूरे कॉरिडोर को जाम के भंवर में धकेल दिया है। कुछ ही मिनटों में तय होने वाली मामूली दूरियां अब कई घंटों की लंबी और थकाऊ परीक्षा बन चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बुनियादी नागरिक सुविधाओं की अनदेखी के चलते स्कूली बच्चों और कामकाजी लोगों की दिनचर्या बुरी तरह पटरी से उतर चुकी है।

दो किलोमीटर की दूरी और दो घंटे का थकाऊ सफर

इस बदहाली का सबसे दर्दनाक असर छोटे स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। एक स्थानीय अभिभावक ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उनकी बेटी की स्कूल बस को महज दो किलोमीटर का फासला तय करने में पूरे दो घंटे का समय लग गया। उन्होंने बताया कि अपनी बच्ची को बेहतर और सुरक्षित बचपन देने तथा स्कूल के नजदीक रहने के लिए उन्होंने भारी होम लोन लेकर यहां मकान खरीदा था। हर महीने लाखों रुपये का टैक्स चुकाने के बावजूद उनके परिवार को इस तरह की नारकीय स्थिति से जूझना पड़ रहा है।

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अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़े कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि आम करदाता हैं। वे केवल इतना चाहते हैं कि उनके बच्चों को स्कूल जाने और सुरक्षित घर लौटने के लिए एक साफ और सही सड़क मिले। दो किलोमीटर की यात्रा में दो घंटे का समय बर्बाद होना बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहा है। सुबह जल्दी उठने के बाद सड़कों पर घंटों फंसे रहने से बच्चे न केवल थक जाते हैं, बल्कि उनकी पढ़ाई और खेलकूद के जरूरी घंटे भी सड़कों पर धुल रहे हैं।

जानलेवा गड्ढों और हादसों का खौफ

वरथुर मुख्य मार्ग क्षेत्र की कई बड़ी सोसायटियों को व्हाइटफील्ड से जोड़ने वाला एक बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां से प्रतिदिन हजारों नागरिक और अनगिनत स्कूल बसें गुजरती हैं। इसके बावजूद कई वर्षों से यह पूरी सड़क उपेक्षा की शिकार है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, सड़कों पर बिखरी बजरी, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें और चारों तरफ फैला धूल का गुबार दुर्घटनाओं को खुला न्योता दे रहे हैं। बारिश के दिनों में जलभराव होने के कारण सड़कों के ये गड्ढे छिप जाते हैं और स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार इस इलाके में हादसे अब आम बात हो चुके हैं। सड़कों की जर्जर हालत के चलते स्कूल बस के पलटने जैसी भयानक घटनाएं भी सामने आई हैं। गड्ढों के कारण बाइक सवार संतुलन खोकर गिरते रहते हैं और एक दोपहिया चालक तो बाल-बाल मौत के मुंह से बाहर निकला। कई महिलाएं और राहगीर इन सड़कों पर फिसलकर गंभीर चोटों का शिकार हो चुके हैं। नागरिकों का कहना है कि इनमें से कई दुर्घटनाएं कभी मुख्य समाचारों का हिस्सा नहीं बन पातीं, लेकिन जमीनी स्तर पर हर दिन लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।

रुकी हुई परियोजनाएं और व्यापक समाधान की मांग

प्रशासन की ओर से मरम्मत के कई बार दावे किए गए, लेकिन जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। संकट की एक प्रमुख वजह मुथासंद्रा के पास एक पुल परियोजना का काम ठप होना है, जो लंबे समय से सरकारी मंजूरी के इंतजार में अटका पड़ा है। इसके अलावा कर्नाटक रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण की योजनाएं भी प्रशासनिक सुस्ती और कानूनी अड़चनों के चलते आगे नहीं बढ़ सकी हैं।

नागरिकों ने प्रशासन से दो-टूक मांग की है कि केवल औपचारिक तौर पर गड्ढों में मिट्टी भरने या कामचलाऊ पैचवर्क करने से काम नहीं चलेगा। जब तक वरथुर, गुंजुर और सरजापुर के पूरे सड़क नेटवर्क को व्यापक स्तर पर ठीक नहीं किया जाएगा, तब तक राहत मिलना संभव नहीं है। लगातार टैक्स भरने वाले शहरी मध्यम वर्ग का सवाल है कि हजारों लोगों के दैनिक आवागमन वाले इस प्रमुख संपर्क मार्ग को इतने सालों तक नजरअंदाज क्यों किया गया।

सवाल-जवाब

वरथुर-गुंजुर मार्ग पर सबसे बड़ी समस्या क्या है?
इस मार्ग पर गहरे गड्ढे, उड़ती धूल, टूटी स्ट्रीट लाइटें और भीषण ट्रैफिक जाम मुख्य समस्याएं हैं।
स्कूली बच्चों को कितनी दूरी तय करने में दो घंटे लग रहे हैं?
सड़क की बदहाली और जाम के कारण स्कूल बस को मात्र दो किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे लग रहे हैं।
इस मार्ग पर हाल ही में कौन से बड़े हादसे हुए हैं?
स्थानीय निवासियों के अनुसार यहां एक स्कूल बस पलटी, एक महिला गंभीर घायल हुई और गड्ढे की वजह से बाइक सवार बाल-बाल बचा।
इस क्षेत्र की कौन सी बुनियादी परियोजनाएं रुकी हुई हैं?
मुथासंद्रा के पास रुका हुआ पुल प्रोजेक्ट सरकारी मंजूरी के इंतजार में है, साथ ही केआरडीसीएल की फ्लाईओवर और चौड़ीकरण योजनाएं भी लटकी हुई हैं।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
नागरिकों ने मांग की है कि पैचवर्क के बजाय वरथुर, गुंजुर और सरजापुर के पूरे सड़क नेटवर्क को व्यापक रूप से ठीक किया जाए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·7 मिनट पहले

यह समस्या केवल बेंगलुरु के एक हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के तेजी से विकसित हो रहे शहरी केंद्रों में बुनियादी ढांचे की विफलता का एक बड़ा राष्ट्रीय उदाहरण है। भारी कर चुकाने वाले नागरिकों का इस तरह बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना प्रशासन और नीति-निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इन प्रमुख गलियारों का दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट शहरी अर्थव्यवस्था, नागरिकों के स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा के मोर्चे पर और विकराल रूप ले सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·29 मिनट पहले

वरथुर-गुंजुर मार्ग की यह बदहाली केवल एक स्थानीय नागरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह पूर्वी बेंगलुरु के उस रियल एस्टेट और तकनीकी गलियारे की बुनियादी अर्थव्यस्था पर सीधा प्रहार है जहाँ हज़ारों करोड़ का निवेश हुआ है और भारी कर चुकाने वाले पेशेवर रहते हैं। यदि समय रहते इस सड़क और बुनियादी ढांचे का व्यापक पुनरुद्धार नहीं हुआ, तो यह कॉरपोरेट उत्पादकता और तकनीकी हब के रूप में इस क्षेत्र के भविष्य पर भारी असर डालेगा।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·29 मिनट पहले

रविकेश की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह सिर्फ सड़क या ट्रैफिक की दिक्कत नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर हमारी लाइफस्टाइल और उस विजुअल अपील पर पड़ रहा है जो इस देश के शहरी सिनेमा और मीडिया प्रोजेक्ट्स में दर्शाई जाती है। जब सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले इस क्षेत्र में टेक प्रोफेशनल्स और उनके बच्चों को ऐसा नारकीय जीवन झेलना पड़े, तो यह हमारी टाउन प्लानिंग और गवर्नेंस की पोल खोल देता है। यदि स्थिति नहीं सुधरेगी, तो यह क्षेत्र अपनी चमक खो देगा और इसका असर बेंगलुरु की उस आधुनिक कॉरपोरेट छवि पर पड़ेगा जिसे पर्दे पर भी गर्व से दिखाया जाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·46 मिनट पहले

वरथुर-गुंजुर मार्ग की यह दुर्दशा केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा का सीधा उल्लंघन है। बुनियादी ढांचे की विफलता के कारण जिस तरह स्कूली बच्चों और करदाताओं को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है, वह स्थानीय प्रशासन की आपराधिक लापरवाही को उजागर करता है। यदि समय रहते इन गड्ढों और रुकी हुई परियोजनाओं पर कानूनी कार्रवाई या सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह क्षेत्र किसी बड़े और गंभीर हादसे का केंद्र बन सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·45 मिनट पहले

यह संकट केवल सड़क निर्माण की सुस्ती नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते शहरी केंद्रों में नीतिगत प्राथमिकताओं की गंभीर विफलता को दर्शाता है। जब आर्थिक विकास के इंजनों में बुनियादी ढांचे का इस तरह पतन होता है, तो यह शासन तंत्र की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि स्थानीय निकायों और शहरी योजनाकारों ने इस अनियोजित और उपेक्षित स्थिति को तुरंत नहीं सुधारा, तो यह असंतोष बड़े पैमाने पर नागरिक आंदोलनों का रूप ले सकता है, जिससे प्रशासन और सरकार दोनों की राजनीतिक साख पर सीधा असर पड़ेगा।

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