पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हाल
राजस्थान में निकाय प्रमुख की कुर्सी के लिए घमासान, बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबलाराजस्थान
17 सित॰ 2026, 6:01 pm (8 दिन पहले)· 2

राजस्थान में निकाय प्रमुख की कुर्सी के लिए घमासान, बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला

राजस्थान के 309 निकायों में चुनाव परिणामों के बाद अब प्रमुख पदों के लिए राजनीतिक दलों के बीच जोड़तोड़ और बाड़ाबंदी तेज हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटी हैं।

राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद अब अध्यक्ष और महापौर की कुर्सियों को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश के कुल 309 निकायों में चुनाव होने हैं, जिनमें 10 नगर निगमों के मेयर, 51 नगर परिषदों के सभापति और 248 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पद शामिल हैं। हालांकि सभी निकायों पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा 10 नगर निगमों के परिणामों को लेकर हो रही है। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि अंततः इन प्रमुख शहरी निकायों की कमान किसके हाथ में जाएगी।

निगमों का हाल और स्पष्ट बहुमत

राज्य के 10 नगर निगमों में से भारतीय जनता पार्टी को जयपुर, कोटा, भीलवाड़ा और उदयपुर में स्पष्ट बहुमत मिल चुका है। भीलवाड़ा में स्थिति ऐसी रही कि कांग्रेस ने मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार ही नहीं उतारा, जिसके चलते जसवंत कंवर निर्विरोध मेयर चुन ली गईं। इसके अलावा जयपुर, कोटा और उदयपुर में भी पार्टी की स्थिति मजबूत है और वहां बगावत के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। जिन जगहों पर बीजेपी के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है, वहां पार्टी अपना बोर्ड स्थापित करने के लिए हर संभव राजनीतिक दांव पेंच आजमा रही है।

ये भी पढ़ें

छह निगमों में कड़ा संघर्ष

असली मुकाबला शेष बचे 6 नगर निगमों में देखने को मिल रहा है, जिनमें जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, पाली, बीकानेर और अलवर शामिल हैं। हालांकि बीकानेर में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, फिर भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने राज्य के सभी 10 नगर निगमों में अपनी पार्टी का बोर्ड बनाने का बड़ा दावा किया है। दूसरी तरफ, जयपुर, जोधपुर, कोटा नगर निगम और कोटा जिले की सुकेत नगर पालिका में पुनर्म मतदान कराए जाने के कारण वहां निकाय प्रमुखों का चुनाव 25 सितंबर को संपन्न होगा।

पार्षदों की बाड़ाबंदी और सुरक्षा

विभिन्न निकायों में चुनावी तस्वीर साफ होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही अपने पाले के पार्षदों को टूटने से बचाने के लिए उनकी बाड़ाबंदी कर दी है। अजमेर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है और वह वहां अपना बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी को डर है कि उसके पार्षदों की तोड़फोड़ न हो जाए, इसलिए उन्हें राजस्थान से बहुत दूर कर्नाटक शिफ्ट कर दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के दावों के बाद से कांग्रेस खेमा पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।

बीकानेर में अंदरूनी बगावत के आसार

बीकानेर में बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस ने एहतियात के तौर पर अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी राजस्थान के ही जैसलमेर जिले में कर रखी है, जबकि बीजेपी ने अपने पार्षदों को जोधपुर में ठहराया है। बीकानेर में बहुमत न होने के बावजूद बीजेपी की उम्मीदें इसलिए जिंदा हैं क्योंकि कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी अनिल कल्ला के अलावा पार्टी के एक अन्य निर्वाचित पार्षद नवरतन डागा ने भी महापौर पद के लिए ताल ठोक दी है। डागा ने दो नामांकन दाखिल किए थे, जिसमें एक कांग्रेस के नाम पर और दूसरा बतौर निर्दलीय था। पार्टी का सिंबल पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला को मिलने के बाद डागा अब निर्दलीय मैदान में डटे हुए हैं। कुल 80 वार्डों वाले बीकानेर में कांग्रेस के पास 42 और बीजेपी के पास 27 पार्षद हैं, जबकि 11 अन्य में एक आरएलपी और 10 निर्दलीय हैं। इसके बावजूद बीजेपी ने सुरेन्द्र सिंह शेखावत को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिससे समीकरण बदल सकते हैं।

निर्दलीय निभा रहे हैं किंग मेकर की भूमिका

बाकी बचे तीन नगर निगमों यानी भरतपुर, अलवर और पाली में महापौर की कुर्सी के लिए दोनों मुख्य दलों के बीच कांटे की टक्कर चल रही है। इन क्षेत्रों में भी पार्षदों को एकजुट रखने के लिए गुप्त ठिकानों पर बाड़ाबंदी की गई है। इन निगमों में निर्दलीय पार्षद असली किंग मेकर की भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि दोनों दल उन्हें अपने पाले में खींचने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जोड़तोड़ और राजनीतिक समीकरणों को साधने का दौर तेजी से चल रहा है ताकि किसी तरह अपना बोर्ड बनाया जा सके।

सवाल-जवाब

राजस्थान में कुल कितने निकायों के लिए चुनाव होने हैं?
राजस्थान में कुल 309 निकायों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है।
कितने नगर निगमों में मेयर का चुनाव होना है?
प्रदेश के कुल 10 नगर निगमों में मेयर का चुनाव होना है।
बीजेपी को किन निगमों में स्पष्ट बहुमत मिला है?
बीजेपी को जयपुर, कोटा, भीलवाड़ा और उदयपुर नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत मिला है।
बीकानेर में कांग्रेस के पास कितने पार्षद हैं?
बीकानेर में कुल 80 वार्डों में से कांग्रेस के पास 42 पार्षद हैं।
पुनर्म मतदान के कारण किन क्षेत्रों में चुनाव 25 सितंबर को होंगे?
जयपुर, जोधपुर, कोटा नगर निगम और कोटा जिले की सुकेत नगर पालिका में 25 सितंबर को चुनाव होंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·7 दिन पहले

राजस्थान के इन स्थानीय निकाय चुनावों में अंकों का गणित और राजनीतिक दलों की यह जोड़-तोड़ इस बात का संकेत है कि सत्ता प्राप्ति के लिए नेतृत्व को भारी मानसिक और रणनीतिक उथल-पुथल से गुजरना पड़ रहा है। पार्षदों की इस तरह की गई बाड़ाबंदी और पुनर्मतदान की तिथियों का यह चक्र यह दर्शाता है कि प्रशासनिक नियंत्रण के लिए संघर्ष अभी और लंबा चलेगा और राजनीतिक अस्थिरता के योग आने वाले दिनों में भी कड़े इम्तिहान लेते रहेंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में दिख रही राजनीतिक अस्थिरता और पार्षदों की लंबी बाड़ाबंदी (हॉर्स ट्रेडिंग के डर से कर्नाटक और जैसलमेर तक भेजना) इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर चुनावी सफलता के बाद भी राजनीतिक दल अपनी जीत को सुरक्षित रखने के लिए कितने आशंकित हैं। राजनीतिक जोड़तोड़ और आंतरिक बगावत जैसे घटनाक्रम न केवल दलीय अनुशासन पर सवाल उठाते हैं, बल्कि स्थानीय स्वशासन की स्थिरता और पारदर्शिता को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। शहरी प्रशासन के इन प्रमुख पदों पर इस तरह की खींचतान अंततः विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिशीलता पर असर डाल सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 दिन पहले

निकाय चुनावों में स्पष्ट बहुमत वाले जिलों में भी पार्षदों को दूरदराज भेजने की रणनीति यह दर्शाती है कि दलीय अनुशासन कमजोर हो रहा है और भीतरघात का डर सर्वोच्च हो गया है। जब निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के बीच रहने के बजाय गुप्त शिविरों में कैद किए जाते हैं, तो यह लोकतांत्रिक जनादेश की पारदर्शिता और स्थानीय शासन की जवाबदेही दोनों पर सीधा प्रहार करता है। आगामी 25 सितंबर को होने वाले पुनर्मतदान और इन जोड़तोड़ के नतीजों से यह तय होगा कि शहरी निकायों में विकास कार्यों को गति मिलेगी या राजनीतिक स्थिरता का संकट गहराएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

राजस्थान के इन स्थानीय निकाय चुनावों में जिस तरह से पार्षदों की बाड़ाबंदी कर्नाटक और जैसलमेर तक पहुंच गई है, वह दल-बदल और जोड़तोड़ की राजनीति की पुरानी संस्कृति को उजागर करती है। जब बहुमत के आंकड़े स्पष्ट न हों, तब इस प्रकार की रणनीतियां चुनावी नतीजों से ज्यादा दलों की आंतरिक एकजुटता की परीक्षा बन जाती हैं। आगामी 25 सितंबर को होने वाले पुनर्मतदान और चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि यह रणनीतिक घेराबंदी कितनी प्रभावी साबित होती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

यह राजनीतिक बाड़ाबंदी केवल पार्षदों को सुरक्षित रखने की कवायद नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं में बढ़ती अविश्वास की भावना को भी दर्शाती है। जब चुनावी जनादेश स्पष्ट न हो और दलगत निष्ठाएं कमजोर पड़ने लगें, तो इस तरह की रणनीतिक घेराबंदी और क्रॉस-वोटिंग का खतरा कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाता है। आगामी 25 सितंबर को पुनर्मतदान के बाद होने वाले अंतिम परिणामों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि जोड़तोड़ की इस राजनीति पर किस दल की रणनीति भारी पड़ी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp