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राजस्थान के चूरू में पकड़े गए श्रीनगर जेल से फरार 2 आरोपी, ग्रामीणों की सूचना पर राजगढ़ पुलिस की कार्रवाईराजस्थान
28 अग॰ 2026, 12:10 pm (28 दिन पहले)· 4

राजस्थान के चूरू में पकड़े गए श्रीनगर जेल से फरार 2 आरोपी, ग्रामीणों की सूचना पर राजगढ़ पुलिस की कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर सेंट्रल जेल की चारदीवारी फांदकर भागे दो आरोपी राजस्थान के चूरू जिले में खेतों में सोते पाए गए। ग्रामीणों की आशंका पर पहुंची राजगढ़ पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

राजस्थान के चूरू जिले के राजगढ़ थाना क्षेत्र में ग्रामीणों की सजगता से एक बड़ा मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर सेंट्रल जेल की सुरक्षा में सेंध लगाकर फरार हुए दो खतरनाक कैदियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी एक खेत में सो रहे थे, जब स्थानीय निवासियों को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं और उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचित कर दिया।

जेल में दोस्ती के बाद स्वतंत्रता दिवस पर बनाई भागने की योजना

पकड़े गए कैदियों की पहचान फरमान और मुख्तार गुर्जर के रूप में हुई है। फरमान मूल रूप से राजस्थान के चूरू जिले के राजगढ़ का निवासी है, जबकि मुख्तार गुर्जर जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है। दोनों आरोपी श्रीनगर की हाई सिक्योरिटी सेंट्रल जेल में संगीन मामलों के तहत बंद थे। उन पर दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हैं और वे न्यायिक हिरासत में थे।

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जेल के अंदर रहने के दौरान दोनों के बीच गहरी जान-पहचान हो गई। इसके बाद दोनों ने जेल तोड़कर भागने की साजिश रची। स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के दौरान जेल परिसर में चल रही चहल-पहल का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने एक रस्सी और बांस के पोल का इंतजाम किया। 23 अगस्त की सुबह लगभग 6 बजे, दोनों आरोपियों ने पोल और रस्सी की मदद से जेल की ऊंची दीवार को फांद लिया और वहां से रफूचक्कर हो गए।

भागने के तुरंत बाद महिला से छीने आठ हजार रुपये

श्रीनगर सेंट्रल जेल से फरार होने के बाद दोनों के पास आगे का सफर तय करने के लिए पैसे नहीं थे। भागते समय उन्होंने जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में ही एक महिला को निशाना बनाया और उससे 8,000 रुपये की लूटपाट की। इन पैसों का इस्तेमाल करके उन्होंने अंतरराज्यीय सीमाओं को पार किया और पुलिस की नजरों से बचते हुए राजस्थान पहुंचने का रास्ता चुना।

चुंकी फरमान चूरू जिले के राजगढ़ का ही रहने वाला था, इसलिए दोनों ने सोचा कि वहां के ग्रामीण इलाकों में छिपना आसान होगा। वे कश्मीर से सीधा राजगढ़ पहुंचे और गांव के बाहरी इलाके में स्थित एक खेत में ठिकाना बना लिया।

खेत में सो रहे थे आरोपी, ग्रामीणों ने चोर समझकर पुलिस बुलाई

26 अगस्त की सुबह राजगढ़ थाने के थानाधिकारी (एसएचओ) को स्थानीय ग्रामीणों से सूचना प्राप्त हुई। ग्रामीणों ने बताया कि उनके खेतों में दो अनजान व्यक्ति सो रहे हैं, जिनकी हरकतें संदेहास्पद लग रही हैं और वे कोई चोर हो सकते हैं। इस सूचना पर राजगढ़ पुलिस स्टेशन से एक दल तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया।

पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लिया। प्राथमिक स्तर पर कोई ठोस दस्तावेज न मिलने और संदिग्ध लगने पर पुलिस ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लिया और थाने ले आई।

पूछताछ में खुला राज, जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंपी जा रही कस्टडी

थाने में जब पुलिस अधिकारियों ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की, तो उन्होंने अपनी असली पहचान उजागर की। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे वही कैदी हैं जो 23 अगस्त को श्रीनगर की अति सुरक्षित जेल से फरार हुए थे।

राजगढ़ पुलिस ने तुरंत इस बात का सत्यापन करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क साधा। वहां से आए आधिकारिक संदेश में जेल ब्रेक की पुष्टि की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक विशेष टीम दोनों आरोपियों की कस्टडी लेने के लिए राजस्थान के लिए रवाना हो चुकी है। कानूनी औपचारिकताओं के बाद दोनों को वापस श्रीनगर ले जाया जाएगा।

सवाल-जवाब

श्रीनगर सेंट्रल जेल से कैदी कब और कैसे भागे थे?
आरोपी 23 अगस्त की सुबह करीब 6 बजे स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के दौरान जुटाई गई रस्सी और पोल की मदद से जेल की चारदीवारी फांदकर भागे थे।
पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान क्या है?
पकड़े गए आरोपियों में से एक फरमान है जो राजगढ़ (चूरू, राजस्थान) का निवासी है, और दूसरा मुख्तार गुर्जर है जो जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है।
कैदियों को राजस्थान के चूरू में कैसे पकड़ा गया?
राजगढ़ के खेतों में दो अनजान व्यक्तियों को सोते देखकर ग्रामीणों ने चोर होने की आशंका में पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद राजगढ़ पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
दोनों कैदियों पर कौन से गंभीर आरोप दर्ज हैं?
दोनों आरोपी पॉक्सो अधिनियम और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के तहत श्रीनगर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद थे।
जेल से भागने के बाद कैदियों ने क्या अपराध किया था?
भागने के बाद पैसे न होने के कारण आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर में ही एक महिला से 8,000 रुपये की लूटपाट की थी।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

यह घटना जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, खासकर जब स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों जैसी व्यस्तता के दौरान उच्च सुरक्षा वाली जेल से कैदियों का भाग निकलना प्रशासनिक चूक को उजागर करता है। अंतरराज्यीय सीमाओं को पार कर राजस्थान पहुँचना पुलिस तंत्र के बीच समन्वय की कमी को दर्शाता है। अब आगे यह देखना होगा कि दोनों राज्यों की पुलिस मिलकर जेल की सुरक्षा में हुई इस बड़ी चूक और इसमें किसी अंदरूनी मदद की क्या गहराई से जाँच करती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

यह घटना न केवल श्रीनगर उच्च सुरक्षा जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध को दर्शाती है, बल्कि अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की कमियों को भी उजागर करती है। आरोपियों का जेल की दीवार फांदकर कश्मीर से राजस्थान तक का सफर तय करना यह साबित करता है कि हमारी सीमाओं और अंतरराज्यीय मार्गों पर निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जेलों के भीतर तकनीकी निगरानी बढ़ाने और राज्यों के बीच खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान की बेहद जरूरत है।

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