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ऋषिकेश में गणेश उत्सव की धूम, शाम की आरती और रंग-बिरंगे पंडालों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़उत्तराखंड
20 सित॰ 2026, 7:06 pm (2 दिन पहले)· 0

ऋषिकेश में गणेश उत्सव की धूम, शाम की आरती और रंग-बिरंगे पंडालों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

ऋषिकेश में गणेश चतुर्थी से शुरू हुए उत्सव के चलते शाम होते ही शहर का माहौल भक्तिमय हो रहा है, जहां लोग परिवारों के साथ आरती और दर्शन के लिए पंडालों में पहुंच रहे हैं।

ऋषिकेश में गणेश चतुर्थी के शुभारंभ के साथ ही पूरे शहर का वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया है। दिन ढलते ही शहर की गलियों और प्रमुख चौराहों पर उत्सव का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। कहीं रंग-बिरंगी रोशनी से सजे भव्य पंडाल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, तो कहीं भगवान गणेश की मनमोहक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यह उत्सव अब शहर के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए शाम के समय परिवार सहित बाहर निकलने, पूजा-अर्चना करने और सामाजिक मेलजोल बढ़ाने का एक बड़ा जरिया बन चुका है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी आयु वर्ग के लोग पूरी श्रद्धा के साथ पंडालों में पहुंचकर दैनिक पूजा और आरती में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

फूलों, रोशनी और अलग-अलग रूपों में विराजे गणपति

शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विभिन्न स्वरूपों में स्थापित किया गया है। भक्तों ने अपनी-अपनी पसंद और श्रद्धा के अनुसार पंडालों को आकर्षक स्वरूप दिया है। कुछ स्थानों पर ताजे फूलों और आधुनिक विद्युत झालरों की भव्य सजावट की गई है, जबकि कुछ जगहों पर बेहद सादगीपूर्ण लेकिन मनोहारी तरीके से पंडाल तैयार किए गए हैं। जैसे ही शाम ढलती है और विद्युत सजावट जगमगाती है, इन सभी पूजा स्थलों पर लोगों की आवाजाही अचानक बढ़ जाती है। पंडालों के इर्द-गिर्द फूलों के स्टॉल, पारंपरिक पूजा सामग्री और विभिन्न तरह के प्रसाद की दुकानें सज गई हैं। स्थानीय निवासियों के अलावा बाहर से आने वाले श्रद्धालु और तीर्थयात्री भी इन पंडालों में विघ्नहर्ता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए निरंतर पहुंच रहे हैं।

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शाम की आरती में उमड़ रहा श्रद्धा का सैलाब

शाम के समय आयोजित होने वाली सामूहिक आरती इस पूरे उत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण बनकर उभरी है। स्थानीय निवासी शमशेर का कहना है कि गणेश उत्सव के दौरान हर साल शहर का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। उनके अनुसार, इन दिनों पूजा के बहाने पूरा परिवार एक साथ घर से बाहर निकलता है, जिससे आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता है। खासतौर पर छोटे बच्चों में गणपति की अलग-अलग स्वरूपों वाली प्रतिमाओं और पंडालों की भव्य सजावट को देखने का जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

शाम ढलते ही जब लोग बाजारों और मुख्य मार्गों की ओर निकलते हैं, तो चारों तरफ किसी बड़े मेले जैसा माहौल नजर आता है। शहर के अधिकांश पंडालों में सुबह और शाम दोनों पहर नियमपूर्वक आरती का आयोजन किया जा रहा है। आरती का समय होते ही आसपास की बस्तियों और कॉलोनियों के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हो जाते हैं। पूजा की घंटियों, शंखनाद और गणपति के जयकारों से पूरा वातावरण कुछ पलों के लिए पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।

सामुदायिक एकता और बच्चों के लिए खास अवसर

इस धार्मिक आयोजन ने सामाजिक मेलमिलाप को भी एक नई दिशा दी है। स्थानीय निवासी कमल के मुताबिक, गणेश उत्सव का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि लोग अपनी रोजमर्रा की व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर एक जगह एकत्र होते हैं। शाम की आरती के बहाने पास-पड़ोस के लोग एक साथ जुटते हैं और बच्चे भी धार्मिक रीति-रिवाजों को करीब से देखते हुए पूरे उत्साह से शामिल होते हैं। उनका मानना है कि इन आयोजनों से केवल धार्मिक माहौल ही नहीं बनता, बल्कि मोहल्ले के लोगों के बीच आपसी सौहार्द और बातचीत का दायरा भी बढ़ता है। परिवार के सदस्य साथ समय बिताते हैं और युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ती है।

