विदेश से मिलने वाले दान के नियमों में बड़े संशोधन की तैयारी, एनजीओ संपत्तियों के प्रबंधन पर संसद से अमेरिका तक घमासान15 अगस्त को जन्मे लोगों का मूलांक 6 और शुक्र ग्रह का प्रभाव, जानें स्वभाव, करियर और आर्थिक स्थितिसामाजिक भेदभाव खत्म होने तक देश में आरक्षण जरूरी, मुंबई में बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत1947 और 1968 में नील कमल नाम से बनी दो फिल्में जहां राज कपूर का हुआ डेब्यू और वहीदा रहमान ने रचा इतिहासअसम में 4-लेन गुवाहाटी तेजपुर कॉरिडोर और 23,731 करोड़ की गोबरधन योजना को कैबिनेट से हरी झंडीसितंबर से देशभर में चलेगा सीजेपी का 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान, अभिजीत दीपके ने किया बड़ा ऐलानझांसी कार दुर्घटना में दो मौतों के बाद चालक मोहम्मद जैद पर संभावित धाराओं का कानूनी विश्लेषण19 साल बाद पर्दे पर लौटी शिवम पंडित की खौफनाक दास्तान, इमरान हाशमी की आवारापन 2 का धमाकेदार ट्रेलर जारीमार्केट में 85 प्रतिशत समय चलने वाले रेंज-बाउंड ट्रैप से कैसे बचें और बिटकॉइन की ताजा तकनीकी स्थिति क्या है10 अगस्त को 3 दुर्लभ राजयोग में पड़ेगा सावन का दूसरा सोमवार, 5 राशियों पर बरसेगी शिव जी की कृपा
रासायनिक खाद पर फिजूल खर्च रोकेंगे बहराइच के किसान, आधुनिक मशीन से महज 7 से 11 मिनट में मिलेगी नाइट्रोजन की जांच रिपोर्टभारत
5 अग॰ 2026, 3:56 pm (1 दिन पहले)· 0

रासायनिक खाद पर फिजूल खर्च रोकेंगे बहराइच के किसान, आधुनिक मशीन से महज 7 से 11 मिनट में मिलेगी नाइट्रोजन की जांच रिपोर्ट

बहराइच की मृदा प्रयोगशाला में स्थापित की गई लाखों रुपये की नई नाइट्रोजन एनालाइजर मशीन से अब किसान अपनी जमीन की सटीक जांच करवा सकेंगे। महज 102 रुपये शुल्क पर 7 से 11 मिनट के भीतर रिपोर्ट मिलने से रासायनिक खादों पर होने वाली अनावश्यक लागत बचेगी और पैदावार बढ़ेगी।

बहराइच जिले के किसानों को अब अपने खेतों की उर्वरता बढ़ाने और सटीक मिट्टी जांच के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कृषि विभाग की स्थानीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में आधुनिक तकनीक से लैस नई नाइट्रोजन एनालाइजर मशीन स्थापित कर दी गई है। लाखों रुपये की लागत वाली यह अत्याधुनिक मशीन मात्र 7 से 11 मिनट की अल्पावधि में मिट्टी का विश्लेषण करके उसमें नाइट्रोजन की वास्तविक मात्रा की सटीक जानकारी दे देती है। इससे किसानों को न केवल अपनी जमीन की सेहत सुधारने में मदद मिलेगी, बल्कि बेवजह रासायनिक खादों का छिड़काव न करने से उनकी खेती की लागत भी घटेगी और फसलों की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार आएगा।

पुरानी मैनुअल पद्धतियों से मिली राहत

कृषि विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में अपनाई जाने वाली पारंपरिक और मैनुअल जांच प्रणालियों में काफी समय लगता था। इसके अलावा, पुरानी तकनीकों में रिपोर्ट की वह स्पष्टता और सटीकता हासिल नहीं हो पाती थी, जिसकी जरूरत आज की आधुनिक खेती में महसूस की जाती है। नई एनालाइजर मशीन के आगमन से इस कमी को पूरी तरह दूर कर दिया गया है। यह डिजिटल और आधुनिक प्रणाली मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्वों का सूक्ष्मता से आकलन करती है। जब किसानों को अपनी जमीन में नाइट्रोजन का सही स्तर पता होगा, तो वे जरूरत के मुताबिक ही उर्वरक डाल सकेंगे, जिससे मिट्टी का प्राकृतिक संतुलन भी सुरक्षित रहेगा।

ये भी पढ़ें

पौधों के विकास में नाइट्रोजन का महत्व

फसलों की वृद्धि और बेहतर उत्पादन के लिए मिट्टी में पर्याप्त नाइट्रोजन का होना बेहद अनिवार्य माना जाता है। खेत की मिट्टी में यदि इस मुख्य पोषक तत्व की कमी हो जाए, तो पौधों की पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगती हैं। इसके साथ ही पौधों का स्वाभाविक विकास पूरी तरह रुक जाता है और उनका कद छोटा रह जाता है। सही समय पर संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन न मिलने के कारण फसल के दाने या फल की गुणवत्ता खराब होती है और कुल पैदावार पर भी विपरीत असर पड़ता है। नई मशीन की सटीक जांच रिपोर्ट किसानों को यह तय करने में मदद करती है कि खेत में किस मात्रा में खाद की आवश्यकता है, जिससे अतिरिक्त उर्वरक पर होने वाला बेवजह का खर्च बच जाता है।

मिट्टी का सैंपल लेने की सही प्रक्रिया

कृषि विभाग ने क्षेत्र के सभी कृषकों से अपील की है कि वे अपनी जमीनों की नियमित जांच अवश्य कराएं। इसके लिए सही तरीका अपनाते हुए सैंपल जमा करना जरूरी है। किसान अपने खेत के कम से कम 4 से 5 अलग-अलग स्थानों का चयन करें। जांच के लिए मिट्टी लेने से पहले उस जगह की ऊपरी सतह की गंदगी और घास को हटा लें। इसके बाद लगभग 300 ग्राम मिट्टी का नमूना एकत्र करें। इस मिट्टी को एक साफ-सुथरी प्लास्टिक की थैली में पैक करें और उस पर अपना नाम, पूरा पता तथा खेत का विवरण स्पष्ट रूप से लिखें। यह तैयार सैंपल प्रयोगशाला में जमा करना होता है।

जांच शुल्क और प्रयोगशाला का पता

सैंपल जमा करते समय किसानों को मात्र 102 रुपये का निर्धारित शुल्क चुकाना होगा। फीस जमा होते ही प्रयोगशाला के प्राविधिक कर्मचारी नाइट्रोजन एनालाइजर मशीन से मिट्टी का त्वरित विश्लेषण शुरू कर देते हैं। महज 7 से 11 मिनट के भीतर जांच की पूरी रिपोर्ट किसान के हाथों में सौंप दी जाती है। बहराइच शहर में यह अत्याधुनिक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला मेडिकल कॉलेज के निकट, कृषि उद्यान केंद्र के पास स्थित कृषि भवन परिसर में संचालित की जा रही है। त्वरित सुविधा और पारदर्शी जांच रिपोर्ट मिलने से बहराइच के किसान भाइयों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

सवाल-जवाब

बहराइच मृदा प्रयोगशाला में मिट्टी की नाइट्रोजन जांच में कितना समय लगता है?
नई नाइट्रोजन एनालाइजर मशीन से मिट्टी की जांच रिपोर्ट तैयार होने में मात्र 7 से 11 मिनट का समय लगता है।
मिट्टी परीक्षण कराने के लिए कितना शुल्क देना होगा?
किसान भाइयों को प्रयोगशाला में अपना मिट्टी का सैंपल जमा करने पर 102 रुपये का शुल्क देना होगा।
मिट्टी की जांच कराने के लिए सैंपल कैसे लिया जाना चाहिए?
खेत के 4 से 5 अलग-अलग स्थानों से ऊपरी सतह हटाकर कम से कम 300 ग्राम मिट्टी का सैंपल साफ थैली में लेकर उस पर अपना नाम, पता व खेत का विवरण लिखना होता है।
मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होने पर पौधों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
नाइट्रोजन की कमी से पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, उनका विकास रुक जाता है, कद छोटा रह जाता है और फसल की पैदावार व गुणवत्ता प्रभावित होती है।
बहराइच में यह मृदा परीक्षण प्रयोगशाला कहां स्थित है?
यह प्रयोगशाला बहराइच शहर में मेडिकल कॉलेज के निकट, कृषि उद्यान केंद्र के पास कृषि भवन परिसर में स्थित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR