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राजस्थान के भीलवाड़ा में जलपोत की बनावट वाला स्वस्तिधाम मंदिर, भूमि उत्खनन में मिली थीं ऐतिहासिक प्रतिमाएंराजस्थान
19 सित॰ 2026, 12:49 pm (6 दिन पहले)· 0

राजस्थान के भीलवाड़ा में जलपोत की बनावट वाला स्वस्तिधाम मंदिर, भूमि उत्खनन में मिली थीं ऐतिहासिक प्रतिमाएं

राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित जहाजपुर में जलपोत के आकार में निर्मित मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र स्वस्तिधाम श्रद्धालुओं के बीच आस्था और अनूठी वास्तुकला का केंद्र बना हुआ है।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के अंतर्गत आने वाले जहाजपुर कस्बे में स्थापित मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र स्वस्तिधाम अपनी असाधारण स्थापत्य शैली के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। इस तीर्थ स्थल का पूरा ढांचा एक विशाल समुद्री जहाज के प्रतिरूप के रूप में तैयार किया गया है। मंदिर का मुख्य द्वार, हवादार खिड़कियां तथा बाहरी स्वरूप जलपोत जैसा आभास कराते हैं, जिसे निहारने और दर्शन करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

भूमि उत्खनन में मिली थीं दुर्लभ प्रतिमाएं

इस पावन स्थल की प्रसिद्धि के पीछे भूमि के गर्भ से ऐतिहासिक जिन प्रतिमाओं का प्रकट होना भी एक प्रमुख कारण है। इस क्षेत्र में मूर्तियों के मिलने की शुरुआत वर्ष 1984 से मानी जाती है। इसके पश्चात 23 अप्रैल 2013 को महावीर जयंती के पावन पर्व पर एक मकान के निर्माण हेतु नींव की खुदाई चल रही थी। उसी समय भूमि से 11 प्राचीन जिन प्रतिमाएं तथा पद्मासन मुद्रा में चार प्रतिमाएं सुरक्षित प्राप्त हुईं। इनमें तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथ की मुख्य प्रतिमा शामिल थी। श्रद्धालुओं में इस प्रतिमा के समय के साथ आभा और रंग बदलने को लेकर गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है।

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पंचकल्याणक प्रतिष्ठा और तलवार वास्तुकला

स्वस्तिधाम परिसर में 31 जनवरी से 7 फरवरी 2020 की अवधि के दौरान आचार्य ज्ञानसागर सागर के पावन सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ था। इस धार्मिक अनुष्ठान के संपन्न होने के उपरांत भगवान मुनि सुव्रतनाथ की प्रतिमा को गर्भगृह में पूर्ण विधि-विधान से प्रतिष्ठित किया गया। मंदिर की पहली मंजिल पर धवल संगमरमर के पत्थरों से निर्मित एक विशाल प्रार्थना कक्ष बनाया गया है। इस तल पर स्थित सहस्त्रकूट वेदी पर कुल 1008 जिन प्रतिमाएं विराजमान की गई हैं।

स्वर्ण सज्जा और शिखर तल की संरचना

मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्वर्ण नक्काशी से अलंकृत मुख्य वेदी स्थापित की गई है, जहां मूलनायक के रूप में भगवान मुनि सुव्रतनाथ विराजमान हैं। मुख्य वेदी के दाईं तरफ प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की वेदी है, जबकि बाईं तरफ भगवान महावीर स्वामी की वेदी स्थित है। संरचना के सबसे ऊपरी तल पर जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों को समर्पित 24 स्वतंत्र वेदियां निर्मित की गई हैं। इसके अतिरिक्त मुख्य प्रवेश द्वार के बाहरी परिसर में एक सुविशाल मानस्तंभ भी स्थापित किया गया है।

जहाजपुर तक आवागमन के साधन

सड़क परिवहन के माध्यम से जहाजपुर कस्बा भीलवाड़ा, शाहपुरा, देवली तथा कोटा शहरों से भली-भांति जुड़ा हुआ है। जिला मुख्यालय भीलवाड़ा और कोटा शहर दोनों से ही जहाजपुर की दूरी लगभग 100 किलोमीटर पड़ती है। रेल मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालु भीलवाड़ा या कोटा रेलवे स्टेशन तक ट्रेन से पहुंच सकते हैं, जहां से नियमित बस सेवा अथवा निजी टैक्सी किराए पर लेकर सीधे मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

