तुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हालचीन और अमेरिका के बीच टकराव से दोनों को नुकसान, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर दिया जोरगाजा युद्ध में पीछे न हटने के पीछे नेतन्याहू ने सुनाई 1967 की दास्तान, भाई के वो 5 शब्द बने इजरायल की सैन्य नीतिसऊदी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद तेल की कीमतों में उछाल, तुर्किये और पाकिस्तान के साथ आपात बैठकसिंह राशिफल 25 सितंबर 2026: साझेदारी और कागजी सौदों में रखें स्पष्टता, रिश्तों में पुरानी बातें न दोहराएंकेदारनाथ में पांच महीने के भीतर 50 मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा, आरटीआई में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
राजस्थान के पाली में जेठामुला की 80 साल पुरानी कचौरी का अनोखा स्वादराजस्थान
16 सित॰ 2026, 11:33 am (9 दिन पहले)· 0

राजस्थान के पाली में जेठामुला की 80 साल पुरानी कचौरी का अनोखा स्वाद

राजस्थान के पाली के सर्राफा बाजार में पिछले 80 साल से जेठामुला की खस्ता कचौरी अपनी अनूठी शैली और चटनी के तड़के के लिए फूड लवर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है।

यदि आप जायकेदार और तीखे व्यंजनों के शौकीन हैं, तो राजस्थान का पाली शहर आपके लिए एक बेहतरीन जगह साबित हो सकता है। यहां के सर्राफा बाजार में मिलने वाली जेठामुला की खस्ता कचौरी अपनी खास पहचान रखती है। बीते 80 से अधिक वर्षों से यह ऐतिहासिक दुकान स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसे परोसने का पारंपरिक और अनूठा अंदाज है, जो खाने वालों को बार-बार यहां खींच लाता है।

परंपरागत स्वाद और अनूठा तरीका

पाली अपनी समृद्ध संस्कृति के साथ-साथ अपने खास व्यंजनों के लिए भी जाना जाता है। सर्राफा बाजार के भीतर स्थित जेठामुला जी की दुकान की यह कचौरी अपने अनूठे स्वाद से हर किसी का दिल जीत लेती है। इस दुकान की बनावट बेहद छोटी है, जहां अंदर केवल एक ही व्यक्ति के बैठने की जगह होती है। इसके बावजूद सुबह होते ही यहां खाने के शौकीनों की भारी भीड़ जमा हो जाती है और लोग कचौरी का लुत्फ उठाने के लिए घेरा बना लेते हैं।

ये भी पढ़ें

चटनी का जादुई तड़का और आकार

देखने में यह कचौरी रोहट की मशहूर कचौरी जैसी लगती है, लेकिन इसका स्वाद पूरी तरह भिन्न है। इसकी सबसे खास बात यह है कि कचौरी के ठीक बीच में एक छोटा-सा छेद किया जाता है। इसी होल के अंदर दुकान की खास तीखी और मीठी चटनी डाली जाती है। जैसे ही यह चटनी अंदर जाती है, कचौरी का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है और इसका क्रंचीपन खाने के अनुभव को और भी शानदार बना देता है।

स्वाद ऐसा कि मन न भरे

इस कुरकुरी कचौरी और स्पेशल चटनी का मेल इतना लाजवाब होता है कि ग्राहक एक कचौरी खाकर संतुष्ट नहीं होते, बल्कि तुरंत दूसरी कचौरी का ऑर्डर दे देते हैं। यदि आप कभी पाली से गुजर रहे हैं या सर्राफा बाजार जाने का मौका मिले, तो इस ऐतिहासिक कचौरी को चखना बिल्कुल न भूलें। इसका हर एक टुकड़ा खाने के प्रेमियों को पूरी तरह संतुष्ट कर देता है।

दुकान तक ऐसे पहुंचें

यह प्रसिद्ध दुकान पाली के मुख्य सर्राफा बाजार के बिल्कुल मध्य में स्थित है। यदि आप पाली रेलवे स्टेशन या पुराने बस स्टैंड पर उतरते हैं, तो वहां से सर्राफा बाजार पहुंचने के लिए ई-रिक्शा, ऑटो या अन्य स्थानीय वाहन आसानी से मिल जाते हैं। चूंकि बाजार का यह क्षेत्र काफी तंग और व्यस्त है, इसलिए वहां चार पहिया वाहन ले जाने के बजाय पैदल या दो पहिया वाहन से जाना ज्यादा सुविधाजनक रहता है। बाजार में पहुंचते ही किसी भी स्थानीय दुकानदार से पूछने पर वे आपको आसानी से इस प्रसिद्ध दुकान तक का रास्ता बता देंगे।

