राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक निजी चिकित्सा संस्थान की भारी लापरवाही से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एसएल मार्ग पर स्थित आंच अस्पताल में एक मृतक के परिजनों को कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति का शव सौंप दिया गया। परिवार के लोग जब उस पार्थिव देह को लेकर लगभग बीस किलोमीटर दूर निकल गए, तब जाकर उन्हें इस गंभीर गलती का अहसास हुआ। इसके बाद परिजन भारी आक्रोश में वापस लौटे और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए विरोध जताना शुरू कर दिया।
बीस किलोमीटर आगे जाकर सामने आई पहचान की चूक
पीड़ित परिवार का कहना है कि मोर्चरी और अस्पताल कर्मचारियों ने शव सुपुर्द करते वक्त पहचान की बुनियादी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। वे शव को लेकर अंतिम संस्कार के लिए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन लगभग बीस किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जब पार्थिव शरीर की जांच हुई, तो पता चला कि यह उनके परिजन का शव नहीं था। किसी अनजान व्यक्ति का शव हाथ में देखकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए और तुरंत अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही के खिलाफ लामबंद हो गए।
अस्पताल गेट पर परिजनों का धरना प्रदर्शन
गलत शव सौंपे जाने की बात उजागर होते ही मृतक के रिश्तेदारों और परिचितों में तीव्र आक्रोश फैल गया। वे तुरंत अस्पताल पहुंचे और मुख्य द्वार के बाहर धरना देकर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि इतनी बड़ी भूल केवल एक सामान्य मानवीय चूक नहीं हो सकती, बल्कि यह अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का प्रमाण है। परिजनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच कराई जाए, साथ ही शवों के प्रबंधन और पहचान में कोताही बरतने वाले कर्मियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक गाड़ियों और बसों के पहुंचने से बढ़ा जमावड़ा
हंगामे और धरने की सूचना मिलते ही मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों की कई गाड़ियां और दो बसें भी पहुंचीं। अस्पताल परिसर के बाहर भारी तादाद में लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे वहां तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों पर जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।





