सवाल-जवाब

स्वस्तिधाम मंदिर किस जिले और कस्बे में स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर कस्बे में स्थित है।
इस मंदिर की बनावट किस आकार में की गई है?
मंदिर की पूरी संरचना, मुख्य प्रवेश द्वार और खिड़कियां एक बड़े पानी के जहाज (जलपोत) के आकार में बनाई गई हैं।
जमीन से प्राचीन प्रतिमाएं कब और किस मौके पर निकली थीं?
यह प्रतिमाएं 23 अप्रैल 2013 को महावीर जयंती के दिन एक मकान की नींव खुदाई के दौरान मिली थीं।
खुदाई में कुल कितनी प्रतिमाएं प्राप्त हुई थीं?
खुदाई के दौरान 11 जिन प्रतिमाएं और चार पद्मासन मुद्रा वाली प्रतिमाएं मिली थीं, जिनमें भगवान मुनि सुव्रतनाथ प्रमुख थे।
मंदिर की पहली मंजिल पर स्थित सहस्त्रकूट वेदी में कितनी मूर्तियां हैं?
पहली मंजिल के सफेद पत्थरों से बने हॉल की सहस्त्रकूट वेदी में कुल 1008 प्रतिमाएं स्थापित हैं।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में कौन-से तीर्थंकर विराजमान हैं?
मुख्य वेदी पर मूलनायक भगवान मुनि सुव्रतनाथ हैं, जिनके दाईं ओर भगवान आदिनाथ और बाईं ओर भगवान महावीर विराजमान हैं।
मंदिर की सबसे ऊपरी मंजिल पर क्या स्थापित है?
सबसे ऊपरी तल पर सभी 24 तीर्थंकरों को समर्पित 24 स्वतंत्र वेदियां बनाई गई हैं।
निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन कौन-से हैं और दूरी कितनी है?
भीलवाड़ा और कोटा निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जहां से जहाजपुर की दूरी करीब 100 किलोमीटर है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·5 दिन पहले

यह रिपोर्ट स्वस्तिधाम मंदिर की अनूठी जलपोत वास्तुकला और पुरातात्विक महत्व को बखूबी उजागर करती है। हालांकि, शिक्षा और सांस्कृतिक पत्रकारिता के दृष्टिकोण से यह स्थल स्कूली और universitaria विद्यार्थियों के लिए भारतीय वास्तुकला, इतिहास और पुरातात्विक संरक्षण के व्यावहारिक अध्ययन का एक बेहतरीन केंद्र बन सकता है। ऐसे धरोहर स्थलों को शैक्षणिक पर्यटन से जोड़ना छात्रों में सांस्कृतिक चेतना जगाने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित स्वस्तिधाम मंदिर की वास्तुकला और भूमि उत्खनन से प्राप्त दुर्लभ प्रतिमाओं का यह प्रसंग धार्मिक पर्यटन के आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव को रेखांकित करता है। जहाजपुर जैसे क्षेत्रों में इस प्रकार के अनूठे तीर्थ स्थलों के विकास से स्थानीय आतिथ्य सत्कार, परिवहन और एमएसएमई क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ यह संरचना ग्रामीण और टियर-टू अर्थव्यवस्था में टूरिज्म ड्रिवेन ग्रोथ का एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिससे दीर्घकालिक क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह परियोजना दर्शाती है कि कैसे अनूठी वास्तुकला और धार्मिक विरासत का संयोजन दूरदराज के क्षेत्रों में यात्रियों को आकर्षित कर सकता है। जब जहाजपुर जैसे स्थानों पर तीर्थाटन बढ़ता है, तो स्थानीय बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। ऐसे निवेश क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने और टियर-टू तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

भीलवाड़ा के इस स्वस्तिधाम मंदिर की वास्तुकला और उत्खनन में मिली प्राचीन मूर्तियों का मामला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, पुरातात्विक महत्व के ऐसे स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने से कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस तरह के संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक क्षेत्रों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

भीलवाड़ा के इस जहाजपुर स्थित स्वस्तिधाम मंदिर जैसे अनूठे स्थापत्य और पुरातात्विक महत्व के स्थलों पर देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालना प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा है। पर्यटन और धार्मिक आस्था के ऐसे केंद्रों पर बेहतर कनेक्टिविटी के साथ ही स्थायी पार्किंग, आपदा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के लिए स्मार्ट पुलिसिंग की रूपरेखा तैयार करना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले दबाव को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

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