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राजस्थान निकाय चुनाव: तिजारा में 18 पार्षदों को हरियाणा में रोके जाने के बाद बवाल, बाजार बंद और चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनातराजस्थान
21 सित॰ 2026, 11:46 am (4 दिन पहले)· 2

राजस्थान निकाय चुनाव: तिजारा में 18 पार्षदों को हरियाणा में रोके जाने के बाद बवाल, बाजार बंद और चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात

तिजारा नगर परिषद सभापति चुनाव से ठीक पहले हिमाचल से लौट रहे कांग्रेस के 18 पार्षदों को हरियाणा में रोके जाने के आरोप के बाद तिजारा में भारी तनाव फैल गया है। बाजार बंद करा दिए गए हैं और जगह-जगह विरोध प्रदर्शन जारी है।

राजस्थान के तिजारा में नगर परिषद सभापति चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले भारी सियासी गतिरोध पैदा हो गया है। हिमाचल में बाड़ाबंदी में रखे गए कांग्रेस खेमे के 18 पार्षद वोटिंग के लिए लौटते वक्त अचानक लापता बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने हरियाणा पुलिस पर इन पार्षदों को जबरन रोकने और हिरासत में लेने का सीधा आरोप मढ़ा है। इस घटनाक्रम की खबर जैसे ही तिजारा पहुंची, शहर में माहौल बेहद गरमा गया। एहतियातन स्थानीय बाजार बंद करा दिए गए हैं और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

तिजारा से लेकर पंचकूला तक सड़क पर उतरी कांग्रेस

पार्षदों को रोके जाने की खबर आग की तरह फैलते ही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। तिजारा के पूर्व विधायक संदीप यादव ने स्थानीय स्तर पर धरना शुरू कर दिया और निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े करते हुए सभापति चुनाव तत्काल निरस्त करने की पुरजोर मांग उठाई। इस बीच यह भी दावा सामने आया कि बाद में संदीप यादव को गुरुग्राम में हिरासत में लिया गया। वहीं दूसरी ओर पंचकूला थाना इलाके में पार्षदों की एक बस और कई अन्य वाहन खड़े पाए गए। घटना के विरोध में कांग्रेस नेता इमरान खान पंचकूला में ही धरने पर बैठ गए हैं।

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चंडीमंदिर टोल प्लाजा पर रात में कार्रवाई का दावा

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि ये सभी 18 पार्षद नगर परिषद सभापति पद के लिए होने वाले मतदान में हिस्सा लेने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश से राजस्थान आ रहे थे। आरोप के अनुसार रविवार रात हरियाणा के चंडीमंदिर (सूरजपुर) टोल प्लाजा पर हरियाणा पुलिस ने नाकाबंदी कर गाड़ियों को रोक लिया और पार्षदों को हिरासत में ले लिया। कांग्रेस का आरोप है कि पुलिसकर्मियों के पास पार्षदों की तस्वीरें पहले से मौजूद थीं। पुलिस ने तस्वीरों से चेहरे मिलाकर पार्षदों की पहचान की और उन्हें साथ चल रहे अन्य कार्यकर्ताओं से अलग कर दिया। इसे सामान्य सुरक्षा चेकिंग के बजाय पूरी तरह सुनियोजित कार्रवाई बताया जा रहा है।

अशोक गहलोत के तीखे आरोप और चुनाव आयोग से गुहार

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बीजेपी और हरियाणा पुलिस पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि तिजारा के कांग्रेस पार्षदों को मतदान प्रक्रिया में भाग लेने से रोकने के लिए पंचकूला में सुनियोजित तरीके से रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजस्थान के मुख्यमंत्री के कहने पर हरियाणा के मुख्यमंत्री के निर्देश से अंजाम दी जा रही है।

गहलोत ने कहा कि इससे पहले हनुमानगढ़ में एक निर्दलीय विधायक की गिरफ्तारी हुई थी और प्रदेशभर में कई कांग्रेस पार्षदों को पुलिस तथा एसीबी के नोटिस थमाए गए थे, जिसके बाद अब तिजारा में यह कदम उठाया गया है। उन्होंने मांग की कि मतदान के लिए आ रहे पार्षदों को बिना किसी व्यवधान राजस्थान आने दिया जाए। साथ ही उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग से इस पूरे प्रकरण में संज्ञान लेकर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।

