सिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगकच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलींशेयर बाजार में आज 64 कंपनियों का एक्स-डेट एक्शन: टीएएएल टेक का स्टॉक स्प्लिट और 63 शेयरों पर डिविडेंड का मौकाराजस्थान के देशनोक में खेत की डिग्गी में डूबे तीन सगे भाई, एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गई जानलखनऊ में 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बांटे गए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोरझारखंड में गवार की सब्जी की बढ़ी मांग, बाजार में ₹100 किलो तक बिक रही उपजप्राथमिक बाजार में दस्तक देंगे दो नए पब्लिक इश्यू, 770 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारीहॉस्पिटैलिटी दिग्गज ओयो की पैरेंट कंपनी प्रिज्म को 6650 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मिली सेबी की हरी झंडीलाइव मैच: एशियाई खेल 2026: महिला क्रिकेट के खिताबी मुकाबले में श्रीलंका से भिड़ेगा भारत
सऊदी अरब में फंसे पिता को बचाने के लिए बेटी की भावुक मुहिम, जुटाए 2 करोड़ रुपये से अधिकउत्तराखंड
21 सित॰ 2026, 2:06 pm (18 घंटे पहले)· 0

सऊदी अरब में फंसे पिता को बचाने के लिए बेटी की भावुक मुहिम, जुटाए 2 करोड़ रुपये से अधिक

सऊदी अरब में सड़क हादसे और भारी जुर्माने के कारण आठ साल से फंसे इंद्रमणि नौटियाल की रिहाई के लिए उनकी बेटी दीपिका ने जनसहयोग से 2 करोड़ रुपये से अधिक जुटा लिए हैं.

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित एक ग्रामीण परिवार पिछले आठ वर्षों से अपने मुखिया की वतन वापसी की राह देख रहा है. गोरसाड़ा गांव के रहने वाले इंद्रमणि नौटियाल रोजगार के सिलसिले में विदेश गए थे, लेकिन वहां एक सड़क दुर्घटना के बाद उत्पन्न कानूनी संकट में ऐसे उलझे कि अपनी सजा पूरी करने के बावजूद घर नहीं लौट सके. अब उनकी बेटी दीपिका नौटियाल ने अपने पिता को स्वदेश लाने के लिए एक व्यापक जन-अभियान छेड़ दिया है, जिसके समर्थन में स्थानीय ग्रामीणों से लेकर कई सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि खड़े हो चुके हैं.

सड़क दुर्घटना और कानूनी उलझनों की पूरी कहानी

इंद्रमणि नौटियाल उत्तरकाशी जिले के गाजणा क्षेत्र के गोरसाड़ा गांव के निवासी हैं. अपने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को सुधारने और बेहतर आजीविका की तलाश में वह वर्ष 2018 में सऊदी अरब पहुंचे थे. वहां उन्होंने रियाद शहर की एक निजी कंपनी में बतौर ट्रक चालक काम शुरू किया था. काम के दौरान ही वर्ष 2018 में उनके वाहन से एक गंभीर सड़क दुर्घटना घटित हो गई.

ये भी पढ़ें

इस सड़क हादसे के मामले में स्थानीय अदालत ने कानूनी कार्यवाही करते हुए इंद्रमणि को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई. इंद्रमणि ने अदालत द्वारा मुकर्रर की गई अपनी एक साल की सजा पूरी तरह काट ली. हालांकि, कारावास की अवधि समाप्त होने के बाद भी उनकी परेशानियां खत्म होने के बजाय और अधिक जटिल हो गईं.

2.29 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना बना रिहाई में रोड़ा

अदालती प्रक्रिया और जांच के दौरान यह बात सामने आई कि जिस ट्रक को इंद्रमणि चला रहे थे, उसके बीमा और रजिस्ट्रेशन से जुड़े कागजातों में कुछ कमियां मौजूद थीं. वाहन से जुड़ी इन औपचारिक खामियों के चलते कंपनी के मालिक पर 9 लाख सऊदी रियाल का भारी-भरकम जुर्माना आयद कर दिया गया. भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 2 करोड़ 29 लाख रुपये बैठती है.

इतनी बड़ी धनराशि जमा न हो पाने की वजह से इंद्रमणि की रिहाई और भारत वापसी का मामला अधर में लटका रहा. परिवार का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी जुर्माने की यह भारी राशि अदा नहीं की जा सकी है, जिसके कारण वह वहां से निकल नहीं पा रहे हैं. इसके साथ ही परिजनों का यह भी आरोप है कि संबंधित निजी कंपनी ने इंद्रमणि का पासपोर्ट और अन्य जरूरी आधिकारिक दस्तावेज अपने कब्जे में रख छोड़े हैं, हालांकि इन दावों की वास्तविक स्थिति संबंधित देश की कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है.

