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रायपुर के सदर बाजार में अवैध कब्जे पर चला वक्फ बोर्ड का चाबुक, 45 दिन में जगह खाली करने का थमाया नोटिसछत्तीसगढ़
21 अग॰ 2026, 12:51 pm (35 दिन पहले)· 2

रायपुर के सदर बाजार में अवैध कब्जे पर चला वक्फ बोर्ड का चाबुक, 45 दिन में जगह खाली करने का थमाया नोटिस

छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित सदर बाजार में वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए अधिकरण के निर्देश पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है। कब्जाधारी को 900 वर्गफुट जमीन, दुकान और गोदाम 45 दिनों में खाली करने की मोहलत दी गई है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक सदर बाजार व्यापारिक इलाके में वक्फ संपत्ति पर वर्षों से जारी अवैध कब्जे को छुड़ाने के लिए कानूनी प्रक्रिया सख्त कर दी गई है। राज्य वक्फ अधिकरण द्वारा जारी किए गए आधिकारिक फैसले का अनुपालन कराते हुए वक्फ बोर्ड की टीम ने विवादित परिसर पर बेदखली का नोटिस चिपका दिया है। इस सरकारी आदेश के माध्यम से कब्जाधारी को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए 45 दिनों के भीतर पूरी जगह खाली करके उसका कब्जा संबंधित संस्था को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

अतिक्रमण की जद में आईं संपत्तियों का ब्योरा

बेदखली की कार्रवाई के दायरे में आई यह कीमती जायदाद रायपुर के अंजुमन-ए-सैफी दाऊदी बोहरा जमात के नाम पर दर्ज एक पंजीकृत वक्फ जायदाद है। लंबे समय से इस अचल संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर विवाद चल रहा था, जिसकी औपचारिक सुनवाई छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ अधिकरण की न्यायिक पीठ में पूरी हुई। साक्ष्यों के आधार पर अधिकरण ने अवैध कब्जे को खारिज करते हुए जमीन और दुकान को तुरंत खाली कराने के आदेश पारित किए थे।

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अधिकरण के फैसले के अनुसार, अवैध कब्जे की चपेट में आए कुल ढांचे में दो अलग-अलग हिस्सों की जमीन और निर्माण शामिल हैं। इनमें मकान नंबर 923 और मकान नंबर 924 के तहत आने वाली लगभग 900 वर्गफुट जमीन मुख्य रूप से शामिल है। इसके अलावा, इसी वक्फ भूखंड से संलग्न मकान नंबर 523 और मकान नंबर 524 में स्थित व्यावसायिक दुकान और उससे जुड़ा गोदाम भी इसी पंजीकृत संपत्ति का अभिन्न अंग हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि नियत अवधि खत्म होते ही संपत्ति का भौतिक प्रभार संबंधित वक्फ प्रबंधन को स्थानांतरित करना अनिवार्य होगा।

प्रदेश भर में अवैध कब्जों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत

राजधानी के मुख्य बाजार में हुई इस त्वरित कानूनी पहल को पूरे प्रदेश के संदर्भ में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों और ग्रामीण अंचलों में स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की वक्फ संपत्तियों पर गैर-कानूनी तरीके से काबिज लोगों की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। कई इलाकों में व्यावसायिक दुकानों, आवासीय मकानों और कृषि भूखंडों पर लोगों ने सालों से कब्जा जमा रखा है। सदर बाजार में की गई यह सख्त कार्रवाई बाकी अतिक्रमणकारियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।

वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक अधिकरण से प्राप्त होने वाले सभी आदेशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन कराया जाएगा। गैर-कानूनी ढंग से कब्जा जमाए बैठे लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 45 दिनों की निर्धारित अल्टीमेटम अवधि समाप्त होने के बाद कब्जाधारी खुद संपत्ति छोड़ता है या फिर आगे प्रशासनिक कदम उठाने पड़ेंगे।