सवाल-जवाब

तिजारा में बाजार बंद और तनाव का मुख्य कारण क्या है?
हिमाचल प्रदेश से लौट रहे तिजारा के 18 कांग्रेस पार्षदों को हरियाणा पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के आरोपों के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और बाजार बंद करा दिए गए।
पार्षदों को कहां और कब रोके जाने का दावा किया गया है?
कांग्रेस के अनुसार पार्षदों को रविवार रात हरियाणा के चंडीमंदिर (सूरजपुर) टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोका और बाद में उनकी गाड़ियां पंचकूला में खड़ी पाई गईं।
कांग्रेस नेता इस मामले में क्या मांग कर रहे हैं?
कांग्रेस नेताओं ने तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव को तत्काल निरस्त करने और पार्षदों को बिना रोक-टोक वोट डालने के लिए आने देने की मांग की है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने क्या आरोप लगाए हैं?
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान के मुख्यमंत्री के कहने पर हरियाणा के मुख्यमंत्री के निर्देश से पार्षदों को रोकने की यह सुनियोजित कार्रवाई की गई है।
क्या किसी नेता को भी हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है?
तिजारा के पूर्व विधायक संदीप यादव के गुरुग्राम में हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है, जबकि कांग्रेस नेता इमरान खान पंचकूला में धरने पर बैठे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·3 दिन पहले

राजनीतिक उठापटक और इस तरह के हाई-प्रोफाइल तनावों का सीधा असर नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य और शहर की सार्वजनिक शांति पर पड़ता है। इस प्रकार की घटनाओं से जनता के बीच अनिश्चितता और तनाव बढ़ता है, जो स्थानीय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से चिंताजनक है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

तिजारा के इस घटनाक्रम से स्थानीय निकायों के चुनावों में दलबदल रोकने और बहुमत सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाने वाली बाड़ाबंदी की राजनीति की脆弱ता खुलकर सामने आ गई है। जब अंतर-राज्यीय पुलिस तंत्र का ऐसा कथित उपयोग चुनावी नतीजों को प्रभावित करने लगे, तो यह सहकारी संघवाद और स्वतंत्र मतदान की लोकतांत्रिक निष्पक्षता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि ऐसे मामलों में निर्वाचन आयोग ने त्वरित और सख्त हस्तक्षेप नहीं किया, तो आगामी स्थानीय चुनावों में इस तरह के प्रशासनिक टकराव और अधिक तीखे हो सकते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह घटना राजनीतिक गतिरोध से आगे बढ़कर निवेशकों के बीच एक अस्थिर संदेश भेजती है। जब प्रशासनिक मशीनरी इस तरह के विवादों में घिरती है, तो स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां, खुदरा कारोबार और बाजार बंद होने से कॉरपोरेट विश्वास व व्यापारिक सेंटीमेंट पर तत्काल नकारात्मक असर पड़ता है। इससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ती है और क्षेत्रीय आर्थिक वृद्धि की गति धीमी हो सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

तिजारा के सभापति चुनाव से ठीक पहले पार्षदों को रोके जाने का यह पूरा प्रकरण आपराधिक और चुनावी प्रक्रिया में सीधा प्रशासनिक हस्तक्षेप प्रतीत होता है। अंतर-राज्यीय सीमाओं पर पुलिस बल का इस प्रकार इस्तेमाल और जनप्रतिनिधियों को हिरासत में लेने के गंभीर आरोप निष्पक्ष न्याय व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। यदि इन आरोपों की न्यायिक जांच नहीं हुई, तो यह स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था को और अधिक बिगाड़ सकता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुँचाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

यह प्रकरण केवल एक शहर के सभापति चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संघीय व्यवस्था और राज्यों के बीच पुलिस तंत्र के परस्पर उपयोग पर एक गंभीर मिसाल कायम करता है। अंतर-राज्यीय सीमाओं पर इस तरह की राजनीतिक जबर्दस्ती से स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गहरा संकट खड़ा होता है। यदि इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में चुनावी बाड़ाबंदी और सत्ता के दुरुपयोग की संस्कृति को और अधिक बढ़ावा मिलेगा, जिससे आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं से विश्वास उठ सकता है।

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