उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों की तल्खी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। कानपुर प्रवास के दौरान शुक्रवार को राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्य विपक्षी दल और उसके शीर्ष नेतृत्व को सीधे निशाने पर लिया। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की हालिया भेंट को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। जब इस बारे में उपमुख्यमंत्री से सवाल किया गया, तो उन्होंने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए बेहद व्यंग्यात्मक अंदाज में पलटवार किया और दावा कर दिया कि विपक्षी दल के मुखिया खुद उनसे दल बदलने के सिलसिले में मुलाकात कर चुके हैं।
सचान और अखिलेश की भेंट पर उपमुख्यमंत्री का तंज
कैबिनेट मंत्री राकेश सचान की सपा प्रमुख के साथ हुई बैठक के बाद राज्य में राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया था। मीडिया द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या मंत्री विपक्षी खेमे की ओर रुख कर सकते हैं, केशव प्रसाद मौर्य ने पूरा विमर्श ही पलट दिया। उन्होंने व्यंग्य कसते हुए टिप्पणी की, 'सपा प्रमुख अखिलेश यादव हमसे मिले थे, भाजपा में शामिल होने के लिए।' हालांकि, इस संक्षिप्त और चौंकाने वाले दावे के संदर्भ में उपमुख्यमंत्री ने किसी तारीख, समय या बैठक की विस्तृत पृष्ठभूमि की जानकारी साझा नहीं की। राजनीतिक विश्लेषक इसे विपक्षी खेमे की ओर से फैलाए जा रहे संशय को बेअसर करने की एक सोची-समझी राजनीतिक चुटकी मान रहे हैं।
विपक्षी पीडीए नारे की नई परिभाषा
सपा द्वारा चुनाव दर चुनाव आगे बढ़ाए जा रहे सामाजिक समीकरण यानी पीडीए के नारे पर भी उपमुख्यमंत्री ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने विपक्षी रणनीति को कटघरे में खड़ा करते हुए इस शब्द की अपनी अलग व्याख्या पेश की। मौर्य ने कहा कि असल में यह पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का गठबंधन नहीं, बल्कि परिवार डेवलपमेंट एजेंसी और परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी बनकर रह गया है। उन्होंने सीधा आरोप मढ़ा कि यह पूरा तंत्र असामाजिक तत्वों, अपराधियों, माफियाओं और दंगाइयों को सियासी ढाल मुहैया कराने के मकसद से चलाया जा रहा है, जिससे आम जनता का कोई सरोकार नहीं है।
आगामी चुनावों को लेकर पूर्ण बहुमत का भरोसा
साल 2027 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव को लेकर उपमुख्यमंत्री ने सत्ताधारी दल की संभावनाओं पर अटूट भरोसा जताया। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी सूबे में पूर्ण बहुमत के साथ फिर से अपनी हुकूमत बनाएगी। विपक्षी दल पर तंज कसते हुए उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 की बात तो दूर, समाजवादी पार्टी के लिए वर्ष 2047 तक भी सत्ता में लौटना नामुमकिन रहने वाला है। मौर्य इससे पहले भी कई मौकों पर विपक्ष के लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने की बात दोहरा चुके हैं।
मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया का समर्थन
वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच चल रही तकरार पर भी मौर्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने चुनावी शुचिता पर जोर देते हुए कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए त्रुटिहीन वोटर लिस्ट होना बेहद जरूरी है। निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान की हिमायत करते हुए उन्होंने साफ किया कि सूचियों के शुद्धिकरण की कवायद पूरी तरह नियमानुकूल है, जबकि विपक्षी दल इस प्रशासनिक प्रक्रिया को बेवजह राजनीतिक रंग देने में जुटे हैं।
























