तुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हालचीन और अमेरिका के बीच टकराव से दोनों को नुकसान, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर दिया जोरगाजा युद्ध में पीछे न हटने के पीछे नेतन्याहू ने सुनाई 1967 की दास्तान, भाई के वो 5 शब्द बने इजरायल की सैन्य नीतिसऊदी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद तेल की कीमतों में उछाल, तुर्किये और पाकिस्तान के साथ आपात बैठकसिंह राशिफल 25 सितंबर 2026: साझेदारी और कागजी सौदों में रखें स्पष्टता, रिश्तों में पुरानी बातें न दोहराएंकेदारनाथ में पांच महीने के भीतर 50 मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा, आरटीआई में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
सीकर में आधुनिक श्रवण कुमार: 21 साल के पोते ने 42 किलो जल के साथ दादी को कांवड़ में बैठाकर पूरी की 45 किलोमीटर की पैदल यात्राराजस्थान
22 अग॰ 2026, 8:29 pm (33 दिन पहले)· 0

सीकर में आधुनिक श्रवण कुमार: 21 साल के पोते ने 42 किलो जल के साथ दादी को कांवड़ में बैठाकर पूरी की 45 किलोमीटर की पैदल यात्रा

सीकर के 21 वर्षीय राहुल कुमार ने अपनी बुजुर्ग दादी लच्छी देवी को कांवड़ में बैठाकर 45 किलोमीटर की अनोखी पैदल यात्रा पूरी की। इस कांवड़ के एक पलड़े में दादी बैठी थीं तो दूसरे पलड़े में 42 किलो जल रखा था।

सावन के महीने में सीकर जिले से परिवार के प्रति अगाध प्रेम और अनोखी भक्ति का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। पौराणिक कथाओं में जिस तरह श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई थी, उसी आधुनिक तर्ज पर 21 साल के राहुल कुमार अपनी बुजुर्ग दादी लच्छी देवी को कांवड़ में बैठाकर पैदल तीर्थ यात्रा पर निकले। उन्होंने कुल 45 किलोमीटर की इस कठिन और अनूठी पदयात्रा को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस विशेष कांवड़ के एक पलड़े में उनकी दादी बैठी हुई थीं, जबकि दूसरे पलड़े में जल से भरी स्टील की मटकियां रखी हुई थीं। राहुल की इस यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था की मिसाल पेश की, बल्कि बुजुर्गों की सेवा और सम्मान का एक अनूठा उदाहरण भी समाज के सामने रखा है।

लोहार्गल से शुरू हुई यात्रा और सीकर में स्वागत

राहुल ने अपनी यह यात्रा शेखावाटी के मिनी हरिद्वार के रूप में प्रसिद्ध तीर्थराज लोहार्गल से शुरू की थी। वे वहां स्थित गौमुख से जल लेकर अपने पैतृक गांव रामपुरा की ओर रवाना हुए थे। उन्होंने 20 अगस्त को दोपहर करीब 2 बजे अपनी इस यात्रा का आगाज किया था। सफर के दौरान उन्होंने पहले दिन की रात रामपुरा में और दूसरे दिन पिपराली में विश्राम किया था। इसके बाद वे तीसरे दिन सीकर पहुंचे, जहां नगर सेठ के रूप में विख्यात कल्याण मंदिर में उनका अत्यंत जोरदार और भव्य स्वागत किया गया। इस पूरी यात्रा के दौरान उनके परिवार के अन्य सदस्य भी लगातार उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे और उनका उत्साहवर्धन कर रहे थे। अंततः 23 अगस्त की शाम को वे अपनी इस यात्रा को पूरा करते हुए सकुशल अपने गांव वापस लौट आए।

ये भी पढ़ें

एक पलड़े में 42 किलो जल और दूसरे में बैठीं दादी

इस अनोखी कांवड़ का कुल वजन लगभग 81 किलोग्राम था। राहुल के मुताबिक, एक पलड़े में 42 किलो जल से भरी स्टील की मटकियां सजाई गई थीं, जबकि दूसरे पलड़े पर एक चौकी रखकर उस पर उनकी दादी लच्छी देवी को बैठाया गया था। शुरुआत में राहुल का विचार सिर्फ लोहार्गल से लगभग एक-एक क्विंटल जल लाने का था, लेकिन तभी उन्होंने एक प्रसिद्ध श्रवण कुमार का भजन सुना। उसी भजन ने उनके मन में विचार जगाया कि क्यों न दादी को भी कांवड़ में बैठाकर यह यात्रा की जाए। राहुल का मानना है कि कांवड़ में केवल जल भरकर लाना तो आम बात है, लेकिन वे कुछ ऐसा करना चाहते थे जो समाज के लिए एक प्रेरणा बने। उनके मन में यह भावना आई कि आज के आधुनिक दौर में भी सतयुग जैसे संस्कार और सेवाभाव को जीवित रखा जा सकता है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपनी दादी को कांवड़ में बैठाकर इस पदयात्रा की शुरुआत कर दी थी।

