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शालीमार बाग में सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद पर आधी रात चला बुलडोजर, एआईएमआईएम ने जताया कड़ा विरोधदिल्ली
23 सित॰ 2026, 7:47 am (37 दिन पहले)· 2

शालीमार बाग में सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद पर आधी रात चला बुलडोजर, एआईएमआईएम ने जताया कड़ा विरोध

दिल्ली के शालीमार बाग में सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत देर रात एक मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई की गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों और एआईएमआईएम नेताओं ने भारी हंगामा किया।

देश की राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण की योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक अमले ने देर रात एक मस्जिद के ढांचे पर बुलडोजर चला दिया। रात के अंधेरे में अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई की जानकारी फैलते ही आसपास के इलाकों में हलचल मच गई और स्थानीय निवासियों ने मौके पर एकत्रित होकर गहरा असंतोष व्यक्त किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के स्थानीय प्रतिनिधि भी घटनास्थल पर जमा हो गए और प्रशासनिक निर्णय का कड़ा विरोध करने लगे।

देर रात तीन बजे की कार्रवाई और सहारनपुर की घटना से तुलना

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की दिल्ली इकाई के प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमई ने प्रशासनिक कदम पर तीखा ऐतराज जताते हुए दावा किया कि यह ध्वस्तीकरण रात करीब 3 बजे अंजाम दिया गया। उन्होंने इस घटनाक्रम की तुलना उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुए पुराने विवाद से करते हुए इसे सहारनपुर पार्ट-2 का नाम दिया। जमई के मुताबिक स्थानीय आबादी और धार्मिक स्थल की देखरेख करने वालों को किसी भी तरह की पूर्व सूचना या मोहलत दिए बिना एकाएक यह कदम उठाया गया, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया।

इमाम से मुलाकात पर रोक और धार्मिक ग्रंथों को हटाने की अपील

शोएब जमई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए साझा किया कि पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी से मिले निर्देशों के बाद उनकी टीम तुरंत शालीमार बाग पहुंची थी। जमई ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों और पुलिस अमले ने उन्हें मस्जिद के इमाम से मिलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के चारों तरफ 100 से 200 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग करके आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी।

सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में जमई ने प्रशासन से यह विनती की कि कम से कम पवित्र ग्रंथ कुरान को ढांचे से सुरक्षित बाहर निकालने की इजाजत दी जाए। उन्होंने मस्जिद प्रबंधन समिति के डर का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों को आशंका है कि पूरे निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा। अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि संविधान की शपथ लेकर काम करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को नियमों और संवेदनशील प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।

राजधानी में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी प्रशासनिक कार्रवाइयां

दिल्ली के भीतर सार्वजनिक रास्तों और सरकारी जमीनों पर बने अनधिकृत कब्जों को हटाने के क्रम में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के नजदीकी क्षेत्रों में भी नगर निगम और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया था। उस दौरान सार्वजनिक पार्कों के भीतर गैरकानूनी तरीके से तैयार की गई दुकानों और अस्थायी ढांचों को बुलडोजर की मदद से जमींदोज किया गया था। सड़क नेटवर्क को व्यवस्थित करने और यातायात को सुगम बनाने के नाम पर लगातार चल रही इन कार्रवाइयों को लेकर समय-समय पर विवाद और विरोध प्रदर्शन सामने आते रहे हैं।

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सवाल-जवाब

दिल्ली के शालीमार बाग में मस्जिद पर बुलडोजर क्यों चलाया गया?
प्रशासन ने शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण की योजना को पूरा करने के लिए मस्जिद के ढांचे पर बुलडोजर कार्रवाई की।
कार्रवाई किस समय की गई और किसने विरोध किया?
एआईएमआईएम दिल्ली के अध्यक्ष शोएब जमई के अनुसार यह कार्रवाई देर रात करीब 3 बजे की गई, जिसका स्थानीय लोगों और उनकी पार्टी ने विरोध किया।
शोएब जमई ने इस मामले में क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कोई पूर्व मोहलत नहीं दी, 100-200 मीटर का दायरा सील कर दिया और उन्हें मस्जिद के इमाम से मिलने नहीं दिया गया।
शोएब जमई ने प्रशासन से क्या विशेष अपील की?
जमई ने अधिकारियों से अपील की कि उन्हें मस्जिद के अंदर से पवित्र कुरान को सुरक्षित बाहर निकालने की इजाजत दी जाए।
क्या दिल्ली में हाल ही में कोई अन्य बुलडोजर कार्रवाई हुई थी?
हाल ही में पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के पास सार्वजनिक पार्कों में बनी अवैध दुकानों को भी बुलडोजर से हटाया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·36 दिन पहले

आधी रात को इस तरह की कार्रवाई से तनाव तो बढ़ना ही था, प्रशासन को कम से कम पहले नोटिस देना चाहिए था।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·36 दिन पहले

दिव्या जी, सही कहा आपने, पर रात के 3 बजे बुलडोजर चलाने की क्या जल्दी थी, समझ नहीं आया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 दिन पहले

आधी रात को इस तरह अचानक बुलدोजर चलाना किसी भी शहर के लिए ठीक नहीं है। जब मैं कुछ साल पहले शालीमार बाग रहता था, तब भी ट्रैफिक की समस्या को लेकर ऐसी चर्चाएं होती थीं, लेकिन रात के वक्त बिना किसी को बताए कार्रवाई करना लोगों को डरा देता है। ओवैसी की पार्टी के आने से मामला और तूल पकड़ गया है।

Rohan Verma@rohan-verma·36 दिन पहले

आधी रात को ऐसी कार्रवाई वाकई हैरानी वाली है, लेकिन सिर्फ बिना नोटिस के बात कहने से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती। क्या सच में सड़क चौड़ीकरण का कोई दूसरा विकल्प नहीं था या प्रशासन ने पहले कोई चेतावनी दी थी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 दिन पहले

रोहन भाई, सही सवाल उठाया आपने। पर जब रात के तीन बजे बुलडोजर चलता है, तो क्या सच में कोई नोटिस दिया गया था या सब कुछ अचानक हुआ?

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