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राघोपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान तेजस्वी यादव की बोट में रिसाव, निजी नाव के जरिए सुरक्षित बचाए गएबिहार
10 सित॰ 2026, 8:22 pm (14 दिन पहले)· 10

राघोपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान तेजस्वी यादव की बोट में रिसाव, निजी नाव के जरिए सुरक्षित बचाए गए

बिहार के हाजीपुर में राघोपुर विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने निकले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की एसडीआरएफ नाव की हवा निकल गई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उन्हें निजी नाव पर स्थानांतरित कर सुरक्षित स्थान पहुंचाया।

बिहार के हाजीपुर स्थित राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ आपदा का निरीक्षण करने निकले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक बड़ी दुर्घटना का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। बाढ़ प्रभावित तेरसिया क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्हें ले जा रही आधिकारिक आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की नाव में अचानक तकनीकी खराबी आ गई और बोट की हवा तेजी से निकलने लगी। जलस्तर बढ़ने के बीच बीच-मझधार में बोट की हवा निकलने से अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, मौके पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने तत्परता दिखाते हुए तेजस्वी यादव को एक निजी नाव पर सुरक्षित बैठाया और अनहोनी को टाल दिया।

महात्मा गांधी सेतु के पास घटी घटना

तय कार्यक्रम के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बाढ़ पीड़ितों की स्थिति जानने और राहत सामग्री बांटने के लिए निकले थे। प्रशासन की ओर से उनकी सुरक्षा और आवाजाही के लिए एसडीआरएफ की एक रबर बोट तैनात की गई थी। यह बोट महात्मा गांधी सेतु के पाया नंबर एक के पास से गंगा नदी के बहाव में आगे बढ़ी ही थी कि कुछ दूरी तय करने के बाद उसमें से हवा का रिसाव शुरू हो गया। बोट में सवार जवानों ने स्थिति को संभालते हुए हवा भरने वाले पंप से तुरंत हवा भरने का प्रयास किया, लेकिन बोट इतनी जर्जर थी कि हवा भरते ही दोबारा निकल जा रही थी।

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निजी नाव के सहारे पूरा किया दौरा

जब एसडीआरएफ की बोट में हवा भरना नामुमकिन हो गया और पानी में पलटने की आशंका बढ़ गई, तब तेजस्वी यादव के साथ चल रहे समर्थकों ने तुरंत एक निजी नाव को पास बुलाया। तेजस्वी यादव को तुरंत उस निजी नाव पर स्थानांतरित किया गया, जिसके बाद उन्होंने सुरक्षित तरीके से बाढ़ प्रभावित इलाकों का भ्रमण पूरा किया। इस दौरान उन्होंने जलमग्न गांवों में जाकर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की और उनके बीच खाद्य सामग्री तथा अन्य आवश्यक राहत सामान का वितरण भी किया।

सरकारी व्यवस्था पर तेजस्वी यादव का तीखा हमला

हादसे के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा उन्हें एक पुरानी और खटारा नाव उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह बोट की हवा निकल गई, ठीक उसी प्रकार राज्य सरकार के तमाम दावों और व्यवस्थाओं की हवा भी निकल चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि जब राज्य के नेता प्रतिपक्ष को इस तरह की खटारा नाव दी जा रही है, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोग दाने-दाने को तरस रहे हैं, राहत नावें गायब हैं और पूरी प्रशासनिक मशीनरी ठप पड़ी हुई है।

सवाल-जवाब

तेजस्वी यादव किस इलाके में बाढ़ का जायजा लेने निकले थे?
तेजस्वी यादव बिहार के हाजीपुर स्थित अपने विधानसभा क्षेत्र राघोपुर के तेरसिया बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा करने निकले थे।
बोट दुर्घटना कहां और कैसे हुई?
महात्मा गांधी सेतु के पाया नंबर एक से आगे बढ़ने पर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई एसडीआरएफ बोट की हवा निकलने लगी, जिससे बोट डूबने का खतरा पैदा हो गया।
तेजस्वी यादव को सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं ने कैसे बचाया?
एसडीआरएफ जवानों द्वारा बोट में दोबारा हवा भरने के प्रयास विफल होने पर तेजस्वी यादव को तुरंत पास की एक निजी नाव पर शिफ्ट कर दिया गया।
घटना के बाद तेजस्वी यादव ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
तेजस्वी यादव ने कहा कि पुरानी बोट की हवा निकलना सरकार की पूरी व्यवस्था चौपट होने का प्रतीक है, जहां लोगों को न खाना मिल रहा है और न ही सुरक्षित नावें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

यह घटना आपदा प्रबंधन और वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। एस.डी.आर.एफ. जैसी विशेष बल इकाई द्वारा जर्जर या लीक होती बोट का उपयोग करना न केवल एक बड़ी दुर्घटना को न्योता देना था, बल्कि यह आधिकारिक निरीक्षण में भारी चूक का प्रमाण भी है। भविष्य में ऐसी आपातकालीन यात्राओं के दौरान सुरक्षा उपकरणों की अनिवार्य पूर्व-जाँच और जवाबदेही तय करने के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) लागू की जानी चाहिए, ताकि किसी की जान जोखिम में न पड़े।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि प्रशासनिक मशीनरी ज़मीनी आपदा के वक्त कितनी लापरवाह हो सकती है। विपक्ष के नेता के साथ ऐसा होना सुरक्षा दावों की पोल खोलता है। अब यह देखना होगा कि इस चूक पर कौन सा विभाग जवाब देता है और क्या भविष्य के दौरों के लिए कोई सख्त एस.ओ.पी. तय होती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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