पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानसंघर्षों को मात देकर सिनेमा में बनाई मुकाम, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्या दत्ता की अनूठी दास्तानअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त, डॉलर मजबूतगोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवालनागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपाय
सिंचाई पानी के संकट पर राजस्थान के बीकानेर और श्रीगंगानगर बेल्ट में चक्काजाम, व्यापार और मंडियां थमींराजस्थान
24 सित॰ 2026, 10:11 am (21 घंटे पहले)· 1

सिंचाई पानी के संकट पर राजस्थान के बीकानेर और श्रीगंगानगर बेल्ट में चक्काजाम, व्यापार और मंडियां थमीं

बीकानेर और श्रीगंगानगर जिले के ग्रामीण इलाकों में रबी फसल के लिए 6 महीने के पक्के रेगुलेशन और अनूपगढ़ शाखा में पानी रिजर्व रखने की मांग पर किसानों ने व्यापक हड़ताल शुरू कर दी है। स्थानीय व्यापारियों और दवा दुकानदारों के समर्थन के बाद प्रमुख कस्बों में कृषि मंडियां और बाजार पूरी तरह बंद हैं।

पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और श्रीगंगानगर कृषि अंचल में रबी की बिजाई से ठीक पहले सिंचाई जल के वितरण को लेकर गतिरोध चरम पर पहुंच गया है। घड़साना, खाजूवाला, रावला और अनूपगढ़ की विस्तृत नहर पट्टी पर काश्तकारों ने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं और अनिश्चित जलापूर्ति के विरोध में सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। नई मंडी घड़साना में पिछले पंद्रह दिनों से अनवरत चल रहे धरने के बाद भी जब प्रशासनिक स्तर पर कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला, तब संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन का दायरा बढ़ाते हुए व्यापक चक्काजाम का बिगुल फूंका। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक पूरे फसल चक्र को सुरक्षित करने वाली एक निश्चित व्यवस्था कागजों से निकलकर नहरों में लागू नहीं की जाती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन शांत नहीं होगा।

कृषि मंडियों और कस्बाई बाजारों में सन्नाटा, आवश्यक सेवाओं ने भी दिया साथ

इस आंदोलन की सबसे प्रमुख बात यह है कि इसका दायरा अब केवल खेतों और धरने के तंबुओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे कस्बाई अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य वर्गों का भी खुला समर्थन हासिल हुआ है। खाजूवाला, रावला, घड़साना तथा अनूपगढ़ स्थित सभी मुख्य कृषि उपज मंडियों में व्यापारियों ने खरीद-फरोख्त पूरी तरह बंद रखने की घोषणा की है। मंडियों के बंद होने से जिंसों की आवक और उठाव पूरी तरह ठप हो गया है, जिसका सीधा असर आसपास के बाजारों पर पड़ा है और मुख्य व्यापारिक गलियारों में वीरानी छाई हुई है। सामान्य किराना और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ आवश्यक दवा विक्रेताओं ने भी किसानों की मांगों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए मेडिकल स्टोर बंद रखने का निर्णय लिया है।

ये भी पढ़ें

सड़कों पर यातायात को बाधित करने के लिए विशेष रूप से खाजूवाला के व्यस्त राजीव सर्किल जैसे मुख्य चौराहों को केंद्रित किया गया है, जहां किसान सुबह से ही जुटने लगे हैं। सीमावर्ती और नहरी इलाकों की जीवनरेखा मानी जाने वाली इन सड़कों पर आवागमन रुकने से अंतर-कस्बा संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। किसी भी प्रकार के टकराव और कानून-व्यवस्था के संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद हैं। संवेदनशील चौराहों और मुख्य मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है ताकि आपातकालीन वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा सके और शांति व्यवस्था कायम रहे।

वार्ता की विफलता के बाद उपजा असंतोष और शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल

सड़क जाम और बंदी के इस बड़े कदम से पूर्व राज्य सरकार के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को आंदोलनकारी किसान नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में किसान संगठनों ने अपनी बुनियादी समस्याओं और मांगों का विस्तृत ब्योरा शासन के समक्ष प्रस्तुत किया। कई घंटों तक चली लंबी वार्ता के बावजूद जल वितरण के गणित और आधिकारिक आश्वासनों पर दोनों पक्षों के मध्य कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी। किसानों का मानना है कि केवल मौखिक दिलासों से खेत नहीं सींचे जा सकते और जब तक सरकार ठोस आदेश जारी नहीं करती, आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचता है। वार्ता बेनतीजा खत्म होने के तत्काल बाद ही किसान नेताओं ने चक्काजाम लागू करने की सार्वजनिक घोषणा कर दी।

इसी आंदोलन के दबाव और नहरी तंत्र के संचालन पर उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग में एक बड़ा फेरबदल किया है। देर शाम जारी एक सरकारी आदेश के तहत हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को उनके पद से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर अब अरुण कुमार सिडाना को सिंचाई विभाग के नए मुख्य अभियंता का कार्यभार सौंपा गया है। हालांकि इस उच्चस्तरीय प्रशासनिक बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि महकमे में कुर्सियां बदलने से किसानों का संकट हल नहीं होने वाला है। किसानों का रुख दो-टूक है कि जब तक नहर में पानी का प्रवाह और तय रेगुलेशन सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक किसी भी अधिकारी की तैनाती उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।

