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सिरमौर में बंद सड़क ने बढ़ाई बेबसी, बुजुर्ग मां का शव डंडे के सहारे छह किलोमीटर कंधे पर ढोने को मजबूर हुआ बेटाहिमाचल प्रदेश
6 अक्तू॰ 2026, 3:33 pm (31 दिन पहले)· 0

सिरमौर में बंद सड़क ने बढ़ाई बेबसी, बुजुर्ग मां का शव डंडे के सहारे छह किलोमीटर कंधे पर ढोने को मजबूर हुआ बेटा

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में भूस्खलन से बाधित सड़क बहाल न होने पर ग्रामीणों को एक बुजुर्ग महिला की पार्थिव देह छह किलोमीटर तक पैदल ढोनी पड़ी।

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बारिश का दौर थमने के बाद भी दुर्गम इलाकों में बुनियादी रास्तों की बदहाली स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा रही है। सिरमौर जिले के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में दिल को झकझोर देने वाला वाकया सामने आया है, जहाँ संपर्क मार्ग ठप होने के चलते एक परिवार को अपनी बुजुर्ग परिजन का शव अस्पताल से घर तक पहुँचाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। वाहन आगे जाने का रास्ता न मिलने पर ग्रामीणों ने बांस के डंडे का सहारा लिया और पार्थिव देह को छह किलोमीटर पैदल उठाकर गाँव तक पहुँचाया, जिसके बाद ही उनका अंतिम संस्कार संभव हो सका।

चंडीगढ़ में उपचार के दौरान तोड़ा था दम

नाहन उपमंडल के अंतर्गत धारटीधार इलाके की ग्राम पंचायत घगेड़ा में स्थित टीना गुलरवाला गाँव की अस्सी साल की निवासी परमा देवी काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं। शनिवार की देर रात अचानक उनकी हालत अधिक नाजुक हो गई, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें तुरंत नाहन के अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें चंडीगढ़ स्थित पीजीआई रेफर कर दिया। वहाँ चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार तड़के करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

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पथरीले पगडंडी रास्तों पर छह किलोमीटर की कठिन यात्रा

अस्पताल से कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परिजन शव वाहन के जरिए पार्थिव शरीर को लेकर गृह क्षेत्र के लिए रवाना हुए। गाड़ी धारटीधार और रामा घगेड़ा के बीच संपर्क मार्ग तक तो पहुँच गई, मगर टीना गुलरवाला की ओर मुड़ने वाली सड़क मलबे और टूट-फूट की वजह से पूरी तरह अवरुद्ध थी। चारपहिया वाहन का आगे जाना असंभव देखकर गाँव के लोग एकत्र हुए। उन्होंने शव को एक मजबूत डंडे से सुरक्षित बांधा और बारी-बारी से अपने कंधों पर टिकाकर ऊबड़-खाबड़, चट्टानी और जोखिम भरे रास्ते से चलना शुरू किया। करीब छह किलोमीटर की यह कठिन पैदल दूरी तय करके वे गाँव पहुँचे और फिर वहाँ के श्मशान घाट पर विधि-विधान से दाह संस्कार संपन्न हुआ।

बरसात के आरंभ से ही ठप पड़ा है संपर्क मार्ग

इलाकाई बाशिंदों का कहना है कि यह सड़क इस साल बारिश का मौसम शुरू होने के बाद से ही क्षतिग्रस्त होकर बंद पड़ी है। राज्य में मॉनसून का आगमन तीस जून को हुआ था और तीन अक्टूबर को उसकी विदाई भी दर्ज की जा चुकी है। इस बार मौसमी बरसात सामान्य से कम रहने के बावजूद पहाड़ी ढलानों से गिरे मलबे को हटाकर इस मार्ग को यातायात योग्य नहीं बनाया जा सका।

साल 2014 में हुआ था आठ किलोमीटर लंबे मार्ग का उद्घाटन

स्थानीय विवरण के अनुसार, लगभग आठ किलोमीटर की लंबाई वाले इस टीना गुलरवाला मार्ग की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस वक्त नाहन क्षेत्र के तत्कालीन विधायक राजीव बिंदल ने इसका विधिवत उद्घाटन किया था। यह संपर्क रास्ता आगे जाकर जलमूसा तथा कोलर के निकट स्थित कटासन मंदिर के पास पांवटा साहिब-कालाअंब राष्ट्रीय राजमार्ग से जा मिलता है। इलाके के प्रमुख हाईवे को जोड़ने वाला यह अहम लिंक मार्ग महीनों से बंद रहने से ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही और आपातकालीन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं।

सवाल-जवाब

यह घटना किस स्थान पर हुई?
यह मामला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन उपमंडल में धारटीधार इलाके की घगेड़ा पंचायत स्थित टीना गुलरवाला गाँव का है।
बुजुर्ग महिला का निधन कहाँ और कब हुआ था?
अस्सी वर्षीय परमा देवी का निधन रविवार सुबह करीब चार बजे पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के दौरान हुआ।
ग्रामीणों को शव डंडे से बांधकर पैदल क्यों ले जाना पड़ा?
टीना गुलरवाला जाने वाली सड़क लंबे समय से भूस्खलन के कारण बंद थी, जिससे शव वाहन आगे नहीं जा सका और छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
टीना गुलरवाला सड़क का निर्माण कब हुआ था?
लगभग आठ किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण 2014 में हुआ था और इसका उद्घाटन तत्कालीन विधायक राजीव बिंदल ने किया था।
हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून की अवधि क्या रही?
राज्य में इस साल मानसून ने तीस जून को दस्तक दी थी और तीन अक्टूबर को उसकी विदाई हुई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·30 दिन पहले

पहाड़ों की खूबसूरती के पीछे का सच बहुत डरावना होता है। एक तरफ हम फिल्मों में हिमाचल की वादियों के मजे लेते हैं, और दूसरी तरफ बुनियादी सड़कों के अभाव में लोगों को अपनों के शव तक कंधे पर ढोने पड़ रहे हैं। यह सिस्टम की बहुत बड़ी नाकामी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 दिन पहले

बरसात खत्म होने के इतने दिन बाद भी सड़क साफ क्यों नहीं हुई? प्रशासन कब जागेगा?

Ravikash Gupta@ravikash·30 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। मानसून गए महीनों हो गए, फिर भी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की यह हालत हैरान करने वाली है।

Rohan Verma@rohan-verma·30 दिन पहले

इतने महीनों से सड़क बंद होना और प्रशासन का ध्यान न देना बहुत लाचारी भरा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

रोहन, बिल्कुल सही कहा आपने। एक क्राइम रिपोर्टर होने के नाते मैं अक्सर देखता हूँ कि ग्रामीण इलाकों में ऐसी बुनियादी लापरवाही कितनी जिंदगियों पर भारी पड़ जाती है।

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