विसर्जन यात्रा की तैयारियों में जुटा शहर

उत्सव के अंतिम पड़ाव यानी विसर्जन के दिन शहर की सड़कों पर एक बिल्कुल अलग और भव्य नजारा दिखाई देगा। गणेश उत्सव के समापन पर श्रद्धालु पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की थाप पर बप्पा को विदाई देने के लिए सड़कों पर उतरेंगे। इस दौरान पूरे रास्ते गणपति बप्पा मोरया के गगनभेदी जयकारे गूंजेंगे और श्रद्धालु गाते-नाचते हुए जलस्रोतों की ओर प्रस्थान करेंगे। जहां पूरे उत्सव के दौरान प्रतिदिन होने वाली शाम की आरती और सुंदर पंडाल लोगों को एक सूत्र में बांधते रहे हैं, वहीं विसर्जन के दिन सभी भक्त अपार श्रद्धा और भावुकता के साथ विघ्नहर्ता को विदाई देंगे।

सवाल-जवाब

ऋषिकेश में इन दिनों शाम को किस वजह से खास रौनक देखने को मिल रही है?
गणेश उत्सव के चलते शहर के विभिन्न इलाकों में स्थापित आकर्षक पंडालों और शाम की आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
पंडालों में किस तरह की सजावट की गई है?
पंडालों में भगवान गणेश की विभिन्न स्वरूपों वाली प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिन्हें रंग-बिरंगी रोशनी और ताजे फूलों से सजाया गया है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार इस उत्सव का सामाजिक महत्व क्या है?
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस उत्सव से रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच लोगों को एक साथ आने और आपस में मेलजोल बढ़ाने का अच्छा मौका मिलता है।
गणेश उत्सव के अंतिम दिन शहर में क्या खास कार्यक्रम होगा?
उत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ पारंपरिक विसर्जन जुलूस निकालेंगे और गणपति को भावुक विदाई देंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

ऋषिकेश में गणेश उत्सव का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता और स्थानीय शासन के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे सामुदायिक आयोजन नागरिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं, जो किसी भी जीवंत लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है। इसके अलावा, पंडालों के आसपास सजने वाले अस्थाई बाजार स्थानीय सूक्ष्म-अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। नीतिगत स्तर पर, ऐसे बड़े सार्वजनिक एकत्रीकरणों के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था स्थानीय प्रशासन की सांगठनिक क्षमता और नागरिक-अनुकूल दृष्टिकोण की परीक्षा लेती है।

Divya Reddy@divya-reddy·1 दिन पहले

अर्जुन की बात को आगे बढ़ाते हुए, शैक्षिक और छात्र दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे सामुदायिक उत्सव बच्चों और युवाओं के लिए व्यावहारिक शिक्षा के जीवंत केंद्र बनते हैं। पंडालों में विभिन्न कलात्मक स्वरूपों और प्रबंधकीय गतिविधियों को देखना छात्रों में रचनात्मकता, सांस्कृतिक साक्षरता और सामाजिक कौशल विकसित करता है। यह अनौपचारिक मंच उन्हें सहयोग और आयोजन कौशल का व्यावहारिक अनुभव देता है, जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

ऋषिकेश जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों में गणेश उत्सव जैसे स्थानीय त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये स्थानीय सूक्ष्म अर्थव्यवस्था (micro-economy) को भी गति देते हैं। त्योहारों के दौरान पूजा सामग्री, फूलों की दुकानों, स्ट्रीट वेंडर्स और स्थानीय खुदरा व्यापारियों की आर्थिक गतिविधि में उल्लेखनीय तेजी आती है। इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन छोटे शहरों में मौसमी रोजगार और जमीनी स्तर पर धन के प्रवाह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद सकारात्मक है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

ऋषिकेश जैसे पारंपरिक तीर्थ क्षेत्र में गणेश उत्सव का यह बढ़ता दायरा सांस्कृतिक समन्वय को दर्शाता है और स्थानीय सूक्ष्म अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। छोटे दुकानदारों, फूल और प्रसाद विक्रेताओं के लिए यह त्योहार आर्थिक उपार्जन का बड़ा जरिया बन रहा है। हालांकि, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से, ऐसी भारी भीड़ के बीच सुरक्षा, सुचारू यातायात और स्वच्छता बनाए रखना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी नीतिगत चुनौती है। ऐसे आयोजन सामाजिक जुड़ाव के साथ-साथ नागरिक प्रबंधन की क्षमता को भी परखते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

रोहन की बात बिल्कुल सही है। कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखें तो ऋषिकेश में त्योहारों पर उमड़ती इस भारी भीड़ के बीच सार्वजनिक सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पंडालों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जेबकतरी, चोरी और महिलाओं की सुरक्षा जैसी कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस की मुस्तैदी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, आपातकालीन निकास, अग्निशमन इंतजाम और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी जैसे सुरक्षा उपायों को लेकर स्थानीय प्रशासन व पूजा समितियों के बीच कड़ा तालमेल आवश्यक है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

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