स्थायी रेगुलेशन और अनूपगढ़ शाखा के लिए सुरक्षित पानी की पुख्ता मांग

किसानों के इस संघर्ष का मुख्य केंद्र बिंदु नहरी पानी के बंटवारे का तकनीकी नियमन है। काश्तकारों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि अनूपगढ़ शाखा के हिस्से का पानी अनिवार्य रूप से आरक्षित रखा जाए ताकि टेल क्षेत्र के काश्तकारों को उनके हिस्से का पूरा पानी मिल सके। इसके साथ ही किसान चार में से दो ग्रुप के आधार पर छह महीने की अवधि के लिए एक स्थायी रेगुलेशन व्यवस्था लागू करने की मांग पर अड़े हैं। किसानों का तर्क है कि रबी फसलों की बुवाई से लेकर उनकी कटाई तक पानी की एक निश्चित समय-सारणी होना बेहद जरूरी है। यदि किसानों को अग्रिम तौर पर यह पता नहीं होगा कि अगले छह महीनों में उन्हें किस अंतराल पर कितनी बार सिंचाई का पानी मिलेगा, तो वे अपनी फसलों की बुवाई की सही योजना नहीं बना सकेंगे और पूरी खेती घाटे का सौदा बन जाएगी।

खरीफ फसलों के नुकसान की विशेष गिरदावरी और फसल बीमा योजना का सवाल

नहरों में पानी की मांग के साथ-साथ किसानों ने हाल ही में बीती खरीफ फसल के दौरान हुए भारी नुकसान का मुद्दा भी पूरी मजबूती से उठाया है। आंदोलनकारी संगठनों ने मांग की है कि मौसम की मार और प्रतिकूल परिस्थितियों से बर्बाद हुई खरीफ फसलों की तत्काल विशेष गिरदावरी करवाई जाए। राजस्व और कृषि विभाग के जरिए पारदर्शी तरीके से नुकसान का सटीक आकलन होना चाहिए। किसानों का कहना है कि इसी विशेष गिरदावरी के आंकड़ों के आधार पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के तहत पात्र किसानों को क्लेम की वास्तविक राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनिश्चितता से जूझ रहे किसानों का कहना है कि जब तक पूर्व में हुए नुकसान का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक वे आगामी फसल चक्र के लिए आवश्यक संसाधन नहीं जुटा पाएंगे।

मुख्य अभियंता के साथ आगामी बैठक पर टिकी सभी की निगाहें

सड़कों पर जारी तनाव और मंडियों में पसरे सन्नाटे के बीच प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर गतिरोध तोड़ने की कवायद भी जारी है। आज सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर अमरजीत मेहरडा के साथ किसान नेताओं की एक उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना जताई गई है। इस संभावित बातचीत में अनूपगढ़ शाखा के सुरक्षित पानी, छह माह के पक्के रेगुलेशन के प्रारूप और खरीफ मुआवजे को लेकर बिंदुवार चर्चा हो सकती है। क्षेत्र के हजारों किसान और स्थानीय नागरिक इस वार्ता के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि आज की इस वार्ता में सिंचाई विभाग और सरकार किसानों की प्रमुख चिंताओं पर कोई स्पष्ट और लिखित निर्णय लेते हैं, तभी गतिरोध खत्म होने के आसार बनेंगे; अन्यथा किसान संगठनों ने अपने विरोध को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की चेतावनी दे रखी है।

सवाल-जवाब

किसान किन मुख्य इलाकों में चक्काजाम और प्रदर्शन कर रहे हैं?
किसान खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्रों में चक्काजाम कर रहे हैं, जिसमें खाजूवाला का राजीव सर्किल मुख्य प्रदर्शन स्थल है।
किसानों की जल वितरण को लेकर प्रमुख तकनीकी मांग क्या है?
किसान अनूपगढ़ शाखा के लिए पानी आरक्षित रखने और चार में से दो ग्रुप के आधार पर छह महीने का स्थायी रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहे हैं।
घड़साना में यह विरोध प्रदर्शन कितने दिनों से चल रहा है?
नई मंडी घड़साना में सिंचाई पानी की उपलब्धता को लेकर किसानों का आंदोलन पिछले 15 दिनों से लगातार चल रहा है।
हनुमानगढ़ सिंचाई विभाग में सरकार ने क्या प्रशासनिक बदलाव किया?
सरकार ने हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को पद से हटाकर उनकी जगह अरुण कुमार सिडाना को नया मुख्य अभियंता नियुक्त किया है।
किसानों ने फसल बीमा और मुआवजे को लेकर क्या मांग उठाई है?
किसानों ने खराब हुई खरीफ फसलों की तत्काल विशेष गिरदावरी कराने और उसके आधार पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा देने की मांग की है।
क्या इस आंदोलन को अन्य व्यापारिक वर्गों का समर्थन मिला है?
हां, खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की कृषि मंडियों के व्यापारियों तथा मेडिकल स्टोर संचालकों ने प्रतिष्ठान बंद रखकर समर्थन दिया है।
आगामी दौर में किसानों की किस अधिकारी से बातचीत प्रस्तावित है?
किसान नेताओं की सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर अमरजीत मेहरडा के साथ आगे की वार्ता प्रस्तावित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·3 घंटे पहले

दवा की दुकानें बंद करना कुछ ज़्यादा ही हो गया यार। पानी की लड़ाई सरकार से है, पर इस चक्कर में बीमार लोग कहाँ जाएँगे?

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 घंटे पहले

मेडिकल स्टोरों का बंद होना बताता है कि गुस्सा सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है।

Ravikash Gupta@ravikash·20 घंटे पहले

अर्जुन भाई, बात सही है पर मेडिकल बंद होना मजबूरी भी हो सकता है, हर बार गुस्सा ही नहीं होता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 घंटे पहले

पूरे बाजार और मेडिकल स्टोर बंद करवाना थोड़ा ज्यादा लगता है, इससे आम आदमी को ज्यादा परेशानी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·20 घंटे पहले

करण भाई, पानी न मिलने पर जब फसल सूखने की नौबत आ जाए, तो मंडियां और बाजार बंद करना ही किसानों का आखिरी हथियार बचता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp