भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ रूस की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण यात्रा पर मॉस्को पहुंचे हैं। 16 से 18 सितंबर तक चलने वाली इस उच्च स्तरीय यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को और अधिक मजबूत करना है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में केवल 15 दिनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच दो बड़ी मुलाकातें हो चुकी हैं। इन द्विपक्षीय बैठकों के तुरंत बाद सेना प्रमुख का रूस जाना वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। जनरल धीरज सेठ ने 30 जून 2026 को भारत के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके इस दौरे को केवल एक औपचारिक मुलाकात के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह भारतीय सेना में शामिल रूसी मूल के आधुनिक हथियारों के रख-रखाव और रक्षा सौदों को नए सिरे से आकार देने की एक बड़ी रणनीतिक योजना का हिस्सा है।
रूसी सैन्य नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता और सम्मान
मॉस्को पहुंचने पर भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का औपचारिक रूप से भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद, उन्होंने मॉस्को में स्थित टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर पर जाकर वीर शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस तीन दिवसीय दौरे के दौरान दोनों देशों की थल सेनाओं के बीच सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित की गई हैं।
जनरल धीरज सेठ रूस की थल सेना के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव के साथ एक विस्तृत द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने और सैनिकों के पेशेवर प्रशिक्षण को और बेहतर बनाने पर गहन विचार-विमर्श होगा। इसके साथ ही, थल सेना प्रमुख मॉस्को में स्थित प्रसिद्ध नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का भी दौरा करेंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान वह रूस के उप रक्षा मंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव से भी मुलाकात करेंगे, जो रक्षा उद्योग और सैन्य उपकरणों की खरीद का कार्यभार संभालते हैं। इस बैठक में बदलते वैश्विक सैन्य परिदृश्यों और आपसी रणनीतिक हितों पर दोनों अधिकारियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।
रूसी हथियारों को आधुनिक बनाने का बड़ा खाका
इस पूरे दौरे का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक हिस्सा भारतीय सेना के पास मौजूद रूसी मूल के सैन्य उपकरणों का आधुनिकीकरण और उनका सुचारू रख-रखाव सुनिश्चित करना है। भारतीय थल सेना की युद्धक क्षमता का एक बहुत बड़ा हिस्सा रूसी तकनीक और सैन्य प्रणालियों पर निर्भर करता है। इसमें मुख्य रूप से T-90 और T-72 टैंक, BMP लड़ाकू वाहन और कई तरह की भारी तोपें शामिल हैं।
रूस के उप रक्षा मंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव के साथ होने वाली चर्चाओं में इन सैन्य प्रणालियों के लिए आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की लगातार और बिना किसी बाधा के आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, इन हथियारों की समय पर मरम्मत करने और इन्हें वर्तमान समय की अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करने के उपायों पर भी विस्तार से बातचीत होगी, जिससे भारतीय सेना की सीमा पर युद्धक क्षमता हमेशा अचूक बनी रहे।
सेंट पीटर्सबर्ग में तोपखाना तकनीक पर विशेष चर्चा
मॉस्को में अपनी आधिकारिक बैठकें पूरी करने के बाद, जनरल धीरज सेठ सेंट पीटर्सबर्ग का दौरा करेंगे। वहां वे रूस की ऐतिहासिक मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का दौरा करने वाले हैं। यह अकादमी तोपखाना प्रणालियों और सैन्य अनुसंधान के क्षेत्र में दुनिया भर में अपनी खास पहचान रखती है।
सेंट पीटर्सबर्ग की इस यात्रा के दौरान थल सेना प्रमुख अकादमी के वरिष्ठ शिक्षकों और सैन्य शोधकर्ताओं के साथ बातचीत करेंगे। इस मुलाकात में आधुनिक तोपखाने, अत्यधिक सटीक मारक क्षमता वाली मिसाइल प्रणालियों और भविष्य के युद्धों में आर्टिलरी की भूमिका जैसी आधुनिक सैन्य तकनीकों के आदान-प्रदान पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
वर्ष 2025 के इंद्र अभ्यास से आगे बढ़ता रक्षा सहयोग
भारत और रूस के बीच रक्षा संबंधों का इतिहास कई दशक पुराना और बेहद विश्वसनीय रहा है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच आयोजित किए गए संयुक्त सैन्य अभ्यास इंद्र ने दोनों सेनाओं के बीच मैदानी तालमेल और रणनीतिक समझ को और अधिक सुदृढ़ किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की लगातार मुलाकातों के ठीक बाद सेना प्रमुख का सीधे रूस जाना यह स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए अपने इस पुराने और परखे हुए मित्र देश के साथ संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ कर रहा है। यह दौरा आने वाले समय में दोनों देशों के सैन्य सहयोग को एक नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।