बेटी दीपिका की मुहिम और ग्रामीणों का अभूतपूर्व सहयोग

विदेश में कानूनी संकट का सामना कर रहे पिता की बेबसी देखकर उनकी बेटी दीपिका नौटियाल ने उन्हें वापस लाने का बीड़ा उठाया. दीपिका ने सोशल मीडिया और जनसंचार माध्यमों के जरिए जनता, सरकार और जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई. देखते ही देखते इस मानवीय अपील ने एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया, जिसमें उत्तराखंड समेत देश और विदेश से लोग सहायता के लिए हाथ बढ़ाने लगे.

इसी जनसहयोग की कड़ी में उत्तरकाशी के भवान गांव के ग्रामीणों ने भी मिसाल पेश की. ग्राम प्रधान सतवीर परमार की पहल पर ग्रामीणों ने आपस में धन एकत्र करके 41 हजार 901 रुपये की सहायता राशि जुटाई. इसके बाद ग्राम प्रधान सतवीर परमार ने दीपिका नौटियाल को 41,901 रुपये का चेक सौंपा. दीपिका की इस अपील के बाद से अब तक 2 करोड़ रुपये से अधिक की मदद एकत्र हो चुकी है. हालांकि, जुर्माने की पूरी रकम यानी 2.29 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी भी कुछ और सहयोग की दरकार बनी हुई है.

सवाल-जवाब

इंद्रमणि नौटियाल सऊदी अरब कब और क्यों गए थे?
इंद्रमणि नौटियाल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वर्ष 2018 में रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए थे, जहां वह रियाद में ट्रक चालक के रूप में कार्यरत थे.
सऊदी अरब में इंद्रमणि नौटियाल पर क्या कानूनी कार्रवाई हुई?
साल 2018 में हुए एक सड़क हादसे के मामले में स्थानीय अदालत ने उन्हें एक साल की जेल की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने पूरा कर लिया था.
सजा पूरी होने के बावजूद वह भारत क्यों नहीं लौट पाए?
ट्रक के बीमा और पंजीकरण में खामियों के चलते कंपनी मालिक पर 9 लाख सऊदी रियाल यानी लगभग 2.29 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगा था, जो जमा न होने के कारण उनकी वापसी रुक गई.
उनकी बेटी दीपिका नौटियाल ने क्या कदम उठाया?
दीपिका ने अपने पिता की रिहाई के लिए जनता, जनप्रतिनिधियों और सरकार से मदद मांगते हुए एक बड़ा जनसहयोग अभियान शुरू किया.
इस अभियान के जरिए अब तक कितनी सहायता राशि जुटाई जा चुकी है?
दीपिका की अपील के बाद से अब तक 2 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि एकत्र हो चुकी है.
भवान गांव के ग्रामीणों ने इस मुहिम में क्या सहयोग दिया?
ग्राम प्रधान सतवीर परमार की अगुवाई में भवान गांव के ग्रामीणों ने 41 हजार 901 रुपये जुटाकर चेक के माध्यम से दीपिका को सौंपे.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·9 घंटे पहले

बेटी की हिम्मत देख कर आंखें नम हो गईं। जब अपने संकट में फंसते हैं तो समझ आता है कि परिवार के लिए अपनों का साथ क्या होता है। भगवान करे इंद्रमणि जी जल्द अपने घर लौटें।

Ravikash Gupta@ravikash·10 घंटे पहले

एक ड्राइवर की गलती से हुए हादसे का जुर्माना कंपनी पर लगना चाहिए था, पर भुगतना एक गरीब पिता को पड़ रहा है। आठ साल जेल के बाद भी वतन न लौट पाना दिल दहला देने वाला है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 घंटे पहले

रवि जी, सिस्टम की ऐसी लाचारी देखकर सचमुच गुस्सा आता है। एक गरीब परिवार आठ साल से अपनों से दूर है, यह कल्पना से परे है।

Rohan Verma@rohan-verma·17 घंटे पहले

उत्तरकाशी के एक प्रवासी श्रमिक की रिहाई के लिए बेटी दीपिका द्वारा दो करोड़ से अधिक जुटाना केवल एक परिवार का संघर्ष नहीं, बल्कि खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों की विधिक और प्रशासनिक असुरक्षा का गंभीर मामला है। इस प्रकरण ने एक बार फिर विदेशी श्रम बाजारों में भारतीय श्रमिकों के कानूनी अधिकारों और नियोक्ता कंपनियों द्वारा पासपोर्ट जब्ती जैसे शोषणकारी मुद्दों पर नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर किया है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 घंटे पहले

यह मामला खाड़ी देशों की न्याय प्रणालियों और स्थानीय श्रम कानूनों की जटिलताओं को उजागर करता है, जहाँ सजा पूरी होने के बावजूद नागरिक विधिक और वित्तीय पेचीदगियों में उलझ कर रह जाते हैं। इस तरह के मामलों में विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों के माध्यम से राजनयिक और कानूनी हस्तक्षेप बेहद आवश्यक हो जाता है, ताकि कागजी कमियों या कंपनी स्तर के विवादों के कारण किसी भारतीय नागरिक की स्वतंत्रता अनिश्चितकाल तक बाधित न हो।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp