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शव की अदला-बदली पर जयपुर के अस्पताल में हंगामा, बीस किमी दूर ले जाने के बाद खुला भेदराजस्थान
19 सित॰ 2026, 11:07 am (6 दिन पहले)· 4

शव की अदला-बदली पर जयपुर के अस्पताल में हंगामा, बीस किमी दूर ले जाने के बाद खुला भेद

जयपुर के आंच अस्पताल से परिजनों को कथित तौर पर गलत शव थमा दिया गया, जिसका खुलासा बीस किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हुआ। इसके विरोध में गुस्साए परिजनों ने परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक निजी चिकित्सा संस्थान की भारी लापरवाही से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एसएल मार्ग पर स्थित आंच अस्पताल में एक मृतक के परिजनों को कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति का शव सौंप दिया गया। परिवार के लोग जब उस पार्थिव देह को लेकर लगभग बीस किलोमीटर दूर निकल गए, तब जाकर उन्हें इस गंभीर गलती का अहसास हुआ। इसके बाद परिजन भारी आक्रोश में वापस लौटे और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए विरोध जताना शुरू कर दिया।

बीस किलोमीटर आगे जाकर सामने आई पहचान की चूक

पीड़ित परिवार का कहना है कि मोर्चरी और अस्पताल कर्मचारियों ने शव सुपुर्द करते वक्त पहचान की बुनियादी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। वे शव को लेकर अंतिम संस्कार के लिए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन लगभग बीस किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जब पार्थिव शरीर की जांच हुई, तो पता चला कि यह उनके परिजन का शव नहीं था। किसी अनजान व्यक्ति का शव हाथ में देखकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए और तुरंत अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही के खिलाफ लामबंद हो गए।

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अस्पताल गेट पर परिजनों का धरना प्रदर्शन

गलत शव सौंपे जाने की बात उजागर होते ही मृतक के रिश्तेदारों और परिचितों में तीव्र आक्रोश फैल गया। वे तुरंत अस्पताल पहुंचे और मुख्य द्वार के बाहर धरना देकर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि इतनी बड़ी भूल केवल एक सामान्य मानवीय चूक नहीं हो सकती, बल्कि यह अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का प्रमाण है। परिजनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच कराई जाए, साथ ही शवों के प्रबंधन और पहचान में कोताही बरतने वाले कर्मियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक गाड़ियों और बसों के पहुंचने से बढ़ा जमावड़ा

हंगामे और धरने की सूचना मिलते ही मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों की कई गाड़ियां और दो बसें भी पहुंचीं। अस्पताल परिसर के बाहर भारी तादाद में लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे वहां तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों पर जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

सवाल-जवाब

यह घटना जयपुर के किस अस्पताल में हुई?
यह मामला जयपुर के एसएल मार्ग स्थित आंच अस्पताल का है।
परिजनों को शव बदलने की जानकारी कब और कैसे हुई?
परिजनों को अस्पताल से लगभग बीस किलोमीटर दूर जाने के बाद पता चला कि उन्हें गलत शव सौंपा गया है।
गलत शव मिलने के बाद परिजनों ने क्या कदम उठाया?
परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर मुख्य गेट के बाहर धरना शुरू कर दिया और प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कर रहे परिजनों की मुख्य मांगें क्या हैं?
परिजन पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच और लापरवाही के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
घटना के बाद अस्पताल के बाहर क्या स्थिति बनी?
अस्पताल के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई, और स्थिति को देखते हुए दो बसें तथा प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·5 दिन पहले

यह घटना न केवल चिकित्सा प्रबंधन की बुनियादी लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे अंतिम समय में परिजनों के साथ होने वाली संवेदनहीनता गहरे मानसिक आघात का कारण बनती है। इस तरह की प्रणालीगत चूकें किसी भी शहर या संस्थान की छवि को भारी नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे पर्यटन या चिकित्सा यात्रा के लिए आने वाले लोगों का विश्वास भी डगमगा सकता है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मोर्चरी प्रक्रियाओं में सख्त डिजिटल ऑडिट और पारदर्शी प्रोटोकॉल अनिवार्य किए जाने चाहिए ताकि जवाबदेही तय हो सके।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह घटना न केवल मानवीय संवेदनाओं के विरुद्ध है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कॉर्पोरेट प्रशासन और प्रोटोकॉल के घोर अभाव को दर्शाती है। ऐसे मामलों में अस्पतालों की साख को भारी वित्तीय और ब्रांड क्षति उठानी पड़ती है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी डगमगाता है। यदि प्रबंधन ने सख्त बायोमीट्रिक या डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम अपनाया होता, तो यह चूक टल सकती थी। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कड़े अनुपालन और जवाबदेही तय करना अनिवार्य होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह गंभीर मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक स्वास्थ्य नीति और निजी अस्पतालों के नियमन पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। यदि इस तरह के संवेदनशील मामलों में मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन नहीं होता है, तो सरकार को स्वास्थ्य संस्थानों के लाइसेंस और जवाबदेही तय करने वाले कानूनों को और सख्त करना होगा। ऐसे मामलों में प्रशासनिक उदासीनता जनता का स्वास्थ्य तंत्र से विश्वास पूरी तरह तोड़ सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

जयपुर के इस निजी अस्पताल में हुई यह घटना मोर्चरी प्रबंधन की बुनियादी प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करती है। पहचान के नियमों की अनदेखी न केवल मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है, बल्कि यह संस्थागत नियंत्रण पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। इस मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को मोर्चरी संचालन के लिए सख्त मानक तय करने होंगे, ताकि इस तरह की अमानवीय लापरवाही की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

इस मामले में कानूनी और फोरेंसिक दृष्टिकोण से यह देखना अनिवार्य होगा कि मोर्चरी रजिस्टर में प्रविष्टियों और टैगिंग की प्रणाली में कहाँ चूक हुई। यदि जिला प्रशासन इस पर त्वरित विधिक कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निलंबन या आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं करता है, तो ऐसी संस्थागत लापरवाही के मामलों में न्याय सुनिश्चित करना कठिन होगा।

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