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श्रीहरगोबिंदपुर में नशा तस्करों का विरोध करने पर खूनी संघर्ष, एक ग्रामीण की जान गई और दो गंभीर रूप से घायलपंजाब
16 अक्तू॰ 2026, 11:09 am (21 दिन पहले)· 3

श्रीहरगोबिंदपुर में नशा तस्करों का विरोध करने पर खूनी संघर्ष, एक ग्रामीण की जान गई और दो गंभीर रूप से घायल

पंजाब के श्रीहरगोबिंदपुर स्थित माड़ी पन्नवां गांव में नशाखोरी रोकने पहुंचे तीन ग्रामीणों पर बदमाशों ने धारदार हथियारों से हमला बोल दिया, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई और दो अन्य जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाना ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। मानसा इलाके में परविंदर सिंह झोटा की जान लिए जाने की वारदात का दर्द अभी थमा भी नहीं था कि श्रीहरगोबिंदपुर क्षेत्र से एक और झकझोर देने वाला खूनी मामला सामने आ गया है। माड़ी पन्नवां गांव में अवैध नशा कारोबारियों की गतिविधियों पर आपत्ति जताना तीन स्थानीय निवासियों को बेहद भारी पड़ गया। बुधवार के दिन नशीली सामग्री की खरीद-फरोख्त का विरोध करने पर घात लगाए हमलावरों ने धारदार हथियारों से जानलेवा वार कर दिए। इस हिंसक वारदात में चालीस वर्षीय बिक्रमजीत सिंह ने दम तोड़ दिया, जबकि उनके दो साथी गंभीर घावों के साथ अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इस खूनी घटनाक्रम के चलते पूरे इलाके में भारी दहशत और मातम पसरा हुआ है।

मोहल्ले की सुरक्षा को लेकर उठाई थी आवाज

अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे गुरमुख सिंह ने इस खूनी संघर्ष की वजह बयां की। उनका कहना है कि कुछ संदिग्ध लड़के निरंतर उनकी रिहाइशी गली में जमावड़ा लगाए रहते थे। इन लड़कों के जमावड़े और हरकतों के चलते स्थानीय बच्चियों, बहनों और महिलाओं का उस रास्ते से सुरक्षित निकलना पूरी तरह दूभर हो गया था। मोहल्ले वालों का सीधा आरोप है कि यह असामाजिक गिरोह सरेआम गली में नशीले पदार्थों की बिक्री करता था। जब बुधवार को इन संदिग्धों को बस्ती में गैरकानूनी धंधा चलाने से मना किया गया, तो वे आगबबूला हो उठे। बिना किसी चेतावनी के हमलावरों ने तेजधार हथियार निकाल लिए और सामने खड़े बिक्रमजीत सिंह, निशान सिंह तथा गुरमुख सिंह पर अचानक वार करना शुरू कर दिया। हमले की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि तीनों निहत्थे ग्रामीण खून से लथपथ होकर वहीं सड़क पर गिर पड़े।

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लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस था हमलावर गिरोह

गांव के मुखिया यानी सरपंच सुरिंदरपाल सिंह बाजवा ने पूरे घटनाक्रम की तस्दीक करते हुए बताया कि ये तीनों व्यक्ति केवल अपने गांव को नशे की दलदल से बचाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने जानकारी दी कि निशान सिंह, गुरमुख सिंह और बिक्रमजीत सिंह गांव में गैरकानूनी नशाखोरी और उसकी बिक्री की गतिविधियों को बंद करवाने के इरादे से वहां पहुंचे थे। जैसे ही उन्होंने इसका प्रतिवाद किया, वहां पहले से तैयारी के साथ मौजूद 10 से 15 लोगों के समूह ने उन पर पूरी बेरहमी से हमला कर दिया। हमलावरों ने तीनों को संभलने तक का अवसर नहीं दिया और बुरी तरह जख्मी करके मौके से फरार हो गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण इकट्ठा हुए और लहूलुहान पड़े पीड़ितों को आनन-फानन में उठाकर इलाज हेतु नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भाम ले जाया गया।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक पीड़ित ने तोड़ा दम

