भारतीय जनता पार्टी के नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को इस नियुक्ति के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी का कहना है कि चर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस में दुष्यंत गौतम का नाम सामने आया था और जब तक मामले की जांच पूरी नहीं होती, तब तक उन्हें किसी संवैधानिक पद पर नहीं बैठाया जाना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि राज्यपाल के पद पर आसीन होने के बाद उनके खिलाफ निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाएगा।
राष्ट्रपति को पत्र और दिल्ली से लेकर उत्तराखंड तक धरना प्रदर्शन
इस फैसले के विरोध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है। इससे पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अंकिता भंडारी के परिजनों के साथ दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया था। अंकिता के परिवार का भी स्पष्ट कहना है कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस नियुक्ति को रोका जाना बेहद जरूरी है।
उत्तराखंड की सड़कों पर कांग्रेस का प्रदर्शन और नेताओं की चेतावनी
इस नियुक्ति के खिलाफ उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। देहरादून में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला। हरीश रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस मामले में चुप बैठने वाली नहीं है, चाहे इसके लिए कार्यकर्ताओं को जेल ही क्यों न जाना पड़े, वे पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाकर पीड़ित परिवार के गहरे जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया गया है। वहीं उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश का माहौल बदल चुका है और जनता ऐसे कदमों को स्वीकार नहीं करेगी, जिसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
रिजॉर्ट से जुड़ी वो घटना और वीआईपी का विवाद
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक निजी रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। कुछ समय बाद अचानक उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई और शव बरामद हुआ। इस मामले में पुलिस ने रिजॉर्ट मालिक समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान अंकिता की एक कथित व्हाट्सएप चैट भी सामने आई, जिसमें उन्होंने अपनी सहेली को बताया था कि रिजॉर्ट मालिक उन पर पैसे के बदले एक वीआईपी मेहमान को विशेष सुविधाएं देने का लगातार दबाव बना रहा था। अंकिता द्वारा इस प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद विवाद हुआ और उनकी जान ले ली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन के स्तर पर उत्तराखंड के एडीजी अपराध एवं कानून व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन ने जानकारी दी थी कि इस हत्याकांड में पांच सौ पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र यानी चार्जशीट दाखिल की गई थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कांग्रेस पर पलटवार
विपक्षी दलों के इन तीखे हमलों पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा जवाब दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार और पार्टी इस पूरे मामले को लेकर पहले दिन से पूरी तरह संवेदनशील रही है। पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता पहुंचाई गई, आरोपियों को फौरन सलाखों के पीछे भेजा गया और आर्थिक मदद भी दी गई। जब परिवार ने केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की, तो सरकार ने बिना देर किए इस केस को सीबीआई के हवाले कर दिया। धामी ने पलटवार करते हुए कहा कि एक तरफ उनकी सरकार न्याय दिलाने के लिए निष्पक्षता से काम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी इस संवेदनशील घटना का इस्तेमाल केवल अपनी सियासी रोटियां सेकने के लिए कर रही है।




















