रायपुर में बीमारी ठीक करने के बहाने महिला से 15 तोला सोना और नकदी ऐंठी, 3 फर्जी साधु फरारदिल्ली के झारखंड भवन में लिफ्ट अटकने से पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के 6 सदस्य हुए अचेत, परिसर में फूटा गुस्सावृश्चिक राशिफल 1 अक्टूबर: आर्थिक फैसलों में बरतें संयम, रिश्तों में धैर्य और सुनने की आदत से बनेगी बातअक्टूबर की शुरुआत में 19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए प्रमुख शहरों में नए दामअजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंअमेरिकी ऊर्जा सेक्टर में दक्षिण कोरिया करेगा 200 अरब डॉलर का भारी निवेश, अलास्का एलएनजी और आठ परमाणु संयंत्रों को मिलेगा विस्तारपश्चिम एशिया से कच्चा तेल आपूर्ति सुधरने के बीच डब्ल्यूटीआई फिसलकर 89 डॉलर के करीब पहुंचाअमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की गिरावट से कनाडाई डॉलर दो महीने के निचले स्तर पर फिसलाआयात में 5.8 फीसदी की जोरदार छलांग से ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सिमटा
शिलांग जलापूर्ति योजना पर वीपीपी ने उठाए सवाल, ठेका देने से पहले पारदर्शिता की मांगमेघालय
25 अग॰ 2026, 5:49 pm (37 दिन पहले)· 4

शिलांग जलापूर्ति योजना पर वीपीपी ने उठाए सवाल, ठेका देने से पहले पारदर्शिता की मांग

मेघालय में विपक्ष के नेता ने 850 करोड़ रुपये से अधिक की न्यू शिलांग वाटर सप्लाई स्कीम पर सवाल उठाते हुए वित्तीय पारदर्शिता और टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।

मेघालय विधानसभा के चल रहे ऑटम सेशन के दौरान राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब एक प्रमुख विपक्षी दल ने भारी-भरकम जल परियोजना को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे। वॉयस ऑफ द पीपूल पार्टी के नेता आर्डेंट मिलर बसाियावमोइत ने शून्यकाल के दौरान सदन में यह मुद्दा उठाया और 850 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली न्यू शिलांग वाटर सप्लाई स्कीम फेज-2 पर स्पष्टीकरण मांगा। उनका मुख्य जोर इस बात पर था कि अनुबंध को अंतिम रूप देने से पहले जनता के पैसे के उपयोग में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए।

टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय प्रतिबद्धता पर सवाल

आर्डेंट मिलर बसाियावमोइत ने सदन को बताया कि यह मामला केवल किसी सामान्य टेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य के खजाने से निकलने वाली 850 करोड़ रुपये की बड़ी रकम जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह स्पष्ट जिम्मेदारी बनती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि जनता के एक-एक पाई का खर्च पारदर्शी तरीके से हो और इससे नागरिकों को सीधा लाभ मिले। उनके मुताबिक, चूंकि अभी टेंडर प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और अनुबंध को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है, इसलिए विधानसभा के पास यह उचित अवसर है कि वह वित्तीय रूप से राज्य के बंधने से पहले जरूरी उत्तर हासिल कर ले।

ये भी पढ़ें

एकमुश्त पैकेज और स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी

चर्चा के दौरान इस बात पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई कि पूरी फेज-2 परियोजना को एक ही बड़े पैकेज के रूप में टेंडर के लिए जारी कर दिया गया है। नेता ने दावा किया कि सरकार ने पहले स्थानीय ठेकेदारों को आश्वासन दिया था कि कार्यों को इस तरह से एकमुश्त नहीं बांटा जाएगा। इस नई स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई आश्वासन दिया गया था, तो सरकार को आज देश और सदन के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस नीति में बदलाव क्यों किया गया।