सवाल-जवाब

रायपुर के सदर बाजार में वक्फ बोर्ड ने क्या कार्रवाई की है?
राज्य वक्फ अधिकरण के आदेश पर रायपुर के सदर बाजार स्थित एक दुकान और गोदाम पर बेदखली का नोटिस चिपकाकर कब्जा खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
कब्जाधारी को संपत्ति खाली करने के लिए कितना समय दिया गया है?
नोटिस चस्पा होने के बाद कब्जाधारी को 45 दिनों के भीतर पूरी संपत्ति खाली करके संबंधित वक्फ संस्था को कब्जा सौंपने का अल्टीमेटम दिया गया है।
कार्रवाई के दायरे में आई वक्फ संपत्ति का विवरण क्या है?
इस संपत्ति में मकान नंबर 923 और 924 की लगभग 900 वर्गफुट जमीन तथा मकान नंबर 523 और 524 में स्थित दुकान एवं गोदाम शामिल हैं।
यह संपत्ति किस रजिस्टर्ड संस्था के नाम पर दर्ज है?
यह अचल वक्फ संपत्ति रायपुर की अंजुमन-ए-सैफी दाऊदी बोहरा जमात के नाम पर पंजीकृत है।
क्या छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी ऐसी कार्रवाई होगी?
राज्य भर में वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे की शिकायतों को देखते हुए वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अधिकरण के आदेशों के तहत अन्य जिलों में भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·34 दिन पहले

रायपुर के सदर बाजार में वक्फ अधिकरण के आदेश पर 45 दिन का अल्टीमेटम और बेदखली का नोटिस यह संकेत देता है कि अब सार्वजनिक व धार्मिक संपत्तियों के विवादों में कानूनी और प्रशासनिक सख्ती बढ़ रही है। इस तरह के मामलों में ऐतिहासिक रूप से कई जगहों पर जटिलताएं और अदालती खींचतान देखी गई है। यह देखना अहम होगा कि क्या निर्धारित समयसीमा में कब्जा स्वतः हटता है या प्रशासन को बल प्रयोग करना पड़ेगा, जिसका असर राज्य के अन्य हिस्सों में लंबित मुकदमों और अतिक्रमण विरोधी अभियानों पर भी पड़ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

यह कानूनी कार्रवाई राज्य में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियमन में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। अधिकरण के निर्देश पर 45 दिन का अल्टीमेटम यह तय करेगा कि प्रशासनिक मशीनरी कितने प्रभावी ढंग से अदालती आदेशों को जमीन पर उतारती है, जिसका असर आने वाले समय में अन्य विवादित संपत्तियों पर भी पड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

यह कानूनी और प्रशासनिक कदम रायपुर के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र में संपत्तियों के व्यावसायिक मूल्यांकन और बाज़ार गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है। जब ऐसी प्राइम कमर्शियल रियल एस्टेट कानूनी प्रक्रिया के बाद मुक्त होती है, तो यह स्पष्ट होता है कि आगे चलकर इन परिसंपत्तियों का सही प्रबंधन कॉर्पोरेट और स्थानीय व्यापारिक ढांचे के लिए नए आर्थिक अवसर खोल सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कार्रवाई से आने वाले समय में अन्य विवादित संपत्तियों के मोचन की प्रक्रिया कितनी तेज होती है।

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

रायपुर के सदर बाजार में वक्फ अधिकरण के आदेश पर 45 दिन का अल्टीमेटम एक कड़ा प्रशासनिक संदेश देता है। व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियों पर सालों से जमे अवैध कब्जों को हटाने की यह मुहिम न केवल करोड़ों की संपत्तियों को मुक्त कराएगी, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में लंबित मुकदमों और अतिक्रमण के मामलों में भी कानूनी कार्रवाई की गति को तेज कर सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 दिन पहले

सदर बाजार के इस मामले में वक्फ अधिकरण का आदेश स्पष्ट करता है कि दीवानी और संपत्ति विवादों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज़मीन का भौतिक कब्ज़ा वापस लेना प्रशासन की प्राथमिकता बन रहा है। 900 वर्गफुट और उससे जुड़ी व्यावसायिक इकाइयों पर निर्धारित 45 दिनों की समय-सीमा यह तय करेगी कि क्या बिना प्रशासनिक बल के अनुपालन संभव है या पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सीधे हस्तक्षेप करना होगा। इस प्रकरण के परिणाम राज्य के अन्य इलाकों में चल रहे इसी तरह के मुकदमों की तासीर बदल सकते हैं।

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