उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में स्थित शंभूपुर गांव से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां घर के भीतर चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुए हिंसक टकराव में पांच लोगों की जान चली गई। अरविंद नामक व्यक्ति के घर में कथित तौर पर भूत भगाने और उपद्रव शांत करने के उद्देश्य से चार दिनों से लगातार पूजा का दौर जारी था। मंगलवार की शाम जब यह अनुष्ठान चल रहा था, तब अरविंद ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे तुरंत बंद करने का दबाव बनाया। जब घर में मौजूद लोगों और पुरोहितों ने उसकी बात अनसुनी कर दी, तो आक्रोश में आकर अरविंद ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस अंधाधुंध गोलीबारी में दो पुरोहित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्र मौके पर ही ढेर हो गए। इसके बाद अरविंद ने अपने भाई की मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए अपनी पत्नी पर भी गोली चला दी और अपने बेटे को भी निशाना बनाया। घटना की सूचना पाकर जब पुलिस टीम पहुंची, तो जवाबी कार्रवाई में अरविंद भी मारा गया।
आजमगढ़ हत्याकांड और परिवार में कलह की पृष्ठभूमि
इस पूरे खूनी संघर्ष के पीछे परिवार में वर्षों से चल रही अशांति और अंधविश्वास की परतें दिखाई दे रही हैं। अरविंद की मां के अनुसार, घर के भीतर महामृत्युंजय मंत्र का पाठ चल रहा था। वहीं गांव के पड़ोसियों का कहना है कि लगभग 8 साल पहले अरविंद के भाई की हत्या कर दी गई थी। उस घटना के बाद से ही परिवार में लगातार तनाव और मानसिक अशांति का माहौल बना हुआ था। परिजनों के मन में यह आशंका घर कर गई थी कि मृत भाई की आत्मा परिवार को परेशान कर रही है और घर की समस्याओं के पीछे उसी का साया है। इसी वहम और अशांति से मुक्ति पाने के लिए घर में नारायण बलि और अनुष्ठान कराए जा रहे थे। हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी, लेकिन पूजा और आत्मा की शांति के नाम पर शुरू हुआ यह प्रयास पांच लोगों की मौत के भीषण अंत में बदल गया।
बुराड़ी कांड जब अंधविश्वास ने ली थी 11 सदस्यों की जान
आजमगढ़ की घटना ने देश में अंधविश्वास और पराशक्तियों के फेर में घटी पुरानी भयावह घटनाओं की यादें ताजा कर दी हैं। साल 2018 में देश की राजधानी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में स्थित संत नगर में ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला सामूहिक आत्महत्या का मामला सामने आया था। वहां भाटिया परिवार के 11 सदस्यों के शव संदिग्ध हालत में उनके मकान से बरामद हुए थे। घर के मुख्य बड़े हॉल में लोहे की छत वाली ग्रिल से 10 शव फंदे पर लटके पाए गए थे, जिनके हाथ पीछे बंधे थे और आंखों पर पट्टियां बंधी थीं। वहीं परिवार की 77 वर्षीय बुजुर्ग महिला नारायण देवी का शव दूसरे कमरे में फर्श पर पड़ा मिला था।
पुलिसिया छानबीन के दौरान उस मकान से हस्तलिखित डायरियां बरामद हुई थीं, जिनमें मोक्ष हासिल करने, आत्मा से संपर्क साधने और अजीबोगरीब तांत्रिक क्रियाओं से जुड़े विस्तृत निर्देश दर्ज थे। जांच में खुलासा हुआ था कि परिवार का छोटा बेटा ललित यह विश्वास करता था कि उसके दिवंगत पिता गोपालदास की आत्मा उसके शरीर में प्रवेश करती है। वह सपने में अपने पिता से संवाद करने का दावा करता था। उसी काल्पनिक निर्देश और मोक्ष की लालसा में पूरे परिवार ने एक साथ फंदे पर लटकने का आत्मघाती कदम उठा लिया था।
काशी में मोक्ष और अंधविश्वास के चलते सामूहिक आत्महत्याएं
धार्मिक नगरी काशी यानी वाराणसी में भी मोक्ष और अंधविश्वास की आड़ में जान गंवाने के मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2023 में वाराणसी के काशी कैलाश भवन के कमरा नंबर S6 में आंध्र प्रदेश से आए एक ही परिवार के चार सदस्यों ने सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली थी। मरने वालों में 50 वर्षीय कोंडा बाबू, उनकी पत्नी लावण्या और उनके दो बेटे राजेश व जयराज शामिल थे।
जांच पड़ताल में यह तथ्य सामने आया था कि परिवार ने आत्महत्या में इस्तेमाल होने वाली सामग्री स्थानीय बाजार से ही खरीदी थी। खुदकुशी करने से ठीक पहले उस कमरे में विधिवत पूजा-अर्चना की गई थी। मौके से कुमकुम की शीशी, पॉलीथिन में रखी रोली और चंदन जैसी पूजन सामग्री बरामद हुई थी। चारों मृतकों के माथे पर तिलक लगा था और उनकी कलाई पर नया कलावा बंधा हुआ था। कमरे में सबसे पहले माता-पिता और छोटे बेटे ने जान दी थी, जिसके बाद बड़े बेटे राजेश ने खुद को समाप्त कर लिया था। हालांकि कमरे से मिले सुसाइड नोट में भारी कर्ज का भी जिक्र मिला था, लेकिन अनुष्ठान की मौजूदगी ने इस कदम को रहस्यमय बना दिया था। इससे पहले वर्ष 2012 में भी काशी में आंध्र प्रदेश की ही एक महिला ने अपनी बेटी के साथ मोक्ष की चाह में आत्महत्या कर ली थी।
गरुड़ पुराण और धार्मिक ग्रंथों में मोक्ष व अकाल मृत्यु की व्याख्या
सनातन परंपरा के पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में मानव जीवन को जन्म और मरण के चक्र से मुक्त करने के लिए मोक्ष को सर्वोच्च लक्ष्य बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार मोक्ष की प्राप्ति केवल ईश्वर की अनन्य भक्ति, सत्कर्म और प्राकृतिक आयु पूर्ण होने पर ही संभव है। जब कोई मनुष्य आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाता है, तो उसे कभी मोक्ष प्राप्त नहीं होता। आत्महत्या को आध्यात्मिक दृष्टि से महापाप माना गया है, क्योंकि यह जीवन चक्र को कृत्रिम रूप से बीच में ही समाप्त कर देता है।
गरुड़ पुराण के सिद्धांतों के मुताबिक, जो व्यक्ति अकाल मृत्यु यानी समय से पहले असमय मौत का शिकार होते हैं, उनकी आत्मा को सीधे सद्गति नहीं मिलती। सांसारिक इच्छाएं, वासनाएं और जिम्मेदारियां अधूरी रह जाने के कारण जीवात्मा सूक्ष्म शरीर में भटकती रहती है और उसे भूत, प्रेत या पिशाच योनि में रहना पड़ता है। चूंकि उनकी प्राकृतिक आयु की अवधि पूरी नहीं हुई होती, इसलिए उनका शरीर छूटने के बाद भी वे अशांत अवस्था में भटकते रहते हैं।
वैदिक पद्धति बनाम तंत्र-मंत्र का मायाजाल
अकाल मृत्यु और अतृप्त आत्माओं के संदर्भ में ज्योतिषाचार्य चंद्रकांत सारस्वत का कहना है कि असमय मृत्यु को प्राप्त होने वाली आत्माओं को भूत, प्रेत और पिशाच योनि से मुक्ति दिलाने के लिए वैदिक शास्त्रों में स्पष्ट विधान मौजूद हैं। इसके लिए सनातन परंपरा में अंतिम संस्कार के पश्चात विधि-विधान से श्राद्ध, पिंडदान और पितृ पक्ष के दौरान तर्पण किए जाते हैं। जिन आत्माओं को सामान्य क्रियाओं से शांति नहीं मिलती, उनके लिए वैदिक ग्रंथों में नारायण बलि और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे विशेष अनुष्ठान बताए गए हैं।
ज्योतिषाचार्य चंद्रकांत सारस्वत के अनुसार, वैदिक प्रक्रियाएं संयम, नियम और समय की मांग करती हैं। समस्या तब उत्पन्न होती है जब लोग जल्दबाजी और लालच के वशीभूत होकर तांत्रिकों और पाखंडियों के चंगुल में फंस जाते हैं। तंत्र-मंत्र का दावा करने वाले ढोंगी लोग पीड़ित परिवारों की मानसिक लाचारी और भय का लाभ उठाकर भारी धन ऐंठते हैं। त्वरित समाधान और समस्याओं से तत्काल मुक्ति पाने की चाह में लोग ऐसे अनैतिक रास्तों पर कदम बढ़ा देते हैं। ज्योतिषाचार्य स्पष्ट करते हैं कि वैदिक साधना जहां ईश्वर और देवी-देवताओं को भक्ति और समर्पण से प्रसन्न करने का मार्ग है, वहीं तंत्र साधना में शक्तियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध विवश करने का प्रयास किया जाता है। प्राचीन काल में लोक कल्याण के लिए अपनाई जाने वाली विद्याएं आज स्वार्थ और अंधविश्वास का साधन बन चुकी हैं, जो परिवारों को विनाश की ओर धकेल रही हैं।



