सीएचसी भाम में तैनात डॉ अभिषेक ने अस्पताल पहुंचे घायलों की स्थिति के बारे में जानकारी साझा की। चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, आपातकालीन वार्ड में लाए गए घायलों में तरसेम सिंह के 40 वर्षीय पुत्र बिक्रमजीत सिंह, अमरजीत सिंह के 35 वर्षीय बेटे निशान सिंह और परमजीत सिंह के 35 वर्षीय पुत्र गुरमुख सिंह शामिल थे। चिकित्सकों ने तुरंत उपचार शुरू किया, लेकिन गंभीर घावों और अत्यधिक रक्तस्राव के चलते बिक्रमजीत सिंह को बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं दूसरी ओर, निशान सिंह और गुरमुख सिंह की शारीरिक हालत भी नाजुक बनी हुई है, जिनका विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में सघन उपचार किया जा रहा है।

पुलिस जुटी विवाद की असल वजहों की पड़ताल में

रक्तपात की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और थाना श्रीहरगोबिंदपुर की पुलिस टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस बल ने मौका-ए-वारदात का बारीकी से मुआयना किया और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। थाना प्रभारी सुखजिंदर सिंह ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि पुलिस ने कानूनी कार्रवाई प्रारंभ कर दी है और मामले की प्रत्येक कड़ी की गहनता से तफ्तीश की जा रही है। एसएचओ ने कहा कि इस जानलेवा टकराव के पीछे की मुख्य वजहों की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच की जा रही है ताकि हत्या का वास्तविक कारण कानूनी रूप से साफ हो सके। इसके साथ ही पीड़ित परिजनों और ग्रामीणों द्वारा नशा तस्करी को लेकर लगाए गए सभी आरोपों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।

सवाल-जवाब

यह घटना किस स्थान पर और कब हुई?
यह घटना पंजाब के श्रीहरगोबिंदपुर अंतर्गत गांव माड़ी पन्नवां में बुधवार को हुई।
इस हमले में किसकी जान गई?
हमले में तरसेम सिंह के 40 वर्षीय बेटे बिक्रमजीत सिंह की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
हमले में घायल अन्य दो व्यक्ति कौन हैं?
घायलों में 35 वर्षीय निशान सिंह और 35 वर्षीय गुरमुख सिंह शामिल हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
विवाद की मुख्य वजह क्या बताई गई है?
गली में खुलेआम नशा बेचने का विरोध करने और महिलाओं के आने-जाने में हो रही परेशानी पर टोकने को लेकर यह विवाद हुआ।
हमले में कितने लोग शामिल थे?
गांव के सरपंच के अनुसार, घात लगाकर बैठे 10 से 15 लोगों के समूह ने तेजधार हथियारों से हमला किया।
घायलों को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया?
घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भाम में भर्ती कराया गया।
पुलिस प्रशासन का इस मामले में क्या रुख है?
थाना श्रीहरगोबिंदपुर के एसएचओ सुखजिंदर सिंह के अनुसार पुलिस ने मौके का मुआयना कर जांच शुरू कर दी है और विवाद के कारणों की पड़ताल की जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·21 दिन पहले

माड़ी पन्नवां गांव में गली के बाहर यूं नशा बिकने देना और फिर विरोध करने पर जान ले लेना, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·21 दिन पहले

नशे के खिलाफ खड़े होने वाले आम लोगों की इस तरह जान जाना बहुत डरावना है। सरकार और पुलिस को इन अपराधियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 दिन पहले

रविकेश जी, आपकी बात सही है। पर क्या पुलिस को पहले से नहीं पता था कि उस गली में ऐसा धंधा चल रहा है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

नशे के खिलाफ बोलने वालों पर ऐसे हमले देख कर रूह कांप जाती है। मानसा के बाद अब श्रीहरगोबिंदपुर में जो हुआ, उससे साफ है कि तस्करों के हौसला कितने बुलंद हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। कानून का डर खत्म हो चुका है, तभी ये तस्कर सरेआम जान ले रहे हैं।

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