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सीकर के फतेहपुर में अंजू भिंडा बनीं नगर परिषद सभापति, परिवार की तीसरी पीढ़ी तक पहुंची कुर्सीराजस्थान
22 सित॰ 2026, 4:06 pm (3 दिन पहले)· 1

सीकर के फतेहपुर में अंजू भिंडा बनीं नगर परिषद सभापति, परिवार की तीसरी पीढ़ी तक पहुंची कुर्सी

फतेहपुर नगर परिषद चुनाव में निर्दलीय पार्षद के तौर पर जीत दर्ज करने वाली अंजू भिंडा अब सभापति बन गई हैं। इस जीत के साथ ही भिंडा परिवार का राजनीतिक प्रभाव एक बार फिर सामने आया है।

राजस्थान के सीकर जिले की फतेहपुर नगर परिषद में हुए सभापति चुनाव में एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। यहां निर्दलीय पार्षद के रूप में चुनी गईं अंजू भिंडा ने सभापति पद के कड़े मुकाबले में जीत हासिल कर ली है। कुल 55 पार्षदों वाले सदन में उन्होंने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 30 मत प्राप्त किए, जबकि उनके सामने मैदान में उतरीं कांग्रेस की प्रत्याशी को 25 वोट मिले। इस परिणाम के साथ ही नगर परिषद के शीर्ष पद पर भिंडा परिवार की पकड़ और मजबूत हो गई है।

टिकट कटने के बाद निर्दलीय उतरीं, फिर बनीं पार्टी का चेहरा

अंजू भिंडा की यह जीत इसलिए भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान बीजेपी ने उन्हें पार्षद पद का टिकट नहीं दिया था। पार्टी से निराशा मिलने के बाद भी उन्होंने पीछे हटने के बजाय स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया और शानदार जीत हासिल की। पार्षद बनने के बाद समीकरण तेजी से बदले और बीजेपी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें सभापति पद का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया, जिसके बाद वे मुकाबला जीतने में सफल रहीं।

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फतेहपुर की स्थानीय राजनीति में भिंडा परिवार का वर्चस्व दशकों पुराना रहा है। अंजू भिंडा पूर्व पालिका अध्यक्ष मधुसूदन भिंडा की पत्नी हैं। इससे पहले उनके ससुर बनवारी लाल भिंडा भी न केवल फतेहपुर के पालिका अध्यक्ष रहे थे, बल्कि वे इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए विधायक भी बने थे। परिवार के राजनीतिक रसूख का दायरा यहीं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि मधुसूदन भिंडा के भतीजे की पत्नी ललित भी पूर्व में फतेहपुर की पालिका अध्यक्ष रह चुकी हैं। अब इस पद पर अंजू भिंडा के काबिज होने से स्थानीय सत्ता की कमान एक ही घराने में बनी हुई है।

सवाल-जवाब

फतेहपुर नगर परिषद सभापति चुनाव में किसे जीत मिली?
अंजू भिंडा ने फतेहपुर नगर परिषद के सभापति चुनाव में जीत हासिल की है।
सभापति चुनाव में मतदान का क्या परिणाम रहा?
कुल 55 मतों में से अंजू भिंडा को 30 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 25 वोट प्राप्त हुए।
अंजू भिंडा ने पार्षद का चुनाव किस तरह जीता था?
बीजेपी से टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और पार्षद बनीं।
भिंडा परिवार से पहले कौन-कौन इस पद पर रह चुका है?
उनके ससुर बनवारी लाल भिंडा, पति मधुसूदन भिंडा और परिवार की बहू ललित पहले पालिका अध्यक्ष रह चुके हैं।
अंजू भिंडा के ससुर का क्या राजनीतिक पद रहा था?
उनके ससुर बनवारी लाल भिंडा फतेहपुर नगर पालिका अध्यक्ष के साथ-साथ विधायक भी रह चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·2 दिन पहले

टिकट कटने के बाद भी निर्दलीय जीतना और फिर उसी पार्टी से सभापति बन जाना, वाकई गजब का सियासी खेल है। परिवार का रसूख हो तो स्थानीय चुनावों के समीकरण पलक झपकते ही बदल जाते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

टिकट कटने के बाद बगावत करके जीतना और फिर उसी पार्टी से सभापति बन जाना, वाकई गजब का राजनीतिक दांव है। परिवार का रसूख भी साफ दिख रहा है।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

अ अर्जुन जी, टिकट कटने के बाद भी निर्दलीय जीतना और फिर पार्टी का मान जाना—सच में कमाल का टर्निंग पॉइंट है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

टिकट काटने के बाद पार्टी ने खुद ही उन्हें उम्मीदवार बना दिया, राजनीति में सचमुच गज़ब यू-टर्न देखने को मिलते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

करण भाई, यू-टर्न तो ठीक है पर सवाल ये है कि बगावत करने के बाद भी पार्टी ने अचानक उन पर दोबारा दांव क्यों खेला?

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