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सजा पूरी कर चुके विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर तक डिटेंशन सेंटर भेजें: मेघालय उच्च न्यायालयमेघालय
22 सित॰ 2026, 12:12 pm (9 दिन पहले)· 0

सजा पूरी कर चुके विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर तक डिटेंशन सेंटर भेजें: मेघालय उच्च न्यायालय

मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि सजा पूरी होने के बावजूद जेलों में बंद करीब 30 विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर तक शिलांग के अस्थायी होल्डिंग सेंटर में स्थानांतरित किया जाए।

कारागार में तय सजा भुगत लेने के बाद भी रिहाई का इंतजार कर रहे विदेशी नागरिकों को लेकर मेघालय उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य प्रशासन को निर्देश दिया है कि सजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी हिरासत में रखे गए सभी विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर तक एक अस्थायी डिटेंशन व होल्डिंग सेंटर में स्थानांतरित किया जाए। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू डिएंगदोह की खंडपीठ कर रही थी।

लगभग 30 विदेशी बंदी अब भी हिरासत में

उच्च न्यायालय के समक्ष पेश की गई राज्य सरकार की स्थिति रिपोर्ट से सामने आया कि लगभग 30 विदेशी नागरिक अपनी न्यायिक सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अब तक जेल में ही बंद हैं। खंडपीठ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि सजा खत्म होने के बाद किसी भी व्यक्ति को सामान्य जेल की कोठरी में अनिश्चितकाल तक नहीं रखा जा सकता।

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शिलांग के लाइतुमख्राह में बनेगा अस्थायी केंद्र

अदालत ने दर्ज किया कि मेघालय सरकार ने इस उद्देश्य के लिए शिलांग के लाइतुमख्राह स्थित एमबोसे (MBOSE) हॉस्टल का चयन किया है। इससे पहले प्रशासन ने नोंगस्टोइन में स्थित एक इमारत का प्रस्ताव रखा था, जिस पर खंडपीठ ने असंतोष जताया था। नए चयनित तीन मंजिला हॉस्टल में छह डॉर्मिटरी हैं, जिनमें लगभग 60 बिस्तरों की क्षमता मौजूद है। वर्तमान में हिरासत में मौजूद विदेशी नागरिकों को रखने के लिए यह जगह पर्याप्त मानी गई है।

सुरक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की तैयारी

सरकार की ओर से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, इस नए केंद्र पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। वहां पर्याप्त प्रशासनिक कर्मियों के साथ सुरक्षा बल, मेडिकल स्टाफ, सीसीटीवी (CCTV) निगरानी कैमरे और अग्निशमन सुरक्षा प्रणाली की समुचित व्यवस्था की जाएगी। उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि विदेशी नागरिकों को जल्द से जल्द और हर हाल में 28 सितंबर तक वहां शिफ्ट कर दिया जाए।

निर्वासन प्रक्रिया और लंबे समय से बंद नागरिक

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुईं विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO), कोलकाता, निधि रानी ने बताया कि चार मामलों में निर्वासन आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं और इन व्यक्तियों को उनके देश वापस भेजने के प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने अदालत को यह भी आश्वस्त किया कि सजा पूरी कर चुके अन्य विदेशी बंदियों के मामलों में भी जल्द आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

कार्यवाही के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि इन बंदियों में दो म्यांमार से और दो नाइजीरिया से हैं। इसके अलावा एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल है, जो पांच साल से अधिक समय से हिरासत में बना हुआ है।

अवैध हिरासत पर मुआवजे के तंत्र का ब्योरा तलब

खंडपीठ ने केवल स्थानांतरण तक ही अपना रुख सीमित नहीं रखा, बल्कि इस बात पर भी जवाब मांगा कि सजा पूरी होने के बाद जेल में रखे गए इन विदेशी नागरिकों को मुआवजा देने की क्या व्यवस्था है। अदालत ने राज्य सरकार और एफआरआरओ से मुआवजे के तंत्र पर विस्तृत जानकारी पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।

सवाल-जवाब

मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने अपनी जेल की सजा पूरी कर चुके विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर तक शिलांग के अस्थायी होल्डिंग सेंटर में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।
कितने विदेशी नागरिक सजा पूरी होने के बाद भी हिरासत में हैं?
राज्य सरकार की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार लगभग 30 विदेशी नागरिक अपनी सजा पूरी करने के बाद भी हिरासत में हैं।
अस्थायी डिटेंशन सेंटर के लिए किस इमारत को चुना गया है?
शिलांग के लाइतुमख्राह स्थित तीन मंजिला एमबोसे (MBOSE) हॉस्टल को चुना गया है, जिसमें 60 बिस्तरों की क्षमता है।
हिरासत में मौजूद बंदियों में किन देशों के नागरिक शामिल हैं?
अदालत को बताया गया कि बंदियों में दो म्यांमार, दो नाइजीरिया और एक बांग्लादेश का नागरिक शामिल है, जो पांच साल से अधिक समय से हिरासत में है।
क्या अदालत ने अवैध हिरासत के लिए मुआवजे पर भी सवाल पूछा है?
हां, खंडपीठ ने राज्य सरकार और एफआरआरओ से सजा पूरी होने के बाद भी हिरासत में रखे गए विदेशी नागरिकों को मुआवजा देने की व्यवस्था पर ब्योरा मांगा है।
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टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·8 दिन पहले

सज़ा पूरी होने के बाद भी किसी को जेल में रखना बिल्कुल सही नहीं है। अच्छा है कि कोर्ट ने इन्हें डिटेंशन सेंटर भेजने का कड़ा आदेश दिया है, क्योंकि समय पर कागजी कार्रवाई और मानवीय गरिमा दोनों का ध्यान रखना जरूरी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

सजा काटने के बाद भी जेल में रहना किसी प्रताड़ना से कम नहीं है। जब मैं पिछली बार शिलांग गया था, तो वहाँ की व्यवस्थाओं को देखकर समझ आया था कि ऐसे मामलों में कितनी प्रशासनिक सुस्ती होती है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·8 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने! वैसे लाइतुमख्राह वाले उस हॉस्टल में सिर्फ साठ बिस्तरों की ही तो व्यवस्था है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

सजा पूरी होने के बाद भी पांच साल से जेल में बंद रहना हैरान करने वाला है। क्या बाकी देशों को डिपोर्ट करने में सरकार को इतना वक्त क्यों लग जाता है?

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

करण भाई, सच कहा आपने। पाँच साल बहुत होते हैं! क्या आपको लगता है कि दूसरे देशों की एंबेसी समय पर कागज़ नहीं भेजतीं?

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