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राजस्थान के झालरापाटन में बड़ा तकनीकी हादसा, कालीसिंध पावर प्लांट की पाइप फटने से 600 मेगावाट बिजली उत्पादन ठपराजस्थान
28 अग॰ 2026, 12:49 pm (28 दिन पहले)· 4

राजस्थान के झालरापाटन में बड़ा तकनीकी हादसा, कालीसिंध पावर प्लांट की पाइप फटने से 600 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप

राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की पहली इकाई में स्टीम लाइन फटने से 600 मेगावाट बिजली का उत्पादन अचानक बंद हो गया है। राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है।

राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र में स्थित कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट में एक बड़ा तकनीकी हादसा सामने आया है। संयंत्र की पहली इकाई की स्टीम पाइप लाइन में अचानक हुए जोरदार धमाके के कारण पाइप टूट गई, जिससे भारी मात्रा में उच्च दबाव वाली भाप का रिसाव होने लगा। इस अप्रत्याशित तकनीकी खराबी के तुरंत बाद 600 मेगावाट क्षमता वाली पहली यूनिट को बंद करना पड़ा। इस घटना के कारण राज्य और नेशनल ग्रिड को मिलने वाली बिजली आपूर्ति में सीधे तौर पर 600 मेगावाट की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

हादसे के दौरान सुरक्षित बचे कामगार

यह दुर्घटना गुरुवार के दिन उस समय हुई जब स्टीम लाइन के भीतर भाप का दबाव तय सीमा से काफी अधिक बढ़ गया था। अत्यधिक दबाव के कारण पाइप लाइन इसे सहन नहीं कर सकी और धमाके के साथ फट गई। अचानक हुए इस हादसे से संयंत्र परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि दुर्घटना के वक्त आसपास मौजूद सभी कर्मचारी और श्रमिक बाल-बाल बच गए और किसी को भी शारीरिक चोट नहीं आई। सुरक्षा के लिहाज से तुरंत प्रभाव से पहली यूनिट की परिचालन प्रक्रिया को रोक दिया गया ताकि रिसाव पर पूर्ण नियंत्रण पाया जा सके।

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कोयला गुणवत्ता और मेंटेनेंस में अनदेखी के संकेत

संयंत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार इस स्टीम लाइन ब्लास्ट के पीछे कुछ तकनीकी और रखरखाव संबंधी खामियां मुख्य वजह मानी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में थर्मल प्लांट को आपूर्ति किया जा रहा कोयला अच्छी गुणवत्ता का नहीं था। इसके अतिरिक्त, समय पर बॉयलर और उत्पादन इकाइयों का नियमित शटडाउन लेकर आवश्यक मेंटेनेंस न किया जाना भी इस बड़े रिसाव का प्रमुख कारण बना है। नियमित जांच और रखरखाव में देरी के चलते पाइप लाइन अत्यधिक दबाव को संभालने में असमर्थ रही।

उच्च अधिकारियों का दौरा और वार्षिक मरम्मत अभियान

घटना की सूचना मिलते ही राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के डायरेक्टर केएल मीणा स्थिति का जायजा लेने के लिए सीधे उंडल गांव स्थित कालीसिंध थर्मल प्लांट पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद तकनीकी कर्मचारियों, इंजीनियरों और श्रमिकों से दुर्घटना के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। निरीक्षण के बाद अब पहली यूनिट का वार्षिक मरम्मत अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है। थर्मल प्लांट के इंजीनियरों की टीम क्षति पहुंचे हिस्सों को दुरुस्त करने और लाइन को दोबारा क्रियाशील बनाने में जुट गई है।

बिजली उत्पादन पर असर और वर्तमान स्थिति

कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट कुल 1200 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाला एक महत्वपूर्ण बिजली केंद्र है, जहां 600-600 मेगावाट की दो अलग-अलग इकाइयां स्थापित हैं। यहां बनने वाली बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड के साथ-साथ देश और प्रदेश के प्रमुख पावर सेंटरों तक पहुंचाया जाता है। पहली यूनिट के बंद होने से फिलहाल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता आधी रह गई है। जब तक पहली इकाई की मरम्मत पूरी नहीं हो जाती, तब तक केवल 600 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी यूनिट से ही विद्युत उत्पादन जारी रहेगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि मरम्मत का काम जल्द पूरा कर उत्पादन फिर से बहाल कर लिया जाएगा।

सवाल-जवाब

कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट कहां स्थित है?
यह प्लांट राजस्थान के झालावाड़ जिले में झालरापाटन क्षेत्र के उंडल गांव में स्थित है।
पावर प्लांट में किस वजह से हादसा हुआ?
पहली यूनिट की स्टीम लाइन में अत्यधिक भाप का दबाव बढ़ने से ब्लास्ट हो गया और पाइप लाइन टूट गई।
इस हादसे से बिजली उत्पादन पर कितना असर पड़ा है?
प्लांट की 600 मेगावाट क्षमता वाली पहली यूनिट बंद हो गई है, जिससे बिजली का उत्पादन घटकर आधा रह गया है।
क्या विस्फोट के दौरान कोई श्रमिक घायल हुआ?
हादसे के समय आसपास मौजूद सभी कर्मचारी और श्रमिक सुरक्षित रहे तथा किसी को भी चोट नहीं आई।
प्लांट की कुल बिजली उत्पादन क्षमता कितनी है?
कालीसिंध थर्मल प्लांट में 600-600 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित हैं, जिनकी कुल क्षमता 1200 मेगावाट है।
घटना के बाद बिजली निगम ने क्या कदम उठाए हैं?
राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के डायरेक्टर केएल मीणा ने संयंत्र का निरीक्षण कर पहली यूनिट की वार्षिक मरम्मत का काम शुरू कराया है।
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