हर 100 मीटर पर विश्राम और मजबूत तैयारी

लंबी दूरी और भारी वजन होने के बावजूद राहुल ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार आगे बढ़ते रहे। कांवड़ के मुख्य बांस के चारों तरफ अच्छी तरह फोम लपेटी गई थी और उसे मजबूत रस्सियों से बांधा गया था, ताकि यात्रा के दौरान कांवड़ का संतुलन पूरी तरह बना रहे। राहुल भगवान भोलेनाथ का स्मरण करते हुए आगे बढ़ रहे थे और सफर के दौरान लगभग हर 100 मीटर की दूरी तय करने के बाद थोड़ा विश्राम करते थे। इस कठिन यात्रा में उनके साथ बनवारी लाल बरवड़, रोहित शर्मा, इंद्रपाल शेषमल और मनोज बरवड़ जैसे परिवार के अन्य लोग भी पूरी निष्ठा के साथ उनका सहयोग कर रहे थे।

भावुक हुईं दादी लच्छी देवी

इस अनोखी तीर्थयात्रा का हिस्सा बनीं बुजुर्ग दादी लच्छी देवी इस दौरान बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने पोते और परिवार के बारे में बात करते हुए कहा कि उनके बच्चे और नाती-पोते बहुत अच्छे हैं, जिन्होंने बुढ़ापे में उन्हें इस प्रकार तीर्थयात्रा करवा दी। उन्होंने आगे कहा कि सारी मेहनत उनके बच्चे कर रहे हैं और भगवान सभी को ऐसे ही आज्ञाकारी नाती-पोते दे। भावुक होते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अब तो उनका समय श्मशान जाने का हो चला है, लेकिन उनके बच्चों ने उन्हें जीते-जी तीर्थों के दर्शन करवा दिए।

सवाल-जवाब

राहुल कुमार ने कुल कितने किलोमीटर की यात्रा तय की?
राहुल कुमार ने अपनी बुजुर्ग दादी को कांवड़ में बैठाकर कुल 45 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की।
कांवड़ का कुल वजन कितना था?
कांवड़ के दोनों पलड़ों का कुल वजन लगभग 81 किलोग्राम था, जिसमें 42 किलो जल और दादी बैठी थीं।
यह कांवड़ यात्रा कहां से शुरू हुई थी?
यह यात्रा शेखावाटी के मिनी हरिद्वार कहे जाने वाले तीर्थराज लोहार्गल से शुरू हुई थी।
यात्रा के दौरान दादी लच्छी देवी ने क्या प्रतिक्रिया दी?
दादी लच्छी देवी बेहद भावुक हो गईं और कहा कि बच्चों ने उन्हें बुढ़ापे में तीर्थयात्रा करवा दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे पारंपरिक मूल्य और आधुनिक युवा सोच का मेल समाज में सकारात्मक संदेश दे सकता है। सोशल मीडिया के इस दौर में, जहां पारिवारिक रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, सीकर के इस 21 वर्षीय युवक का यह कदम पीढ़ियों के बीच सम्मान और सेवाभाव की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का एक अनूठा उदाहरण है।

Ravikash Gupta@ravikash·33 दिन पहले

यह खबर केवल पारिवारिक भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि व्यक्तिगत प्रेरणाएं किस तरह बड़े पैमाने पर सकारात्मक सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श को जन्म दे सकती हैं। वर्तमान डिजिटल युग में, जहां वायरल कंटेंट अक्सर नकारात्मकता या सतही विषयों पर केंद्रित होता है, इस प्रकार के मानवीय प्रयास जन-मानस को गहराई से प्रभावित करते हैं और पारंपरिक मूल्यों के पुनरुत्थान की अपार क्षमता रखते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·33 दिन पहले

सीकर की यह घटना आधुनिक समाज में बदलते पारिवारिक मूल्यों के बीच एक अनूठा उदाहरण पेश करती है, जहां युवा पीढ़ी अब केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहकर बुजुर्गों की सेवा को भी उसी आस्था से जोड़ रही है। 45 किलोमीटर की इस कठिन पदयात्रा में 81 किलो का संतुलन साधते हुए राहुल ने यह साबित किया कि यदि प्रेरणा सही हो, तो प्राचीन संस्कार आज की व्यस्त जीवनशैली में भी जीवित रखे जा सकते हैं। इस तरह के मानवीय प्रसंग समाज में पीढ़ीगत दूरियों को कम करने और पारिवारिक संवाद को मजबूत करने की बड़ी ताकत रखते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 दिन पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की बीट पर काम करते हुए हम अक्सर समाज के उस हिस्से को देखते हैं जहाँ परिवार बिखर रहे हैं और बुजुर्गों की उपेक्षा के मामले थानों व अदालतों तक पहुँचते हैं। ऐसे दौर में सीकर की यह घटना एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संकेत देती है। राहुल का यह प्रयास न केवल शारीरिक सहनशक्ति का उदाहरण है, बल्कि यह उस बढ़ती संवेदनहीनता पर भी एक करारा प्रहार है जहाँ युवा पीढ़ी अपने बुजुर्गों से कटती जा रही है। यदि इस तरह के सकारात्मक पारिवारिक मूल्य मुख्यधारा में बने रहें, तो बुजुर्गों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई सामाजिक समस्याओं का स्वतः समाधान हो सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp