उत्तराखंड में तीन तलाक और निकाह हलाला जैसी कुप्रथाओं का दंश झेल चुकी बेसहारा मुस्लिम महिलाओं के पुनर्वास के लिए एक अहम पहल शुरू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत पीड़ित महिलाओं को रहने के लिए छत उपलब्ध कराने के मकसद से राज्य का वक्फ बोर्ड अपने लैंड बैंक से आवासीय व्यवस्था तैयार करेगा। इस सामाजिक कल्याणकारी कदम को आगे बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर प्रशासनिक सहमति भी बन चुकी है।
वक्फ की जमीन से आशियाना बनाने की रूपरेखा
योजना के प्रारूप के अनुसार, बेसहारा और प्रताड़ित महिलाओं को सुरक्षित ठिकाना देने के लिए वक्फ बोर्ड के पास उपलब्ध भूखंडों का उपयोग किया जाएगा। कई मामलों में तलाक अथवा हलाला के बाद महिलाओं को सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इसी बेबसी को दूर करने के लिए बोर्ड की संपत्ति का इस्तेमाल उनके स्थायी आवास निर्माण में करने का खाका तैयार हुआ है।
मुख्यमंत्री की हरी झंडी और बोर्ड की आगामी बैठक
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस संबंध में औपचारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस योजना को आगे बढ़ाने की अनुमति प्रदान कर दी है। योजना को कानूनी और प्रशासनिक अमलीजामा पहनाने के लिए इसे वक्फ बोर्ड की आगामी बैठक में आधिकारिक प्रस्ताव के रूप में पटल पर रखा जाएगा। बोर्ड की औपचारिक स्वीकृति मिलते ही जमीन के चयन और निर्माण की प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
सख्त कानूनों के बीच पुनर्वास की दरकार
राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद हलाला और तीन तलाक से जुड़े मामलों पर कानूनी शिकंजा कसा है। हाल के महीनों में रुड़की जैसे क्षेत्रों में हलाला प्रताड़ना के मामलों में पुलिस कार्रवाई भी देखने को मिली है। अदालतों ने भी इन प्रथाओं पर गंभीर टिप्पणियां की हैं। ऐसे हालात में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पीड़िताओं के रहने, खाने और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसे पूरा करने की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है।



