सवाल-जवाब

जेठामुला की कचौरी कहां स्थित है?
यह प्रसिद्ध कचौरी की दुकान राजस्थान के पाली शहर के मुख्य सर्राफा बाजार के बीचों-बीच स्थित है।
यह दुकान कितनी पुरानी है?
यह दुकान पिछले 80 सालों से भी ज्यादा समय से लोगों को अपनी सेवाएं दे रही है।
इस कचौरी की क्या खासियत है?
कचौरी के बीच में एक छोटा-सा होल करके उसमें खास तीखी और मीठी चटनी डाली जाती है, जो इसके स्वाद को बढ़ा देती है।
दुकान तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
पाली रेलवे स्टेशन या पुराना बस स्टैंड से ई-रिक्शा या ऑटो लेकर सर्राफा बाजार पहुंचा जा सकता है।
बाजार में वाहन ले जाना कैसा रहता है?
सर्राफा बाजार का इलाका तंग और व्यस्त है, इसलिए वहां पैदल या दोपहिया वाहन से जाना ज्यादा सुविधाजनक होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·8 दिन पहले

खेल कवरेज के सिलसिले में विभिन्न दौरों के दौरान स्थानीय व्यंजन और 80 साल पुरानी यह निरंतरता खेल जगत के लंबे करियर की याद दिलाती है। जिस तरह किसी खिलाड़ी या टूर्नामेंट का प्रभाव सालों की निरंतरता और विशिष्ट तकनीक पर निर्भर करता है, ठीक वैसे ही इस कचौरी की खास परोसने की शैली ने इसकी प्रासंगिकता बनाए रखी है। राजस्थान में क्षेत्रीय आयोजनों और खेल यात्राओं के दौरान ऐसे ऐतिहासिक ठिकाने खेल प्रेमियों और पत्रकारों के यात्रा अनुभव को और बेहतर बनाते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

राजस्थान के पारंपरिक बाजारों में दशकों पुराने सूक्ष्म व्यवसायों का यह ढांचा स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पर्यटन की रीढ़ है। पाली के सर्राफा बाजार जैसे ऐतिहासिक व्यापारिक क्षेत्रों में 80 साल पुराने प्रतिष्ठान लोक-नीति और शहरी शासन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, संकरे रास्तों और यातायात की चुनौतियों से जुड़ी यह रिपोर्ट दिखाती है कि नगर निकायों को हेरिटेज पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। यदि बेहतर पैदल मार्ग प्रबंधन और स्थानिक निकाय नीतियां लागू की जाएं, तो ऐसे पारंपरिक लघु उद्योगों को सुरक्षित रखते हुए स्थानीय रोजगार और पर्यटन को अधिक बढ़ावा दिया जा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

अर्जुन के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, व्यावसायिक और आर्थिक नज़रिए से देखें तो 80 वर्षों से कार्यरत ऐसे सूक्ष्म खाद्य उद्यम स्थानीय 'फुटफॉल इकॉनमी' के बड़े उत्प्रेरक हैं। अत्यंत सीमित स्थान के बावजूद इन पारंपरिक प्रतिष्ठानों की ग्राहक निष्ठा और ब्रांड वैल्यू अभूतपूर्व है, जिसका प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ सर्राफा बाजार के अन्य व्यापारियों को भी मिलता है। असंगठित क्षेत्र की इन ऐतिहासिक इकाइयों को यदि डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्वच्छ खाद्य प्रमाणन और हाइपर-लोकल ब्रांडिंग का संस्थागत समर्थन मिले, तो ये न केवल स्थानीय रोजगार को मजबूती देंगे बल्कि एमएसएमई और स्ट्रीट-फूड इकोसिस्टम के लिए एक टिकाऊ मॉडल भी तैयार करेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

पाली के सर्राफा बाजार की इस 80 साल पुरानी दुकान पर उमड़ने वाली भारी भीड़ यह साबित करती है कि पारंपरिक और अनूठे अंदाज में परोसे जाने वाले क्षेत्रीय व्यंजन आज भी स्थानीय आर्थिकी और पर्यटन को मजबूत आधार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में ऐसी ऐतिहासिक फूड हेरिटेज साइट्स सांस्कृतिक पर्यटन के विकास में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

पाली के सर्राफा बाजार में जेठामुला की इस 80 साल पुरानी कचौरी की दुकान पर जुटने वाली भारी भीड़ केवल जायके तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती भीड़भाड़ और यातायात प्रबंधन के लिहाज से भी एक अहम विषय है। तंग बाजारों में इस तरह के लोकप्रिय फूड स्पॉट्स पर उमड़ने वाली भीड़ के कारण स्थानीय कानून-व्यवस्था और प्रशासन को सुगम आवाजाही तथा सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंधन करने की आवश्यकता होती है, ताकि पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp