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श्रीगंगानगर में नगर परिषद सभापति चुनाव से पहले गरमाई सियासत, पार्षद को गैंगस्टर के नाम से धमकी मिलने पर तीन लोगों पर केस दर्जराजस्थान
20 सित॰ 2026, 12:57 pm (5 दिन पहले)· 0

श्रीगंगानगर में नगर परिषद सभापति चुनाव से पहले गरमाई सियासत, पार्षद को गैंगस्टर के नाम से धमकी मिलने पर तीन लोगों पर केस दर्ज

श्रीगंगानगर नगर परिषद सभापति चुनाव से ठीक पहले निर्दलीय पार्षद को धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। पुलिस ने निर्दलीय प्रत्याशी संजय मुंदड़ा, व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

श्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति चुनाव से ठीक पहले स्थानीय सियासत में जबरदस्त हलचल मच गई है। चुनावी मुकाबले के बीच अब पुलिस केस और गंभीर आरोपों का दौर शुरू हो चुका है। एक निर्दलीय पार्षद ने सीधे तौर पर यह आरोप लगाया है कि उन्हें अज्ञात फोन कॉल के जरिए एक खास उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता पार्षद हेमराज चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। इस प्राथमिकी में निर्दलीय सभापति प्रत्याशी संजय मुंदड़ा, स्थानीय व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह को नामजद किया गया है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, पार्षद को आई कॉल में कथित रूप से एक गैंगस्टर के नाम का सहारा लिया गया ताकि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। फोन करने वाले ने साफ तौर पर कहा कि मतदान के दिन पार्षद को संजय मुंदड़ा के पक्ष में ही अपना वोट देना होगा। इस घटनाक्रम के उजागर होते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और मामले की तकनीकी जांच आरंभ कर दी गई है। श्रीगंगानगर नगर परिषद में सभापति की कुर्सी के लिए मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अजय दावड़ा और पार्टी से बगावत कर निर्दलीय के रूप में उतरे संजय मुंदड़ा के बीच बना हुआ है। मतदान से ऐन पहले इस तरह की धमकी का मामला सामने आने से समूचे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।

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गैंगस्टर के नाम पर दबाव बनाने का सनसनीखेज आरोप

निर्दलीय पार्षद हेमराज चौधरी ने पुलिस थाने में औपचारिक तहरीर देकर पूरे घटनाक्रम का ब्योरा दिया है। उन्होंने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया कि उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने कथित तौर पर एक कुख्यात गैंगस्टर के नाम की धौंस जमाई। उसने दो टूक लहजे में निर्देश दिया कि नगर परिषद सभापति चुनाव में उन्हें केवल और केवल निर्दलीय प्रत्याशी संजय मुंदड़ा के पक्ष में ही मतदान करना होगा। पार्षद का कहना है कि कॉल के दौरान उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया और अनुचित तरीके से मतदान को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इस बातचीत के बाद पार्षद ने सुरक्षा की चिंता जताते हुए सीधे पुलिस से संपर्क किया और कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए केस दर्ज करवाया।

संजय मुंदड़ा, अशोक चांडक और मुकेश शाह पर कानूनी शिकंजा

पार्षद हेमराज चौधरी की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन प्रमुख व्यक्तियों के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज की है। इसमें निर्दलीय सभापति प्रत्याशी संजय मुंदड़ा के अलावा नामी व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह शामिल हैं। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की वास्तविक सच्चाई अभी साबित होना बाकी है। पुलिस की जांच टीम अब तकनीकी विश्लेषण में जुट गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जिस मोबाइल नंबर से धमकी भरी कॉल आई थी, वह किसके नाम पर पंजीकृत है, वास्तविक कॉल करने वाला कौन था और फोन पर वास्तव में किस गैंगस्टर के नाम का उल्लेख किया गया था। इस पड़ताल में संबंधित नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और टावर लोकेशन जैसे अहम डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।

अजय दावड़ा बनाम संजय मुंदड़ा: रोचक हुआ चुनावी गणित

श्रीगंगानगर नगर परिषद में सभापति का मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अजय दावड़ा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं पार्टी के भीतर बगावत का झंडा उठाकर संजय मुंदड़ा बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में डटे हुए हैं। इस दोतरफा खींचतान में नगर परिषद के प्रत्येक निर्वाचित पार्षद का समर्थन दोनों ही गुटों के लिए निर्णायक साबित होने वाला है। सभापति पद की कुर्सी हासिल करने के लिए पार्षदों को अपने पाले में खींचने की सियासी कवायद लगातार चल रही थी, लेकिन मतदान से पहले धमकी के इस मामले ने पूरे चुनावी माहौल को बेहद तनावपूर्ण और संवेदनशील बना दिया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष तफ्तीश पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कॉल के पीछे वास्तविक सूत्रधार कौन था और इस धमकी के पीछे क्या साजिश थी।

जांच के बाद सामने आएंगे तथ्य, चुनाव पर टिकी नजरें

एफआईआर दर्ज करने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जांच अधिकारी तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ शिकायत में दर्ज तमाम बिंदुओं की सिलसिलेवार तस्दीक कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। वर्तमान में इस मामले में केवल शिकायतकर्ता पार्षद के आरोप और प्राथमिकी में शामिल नाम ही सामने आए हैं। नामजद आरोपियों की तरफ से यदि कोई आधिकारिक पक्ष या स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे भी निष्पक्ष जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। मतदान से ठीक पहले घटे इस पूरे घटनाक्रम ने श्रीगंगानगर की सियासत का तापमान चरम पर पहुंचा दिया है। अब शहरवासियों और राजनीतिक जानकारों की नजरें एक तरफ जहां पुलिस की जांच पर हैं, वहीं दूसरी ओर सभापति पद के लिए होने वाले मतदान के नतीजों पर भी टिकी हुई हैं।

सवाल-जवाब

श्रीगंगानगर में किस चुनाव को लेकर विवाद हुआ है?
श्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति पद के चुनाव को लेकर यह विवाद सामने आया है।
धमकी मिलने की शिकायत किस पार्षद ने दर्ज कराई है?
निर्दलीय पार्षद हेमराज चौधरी ने पुलिस में धमकी भरा फोन आने की शिकायत दर्ज कराई है।
पार्षद को किसके पक्ष में वोट डालने के लिए कहा गया था?
पार्षद के अनुसार, उन्हें निर्दलीय सभापति प्रत्याशी संजय मुंदड़ा के पक्ष में मतदान करने के लिए धमकाया गया था।
दर्ज की गई एफआईआर में किन लोगों के नाम शामिल हैं?
एफआईआर में निर्दलीय प्रत्याशी संजय मुंदड़ा, व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह के नाम दर्ज किए गए हैं।
सभापति पद के लिए मुख्य मुकाबला किन प्रत्याशियों के बीच है?
यह मुकाबला भाजपा प्रत्याशी अजय दावड़ा और निर्दलीय के रूप में उतरे भाजपा के बागी संजय मुंदड़ा के बीच है।
पुलिस इस मामले में क्या कदम उठा रही है?
पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और फोन कॉल से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों व कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·4 दिन पहले

स्थानीय निकाय चुनावों में आपराधिक तत्वों और बाहुबल के इस्तेमाल का यह आरोप लोकतंत्र के सबसे बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर चिंता का विषय है। चुनावी प्रक्रिया में व्यावसायिक हितों, राजनीतिक बगावत और गैंगस्टर के नाम की धमकी का यह गठजोड़ निष्पक्ष मतदान को खतरे में डालता है। अब सबकी नजरें पुलिस की तकनीकी जांच पर टिकी हैं; केवल त्वरित और पारदर्शी जांच ही यह साफ कर सकती है कि यह चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करने की वास्तविक साजिश है या ऐन चुनाव से पहले की कोई राजनीतिक पैंतराबाजी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

स्थानीय निकायों के चुनाव में बागी प्रत्याशियों की मौजूदगी और आपराधिक तत्वों के इस्तेमाल का आरोप लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता पर गंभीर सवाल उठाता है। श्रीगंगानगर में आधिकारिक प्रत्याशी और बागी उम्मीदवार के बीच जारी कांटे की टक्कर में गैंगस्टर के नाम पर धमकी की घटना यह दर्शाती है कि स्थानीय सत्ता पाने के लिए किस हद तक दबाव की राजनीति का सहारा लिया जा रहा है। ऐसे मामलों में पुलिस प्रशासन द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी तकनीकी जांच के जरिए सुरक्षा का माहौल बनाना चुनाव परिणाम और भावी स्थानीय शासन के लिए बेहद निर्णायक साबित होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

अर्जुन जी के विश्लेषण से आगे बढ़ते हुए, नगर निकायों में कारोबारी वर्ग, कॉलोनाइजरों और आपराधिक तत्वों की यह सांठगांठ सिर्फ चुनावी प्रक्रिया को ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और शहरी विकास को भी नुकसान पहुंचाती है। श्रीगंगानगर जैसे व्यापारिक केंद्र में यदि स्थानीय शासन का चुनाव डर और धमकियों के साये में होगा, तो इससे व्यावसायिक भरोसे और रियल एस्टेट व इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। नगर परिषद के वित्तीय फैसले और नीतियां पारदर्शी रहें, इसके लिए चुनावी शुचिता के साथ-साथ अपराधियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई अनिवार्य है ताकि भावी आर्थिक विकास का माहौल बाधित न हो।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

चुनाव प्रक्रिया में आपराधिक तत्वों और गैंगस्टर के नाम का सहारा लेकर जनप्रतिनिधियों को डराना स्थानीय कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक तंत्र के लिए अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), टावर लोकेशन और कॉल की तकनीकी फॉरेंसिक जांच करना होगा। अगर फोन कॉल के तार किसी संगठित आपराधिक गिरोह या नामजद आरोपियों से सीधे जुड़ते हैं, तो यह न केवल एक गंभीर आपराधिक साजिश का मामला बनेगा, बल्कि चुनावी निष्पक्षता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। जांच एजेंसियों को इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

स्थानीय निकायों के चुनावों में राजनीतिक महत्वाकांक्षा, व्यावसायिक हितों और आपराधिक धमकियों का यह मेल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। इस मामले में निष्पक्ष जांच के साथ-साथ पुलिस प्रशासन की प्राथमिक चुनौती सभी पार्षदों को भयमुक्त माहौल प्रदान करना और मतदान की शुचिता बनाए रखना है। यदि इस तरह के दबाव वाले हथकंडों पर समय रहते कठोर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्रता को कमजोर करेगा और भविष्य के चुनावों के लिए एक गलत नज़ीर पेश करेगा। चुनाव से ठीक पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और आरोपियों की जवाबदेही तय करना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बहाल कर सकता है।

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