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राजस्थान का यह अनोखा गांव है पर्यटकों की पसंद, मोबाइल नेटवर्क और सड़क न होने के बाद भी पहुंचते हैं लोगराजस्थान
15 सित॰ 2026, 7:19 am (10 दिन पहले)· 0

राजस्थान का यह अनोखा गांव है पर्यटकों की पसंद, मोबाइल नेटवर्क और सड़क न होने के बाद भी पहुंचते हैं लोग

राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित उतरज गांव आधुनिक सुविधाओं से दूर होने के बावजूद अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ट्रैकिंग के रोमांच के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

राजस्थान के सिरोही जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच एक ऐसा अनोखा और दुर्गम गांव बसा है, जहां आज के समय में भी मोबाइल नेटवर्क और पक्की सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है। इन तमाम कठिनाइयों के बावजूद इस स्थान की प्राकृतिक छटा पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है, जो पहाड़ों के बीच पैदल सफर तय करके यहां पहुंचते हैं। इस खूबसूरत जगह का नाम उतरज गांव है, जो समुद्र तल से लगभग 1400 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और किसी स्वर्ग से कम नजर नहीं आता है। इसके चारों तरफ फैली हरियाली और अरावली की पर्वत श्रृंखलाएं इस जगह को खास बनाती हैं, जहां शहर के प्रदूषण और शोर-शराबे का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं मिलता है। माउंट आबू के स्थानीय टूरिस्ट एंड ट्रेवल गाइड चिंटू यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि उतरज गांव माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य के बेहद करीब स्थित एक दुर्गम क्षेत्र है।

दुर्गम रास्ते और पारंपरिक जीवनशैली

इस गांव तक पहुंचने के लिए सैलानियों को राजस्थान और अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी गुरुशिखर से लगभग 5 किलोमीटर तक की पहाड़ी पगडंडी पर पैदल चलना पड़ता है और कठिन ट्रैकिंग करनी होती है। बारिश के मौसम में यहां का मौसम और भी ज्यादा सुहाना हो जाता है, जब चारों तरफ छाई धुंध और कलकल करते झरने पर्यटकों को कई स्थानों पर देखने को मिलते हैं। इस छोटे से गांव में लगभग 40 से 60 परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका का मुख्य साधन आज भी पारंपरिक पशुपालन और खेती-किसानी ही है। यहां के अधिकांश घर आज भी कच्चे और केलूपोशनुमा बने हुए हैं, जो ग्रामीण संस्कृति की याद दिलाते हैं।

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चुनौतियों से भरा हुआ है स्थानीय जीवन

गुरुशिखर निवासी महेंद्र सिंह ने इस बारे में बताया कि प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर होने के बावजूद यहां के स्थानीय निवासियों का दैनिक जीवन भारी चुनौतियों के बीच गुजरता है। उतरज तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं बनाई जा सकी है, जिसके कारण कार या मोटरसाइकिल जैसे आधुनिक वाहन यहां तक नहीं लाए जा सकते हैं। इस गांव में आज से सिर्फ एक साल पहले पहला ट्रैक्टर पहुंचा था, जिसे लाने के लिए लोगों ने उसके अलग-अलग हिस्सों को अपने कंधों पर उठाकर यहां पहुंचाया था और फिर यहीं लाकर उसे असेंबल करवाया था। गांव के भीतर एक विद्यालय भी संचालित होता है, जहां स्थानीय बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक रोज गुरुशिखर से 5 किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करके आते हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई आपातकालीन स्थिति आने पर मरीजों को चारपाई पर लिटाकर 5 किलोमीटर दूर गुरुशिखर तक पैदल लाना पड़ता है।

शाम ढलते ही बढ़ जाता है बड़ा खतरा

इस गांव तक आने-जाने वाला मार्ग बेहद पथरीला, उबड़-खाबड़ और घने जंगलों के बीच से गुजरने वाली पगडंडियों पर आधारित है। ऐसे में सूरज ढलने के बाद इस रास्ते पर सफर करना अनजान लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि रास्ता भटकने की आशंका तो रहती ही है, साथ ही यह पूरा इलाका घना वन क्षेत्र होने के कारण भालू और लेपर्ड जैसे खतरनाक वन्यजीवों के हमले का डर भी बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पर्यटकों को हमेशा यह सलाह दी जाती है कि वे शाम के समय इस रास्ते पर आवाजाही करने से पूरी तरह बचें।

ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा है शेरगांव

इस गांव के पास दो बेहद प्रमुख मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ स्थित हैं, जिनके दर्शन करने के लिए पवित्र श्रावण मास के दौरान दूर-दराज के इलाकों से भक्त बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। उतरज गांव से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर एक और अत्यंत दुर्गम गांव शेरगांव बसा हुआ है। इतिहास के पन्नों में इस स्थान का विशेष महत्व है क्योंकि हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने अपना अज्ञातवास इसी दुर्गम क्षेत्र में बिताया था। यहां आज भी ईशान भेरू गुफा और प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं, जहां महान शासक महाराणा प्रताप ने अपने अज्ञातवास के समय में भक्ति और साधना की थी।

सवाल-जवाब

उतरज गांव कहां स्थित है?
उतरज गांव राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य के पास अरावली की पहाड़ियों में बसा है।
समुद्र तल से इस गांव की ऊंचाई कितनी है?
यह गांव समुद्र तल से लगभग 1400 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
इस गांव तक पहुंचने के लिए कितना पैदल चलना पड़ता है?
पर्यटकों और स्थानीय लोगों को गुरुशिखर से लगभग 5 किलोमीटर की पहाड़ी पगडंडी पर पैदल चलकर ट्रैकिंग करनी पड़ती है।
उतरज गांव की आबादी और मुख्य आजीविका क्या है?
इस गांव में लगभग 40 से 60 परिवार रहते हैं और उनकी आजीविका का मुख्य आधार पारंपरिक पशुपालन और खेती है।
शेरगांव का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
हल्दीघाटी युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने उतरज के पास स्थित शेरगांव में अपना अज्ञातवास बिताया था।
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