प्रतियोगिता सीमित होने की आशंका

आर्डेंट मिलर बसाियावमोइत ने तर्क दिया कि पूरे प्रोजेक्ट को 850.58 करोड़ रुपये के सिंगल पैकेज में समेटने से मेघालय के स्थानीय ठेकेदारों की राह मुश्किल हो जाएगी। कई सक्षम स्थानीय फर्मों के पास इतने बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट के लिए जरूरी वित्तीय और तकनीकी क्षमता नहीं होती, जिससे उनकी भागीदारी सीधे तौर पर सीमित हो जाती है। उन्होंने साफ किया कि यह मांग किसी खास वर्ग को प्राथमिकता देने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि टेंडर की संरचना स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का गला न घोटे।

फेज-1 की प्रगति और बिलों का भुगतान

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने परियोजना के पहले चरण यानी फेज-1 की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने जानना चाहा कि क्या फेज-1 का काम पूरी तरह संतोषजनक ढंग से पूरा हो चुका है और क्या वह वर्तमान में तय क्षमता के अनुसार पानी की आपूर्ति कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर किस आधार पर 850 करोड़ रुपये के भारी बजट वाले दूसरे चरण की इतनी जल्दी जरूरत आन पड़ी और कार्यों को छोटे तथा व्यावहारिक हिस्सों में क्यों नहीं विभाजित किया गया।

राज्य की मौजूदा वित्तीय सेहत को लेकर उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत ठेकेदारों के लंबित बिलों का भी हवाला दिया। उनके अनुसार, सरकार खुद यह स्वीकार कर चुकी है कि बकाए बिल 900 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुके हैं। ऐसे में यदि राज्य पहले से ही इतने बड़े वित्तीय दबाव से जूझ रहा है, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि वह बिना अतिरिक्त आर्थिक संकट पैदा किए 850 करोड़ रुपये की इस नई परियोजना का वित्तपोषण कैसे करेगी। अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि अनुबंध फाइनल होने से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, बिल ऑफ क्वांटिटीज और वित्तीय खाका सदन के पटल पर रखा जाए।

सवाल-जवाब

न्यू शिलांग वाटर सप्लाई स्कीम फेज-2 की अनुमानित लागत कितनी है?
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 850.58 करोड़ रुपये है।
इस परियोजना को लेकर किसने सवाल उठाए हैं?
वॉयस ऑफ द पीपूल पार्टी के नेता आर्डेंट मिलर बसाियावमोइत ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया है।
टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी मुख्य आपत्ति क्या थी?
आपत्ति यह थी कि पूरे प्रोजेक्ट को एक सिंगल पैकेज के रूप में टेंडर किया गया है, जिससे स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी सीमित हो सकती है।
जल जीवन मिशन के तहत लंबित बिलों की राशि कितनी बताई गई है?
सरकार के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत लंबित ठेकेदार बिल 900 करोड़ रुपये से अधिक हो चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 दिन पहले

यह मामला केवल एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि वित्तीय जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता का गंभीर सवाल है। 850 करोड़ रुपये से अधिक के इस भारी-भरकम टेंडर को सिंगल पैकेज में जारी किए जाने से स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी सीमित होने की जो आशंका जताई गई है, वह निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और लोकधन के प्रबंधन पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। यदि सरकार समय रहते बिल ऑफ क्वांटिटीज और लागत का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं करती है, तो यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·36 दिन पहले

मेघालय की इस 850 करोड़ रुपये की जलापूर्ति परियोजना में सिंगल पैकेज टेंडरिंग का मुद्दा केवल स्थानीय ठेकेदारों के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वृहद वित्तीय गतिकी और कॉरपोरेट-स्तरीय प्रतिस्पर्धा को भी प्रभावित करता है। यदि नीति निर्धारकों ने टेंडर की शर्तों में तकनीकी अहर्ताओं को अत्यधिक सख्त रखा है, तो इससे चुनिंदा बड़ी कंपनियों का एकाधिकार बन सकता है, जिससे लागत बढ़ने और राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। पारदर्शी वित्तीय मूल्यांकन और निष्पक्ष बोली प्रक्रिया के अभाव में ऐसे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में पूंजी का कुशल आवंटन बाधित हो सकता है, जिसका सीधा असर राज्य की वित्तीय सेहत पर पड़ेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp